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कौंसिल ऑफ एनर्जी, एन्वायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) की स्टडी में सामने आया है कि पिछले तीन दशकों में मानसून का पैटर्न तेजी से बदला है। राजस्थान की 77% तहसीलों में जून-सितंबर के दौरान 1982-2011 की तुलना में 30% से ज्यादा बारिश हुई।

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सीईईडब्ल्यू के फेलो नितिन बस्सी ने बताया कि जयपुर में औसत बारिश का आंकड़ा अब 593 मिमी पहुंच गया, जो 28.7% अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती बारिश के साथ जलभराव की मुख्य वजह शहर का तेजी से फैलता बिल्टअप एरिया है। जयपुर में यह हर साल 3.5% की दर से बढ़ रहा है। 1991 में 31% बिल्टअप एरिया 2021 तक 67% हो गया। वहीं 0-20 किमी एरिया में 2000 तक 174 वर्ग किमी निर्माण 2015 तक 267 वर्ग किमी हो गया।

ड्रेनेज सिस्टम 12-20 मिमी बारिश का, हो रही 40 मिमी

जयपुर में ड्रेनेज सिस्टम 12-20 मिमी बारिश के हिसाब से बना है, जबकि बारिश अब 40 मिमी तक हो रही है। शहर के 6 हजार किमी सड़क नेटवर्क में केवल 15% में ही ड्रेनेज सिस्टम है, जिससे जलभराव की समस्या और गंभीर होती जा रही है।

आंकड़े ऐसे बढ़ा बिल्टअप एरिया 467 वर्ग किमी जयपुर का कुल एरिया 31% 1991 में बिल्टअप एरिया 67% 2021 में बिल्टअप एरिया: 0-20 किमी एरिया : 2000 में 174 वर्ग किमी, 267 वर्ग किमी 2015 में

593 मिमी (28.7% ज्यादा) औसत बारिश अब तक

देशभर की स्थिति

163 देश बाढ़ से प्रभावित 1.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था पर असर



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