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शिक्षा विभाग की ओर से बीती रात जारी की गई 4527 प्रिंसिपलों की तबादला सूची ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि सूची बनाते समय न तो नियमों का पालन हुआ और न ही मानवीय पहलुओं का। कई प्रिंसिपल, जिनका रिटायरमेंट 3 से 9 महीने में है या जो गंभीर बीमार/
विरोध में उतरे संगठन अखिल राजस्थान विद्यालय शिक्षक संघ (अरस्तु) के प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि तबादला सूचियां देखने पर सामने आया कि यह सूचियां जीती जागती संवेदनहीनता दर्शाती है। जिनको 2 स्टेंट डले हुए हैं। सेवानिवृत्ति में 10 माह से कम है। दिव्यांग प्रधानाचार्य है। उनको भी जिला बदर कर दिया गया। राजस्थान शिक्षक संघ सियाराम के प्रशासनिक अध्यक्ष सियाराम शर्मा का कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों के स्थानान्तरण पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगा रखा है।
तबादलों के लिए प्रिंसिपलों से कोई आवेदन भी नहीं लिया। इसके बावजूद इस तरह से तबादले करना किसी भी दृष्टि से शिक्षा, शिक्षार्थी और प्राचार्यों के हित में नहीं है। इनमें एकल महिला विधवा, पति-पत्नी विकलांग आदि के भी स्थानान्तरण कर दिए गए जो गलत है। संगठनों का कहना है कि प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर शिक्षामंत्री द्वारा जारी करवाई गई तबादला सूचियों पर रोक लगाकर केंद्रीय स्तर पर जांच कराने की मांग की है।
तीन केस से जानिए…संवेदनहीनता के उदाहरण
केस 1 – विनोद पारीक का न्यू हसनपुरा (जयपुर) से कुशलपुरा जयपुर में तबादला किया गया। श्रीलाल मीणा का राउमावि सुशीलपुरा से दौसा जिले में तबादला किया गया। दोनों का ही रिटायरमेंट अगले साल जून 2026 में है। इसमें करीब 9 महीने बाकी है। फिर भी तबादला कर दिया गया।
केस 2 – देवकरण गुर्जर की पोस्टिंग लाखना जयपुर में थी। यह हार्ट पेशेंट हैं। इनके हार्ट मे दो स्टेंट डले हुए हैं। फिर भी तबादला कर दिया गया। इनका टोंक जिले के देवल में किया गया।
केस 3 –सुशील कुमार शर्मा हाथीबाबू का बाग में कार्यरत हैं। इनके रिटायरमेंट में 3 महीने बाकी है। जनवरी 2026 में रिटायरमेंट है। इनका खेजड़ी बुजुर्ग जयपुर में तबादला किया गया।
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