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संवेदक फर्म को अनियमितताओं के कारण टर्मिनेट किए जाने से बारां में दो जीएसएस के निर्माण रुक गया है।

बारां जिले में जयपुर डिस्कॉम द्वारा बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए बनाए जा रहे आठ नए 33 केवी जीएसएस में से दो का काम रुक गया है। संवेदक फर्म को अनियमितताओं के कारण टर्मिनेट किए जाने के बाद यह स्थिति बनी है। इससे लगभग 10 गांवों को निर्बाध बिजली मिलने में

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सरकार ने वर्ष 2023-24 के बजट सत्र में जिले के सांखली, तुलसां, मियाड़ा, बीलखेड़ा डांग, गुहाड़ी मझारी, महोदरा, गंदोलिया, माल बंमोरी मांगरोल में 33/11 केवी क्षमता के जीएसएस निर्माण की घोषणा की थी। इस योजना के लिए करीब 110 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया गया था। प्रत्येक जीएसएस पर 5-5 केवीए के पावर ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाने थे, साथ ही 86 किलोमीटर 33 केवी और 84 किलोमीटर 34 केवी क्षमता की लाइनें बिछाई जानी थीं।

अगस्त 2023 में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम द्वारा वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। हालांकि, दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आठ प्रस्तावित जीएसएस में से केवल छह का काम ही पूरा हो पाया है। शेष दो जीएसएस का काम संवेदक फर्म के टर्मिनेशन के कारण ठप पड़ा है।

निगम सूत्रों के अनुसार यह सभी जीएसएस बूट मॉडल पर संचालित करने की योजना थी। पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में 42 जीएसएस बनाने के लिए 237 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों की टेंडर प्रक्रिया हुई थी। सरकार बदलने के बाद इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आईं।

सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने टेंडर प्रक्रिया की उच्च स्तरीय जांच करवाई, जिसमें बूट मॉडल के नाम पर कई शर्तें जोड़कर चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का मामला सामने आया। यह मामला एसीबी तक भी पहुंचा। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने टेंडर प्रक्रिया रद्द कर दी और संवेदक फर्म को टर्मिनेट कर दिया।

अब जिले में तैयार हो चुके जीएसएस का संचालन जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (जेवीवीएनएल) द्वारा किया जाएगा। इस मामले पर जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बच रहे हैं।

2 के काम अधूरे होने से 10 गावों में परेशानी जस की तस

योजना के तहत सांखली, मियाड़ा, बीलखेड़ा डांग, गुरुड़ी मझारी, महोदरा, गंदोलिया में तो जीएसएस भवन तथा लाइन डालने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इन जीएसएस का संचालन भी जेवीवीएनएल की ओर से शुरू कर दिया है। जबकि तुलसां व माल बंमोरी में सिर्फ चारदीवारी व भवन का ही बनकर तैयार हो सके है, लेकिन लाइन डालने व जीएसएस का काम नहीं हो सका है।

ऐसे में इनसे जुड़े करीब 10 से अधिक गांवों को बिजली आपूर्ति को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ यहा है। यहां ओवरलोड सहित ट्रिपिंग की समस्या रहती है।बिजली निगम एक्सईएन कालूलाल मीणा ने बताया कि बूट मॉडल के तहत प्रस्तावित 8 में से 6 जीएसएस का काम पूरा हो गया है, लेकिन पिछले दिनों उच्च स्तर से संवेदक फर्म को टर्मिनेट कर दिया है।

तैयार हो चुके 6 जीएसएस अब जेवीवीएनएल के हैंडओवर किए जा चुके है। वहीं अब शेष रहे कार्यों के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया के लिए उच्च स्तर पर ही प्रक्रिया चल रही है।



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