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आरएसएस ने देशभर में जारी धर्मांतरण और लव जिहाद की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इससे सामाजिक उपद्रव बढ़ने की चेतावनी के रूप में लिया है। आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि जबरदस्ती, लालच या भ्रम में डालकर किया जाने व
आंबेकर के अनुसार, देशभर में मतांतरण (धर्मांतरण) लगातार हो रहा है, जिसके कारण सामाजिक अशांति का वातावरण बन रहा है। उन्होंने बताया कि यह समस्या विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में अधिक गंभीर रूप धारण कर रही है, जहां लोगों को भ्रम में डालकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है।
इस समस्या से निपटने के लिए आरएसएस और उससे जुड़े संगठन निरंतर सक्रिय हैं:
- हिंदू समाज के साधु-संत और जागरूक व्यक्ति इस मुद्दे पर लगातार काम कर रहे हैं
- विश्व हिंदू परिषद और अन्य संगठनों द्वारा व्यापक स्तर पर आयोजन किए जा रहे हैं
- स्वयंसेवक इन सभी संगठनों के साथ मिलकर इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं
समाज के वंचित वर्गों तक पहुंच रहे: आंबेकर ने बताया कि धर्मांतरण से बचाव के लिए समाज के उन लोगों तक पहुंचना जरूरी है जहां अभी तक साधु-संत या धार्मिक कथाएं नहीं पहुंची हैं। इसके लिए:
- जाति, जनजाति, आर्थिक स्थिति के भेदभाव के बिना सभी तक पहुंचने का प्रयास
- दूरदराज के क्षेत्रों में विशेष फोकस
- मंदिरों और धार्मिक परंपराओं के माध्यम से जागरूकता
राजस्थान में विशेष चुनौती: राजस्थान के वागड़ क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बताई गई है, जहां:
- एक राजनीतिक दल के उदय के कारण “हम हिंदू नहीं हैं” की भावना फैलाई जा रही है
- केंद्रीय सांसद और राज्य विधानसभा सदस्य भी इस प्रचार में शामिल हैं
- पूजा-पाठ के विरोध का माहौल बनाया जा रहा है
संघ की आगे की रणनीति:
- धर्मांतरण के मामलों को उजागर (एक्सपोज) करना
- समाज के सभी वर्गों में जागरूकता फैलाना
- साधु-संतों और धार्मिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करना
- कानूनी तरीकों से इस समस्या से निपटना
सुनील आंबेकर के अनुसार, यह एक दीर्घकालीन संघर्ष है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होकर काम करना होगा। धर्मांतरण की समस्या केवल धार्मिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भावना के लिए गंभीर चुनौती है।
बाढ़ की आपदा में स्वयंसेवक मदद में जुटे
हाल के दिनों में कई राज्यों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, झारखंड सहित कई राज्य प्रभावित हैं। सतलुज, ब्यास और रावी – यह तीनों नदियां उफान पर हैं, जिससे पंजाब पर 37 साल बाद बाढ़ की ऐसी आफत आई है। गुरदासपुर, पठानकोट, फाजिल्का, कपूरथला, तरनतारन, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर में हालात सबसे अधिक खराब हैं। बहुत से लोग अब भी घरों की छतों या ऊंची जगहों पर फंसे हुए हैं। इन राज्यों में संघ व प्रेरित संगठनों के कार्यकर्ता हरसंभव मदद के कार्यों में जुटे हुए हैं।
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