राजस्थान में डॉलर-यूरो और विदेशी मुद्रा में निवेश कर कई गुना रिटर्न के नाम पर ठगी का बड़ा खेल सामने आया है। फोरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर दो कंपनियों VIP ट्रेड और EFOM इंडिया ट्रेड के मास्टरमाइंड सैकड़ों लोगों से करोड़ों रुपए ठगकर फरार हो गए।
झांसे में आकर कई हाईप्रोफाइल बिजनेसमैन और सरकारी कर्मचारियों ने मोटा पैसा इन्वेस्ट किया था। मजदूर और आइसक्रीम बेचने वालों तक ने बैंक से पर्सनल लोन, होम लोन और गोल्ड लोन उठाकर निवेश किया था। ठगी का पता लगते ही सदमे में आकर एक पीड़ित शख्स ने आत्महत्या तक कर ली। एक-एक कर पीड़ित थाने पहुंच रहे हैं। सबसे ज्यादा मामले अजमेर के किशनगढ़ से सामने आए हैं।
ठगी के इस खेल की भास्कर ने पड़ताल की। पीड़ितों से बातचीत में मास्टरमाइंड की असली कहानी सामने आई। जांच में जुटी पुलिस भी इसे कम से कम 500 करोड़ की ठगी मान रही है।
2 फर्जी ठग कंपनियां और दोनों के अलग-अलग मास्टरमाइंड पर क्राइम पैटर्न एक जैसा
सबसे पहले VIP ट्रेड का मायाजाल समझिए ….
करीब 2 साल पहले (साल 2023) किशनगढ़ के रहने वाले लोकेश चौधरी ने VIP ट्रेड के नाम से एक फोरेक्स ट्रेडिंग कंपनी खोली। ये कंपनी न तो सेबी से रजिस्टर्ड थी और न ही आरबीआई से कोई मंजूरी थी। फर्जी तरीके से ऑनलाइन ऐप बनाकर ट्रेडिंग के जरिए ठगी का खेल खेला गया।
किशनगढ़ के रिटायर्ड सरकारी कम्पाउंडर अब्दुल समद को कंपनी का प्रमोटर बनाया। अब्दुल समद पहले से राजस्थान में नेटवर्क मार्केटिंग का बड़ा खिलाड़ी था। उसके पास बड़ी इन्वेस्टर चेन और लोगों को झांसे में लेने का तरीका था।

कंपनी के जरिए लोकेश और अब्दुल समद ने पैसा इन्वेस्ट करने पर हर महीने 8 से 12 प्रतिशत इंट्रेस्ट रिटर्न देने का वादा किया। लोकेश चौधरी ने अपनी पत्नी ऋतिका चौधरी सहित कैलाश चौधरी, नरेंद्र चौधरी, धीरज गिठानी व बलवीर वैष्णव को अपने साथ बतौर स्टाफ शामिल किया। कंपनी का सारा लेन-देन यहीं लोग देखते थे। सीधे इन्वेस्टर्स के कॉन्टैक्ट में रहते थे।
लोकेश चौधरी ने अब्दुल समद के जरिए 100 से ज्यादा टॉप लीडर बनाए, जो इंवेस्टमेंट प्लान लेकर मार्केट में आम लोगो से डील करते थे। चेन सिस्टम से नए एजेंट्स तैयार करते थे। टॉप लीडर्स में रतन चंद्रा, रूपम शर्मा, पवन कुमार तगाया, हिदायत अली, यश टाक, देशराज, नियाज अहमद, शाहरुख, गोमाराम डूकिया, पन्नालाल चौधरी, निर्मला कंवर, रामेश्वर गुर्जर, रुखसार, मोहम्मद जाकिर, निर्मल कंवरिया और अजीज के नाम मुख्य तौर पर सामने आए हैं।

एक सेमिनार में लोगों को इन्वेस्टमेंट प्लान का झांसा देता आरोपी अब्दुल समद।
लोकेश चौधरी ने अपने इन्वेस्टमेंट लीडर्स के जरिए हजारों एजेंट तैयार किए। इन एजेंटों को बड़े टारगेट दिए जाते थे, जिन्हें पूरा करने पर थाईलैंड का फ्री टूर दिया जाता था। इनमें से 40-50 लोगों को अक्टूबर 2024 के आस-पास थाईलैंड ट्यूर पर भी भेजा गया था। इस दौरान टिकट से लेकर वहां घूमना-फिरना और खाने से लेकर लग्जरी होटलों में ठहरने तक का खर्चा लोकेश चौधरी ने ही उठाया था।

ट्रेडिंग कंपनी का कहीं कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था।
इन्वेस्टमेंट प्लान में बड़े सपने : 1 लाख लगाकर पाओ 8 हजार महीना
लोकेश चौधरी ने लोगों को फांसने के लिए इतना शातिर प्लान बनाया कि जो भी उसे समझता, उसका शिकार बन जाता। मिनिमम 100 डॉलर मतलब करीब 9 हजार रुपए से इन्वेस्टमेंट प्लान की स्टार्टिंग होती थी। इसके बदले में हर महीने 8 प्रतिशत ब्याज राशि मुनाफे के तौर पर दी जाती थी। वहीं एक लाख रुपए इन्वेस्ट करने पर महीने में 8 हजार रुपए का रिटर्न देने का दावा करता था। इसमें कोई लॉक-इन पीरियड नहीं रखा गया। यानी जब तक चाहो पैसा इन्वेस्ट रखो, जब चाहे निकाल लो, पैसों पर ब्याज मिलता रहेगा। इन्वेस्ट करने वाला व्यक्ति खुद भी कंपनी का एजेंट बन जाता। निवेश करवाने वाले को इन्वेस्ट रकम का 4 प्रतिशत वन टाइम रिवार्ड दिया जाता था।

कंपनी ने जयपुर में भी कई जगह सेमिनार कर लोगों से पैसा ठगने का प्रयास किया। हालांकि जयपुर से अभी तक कोई पीड़ित सामने नहीं आया है।
करीब 15 महीने तक लोगों को तय रकम मिलती रही। 16 महीने बाद लोकेश चौधरी ने अचानक प्लान में बदलाव कर किया- जिन इन्वेस्टर्स ने प्रिंसिपल राशि की तीन गुना ब्याज राशि कमा ली है, उन्हें अब कोई फायदा नहीं दिया जाएगा। इस बीच एजेंटों के जरिए तेजी से नए ग्राहक जोड़ने और पैसा इन्वेस्ट कराने को कहा। इसके एक दो महीने बाद अचानक ही कंपनी ने पुराने और नए सभी इन्वेस्टर्स को रिटर्न देना बंद कर दिया था। वर्ष 2024 में फरवरी महीने के बाद किसी भी इन्वेस्टर्स को जब ठगी का एहसास हुआ….तो लोगों ने थाने पहुंचना शुरू कर दिया।

वीआईपी ट्रेड ठगी के मास्टरमाइंड लोकेश चौधरी के साथ किशनगढ़ विधायक विकास चौधरी। पूर्व विधायक सुरेश टाक ने विकास चौधरी पर ठग के सरंक्षण का आरोप लगाया है। हालांकि विधायक ने आरोपों से इनकार किया है।
अब EFOM इंडिया ट्रेड कंपनी कैसे करती थी काम, जानिए
हरमाड़ा गांव का मूल निवासी हाल किशनगढ़ रामदयाल चौधरी पिछले 10 साल से नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियों से जुड़ा हुआ था। साल 2022 के अंत में रामदयाल चौधरी ने किशनगढ़ शहर में एक विदेशी फोरेक्स ट्रेड कंपनी की EFOM इंडिया नाम से ब्रांच खोली। हालांकि, इसका भारत में कोई भी रजिस्ट्रेशन नहीं था।

रामदयाल चौधरी ने सबसे पहले विक्रम सिंह रावत, जितेंद्र सिंह, नंदकिशोर वैष्णव, नितेश मीणा और सुनील मालाकार को इस कंपनी में मुख्य प्रमोटर और इंवेस्टर बनाया। इन सभी ने मिलकर कई टॉप लीडर्स बनाए, जिन्हें लोगों को ठगने का टारगेट दिया गया। कंपनी में 9 हजार रुपए से लेकर 10 लाख रुपए लगाने पर 3 गुना रिटर्न के वादे के साथ प्लान दिया गया। यानी एक लाख रुपए इन्वेस्ट किये तो उसे अगले 20 महीने में हर महीने थोड़ा-थोड़ा देकर टोटल 3 लाख रुपए देने का वादा किया गया था।
रामदयाल चौधरी ने किशनगढ़ के पास सुरसुरा गांव में ‘तेजल ड्रीम सिटी’ के नाम से 100 बीघा जमीन में नकली कॉलोनी काटी। बड़े इन्वेस्टर्स को गारंटी के नाम पर वहां प्लाट देने का वादा किया। इसके लिए एक लाख रुपए टोकन मनी अलग से ली। जबकि हकीकत में वो जमीन ही किसी दूसरे के नाम से थी।

रामदयाल चौधरी ने लैंड स्कीम काटने का झांसा लोगों को दिया था।
पार्टियों और सेमिनार में करते ब्रेन वॉश
लोकेश चौधरी और राम चौधरी सहित दोनों ही कंपनियों से जुड़े लीडर्स ज्यादा से ज्यादा लोगों को झांसे में लेने के लिए अजमेर, जयपुर, कोटा और किशनगढ़ की लग्जरी और फाइव स्टार होटलो में पार्टियां और सेमिनार आयोजित करवाते थे। सेमिनार में मोटिवेशनल स्पीकर व सेलिब्रेटी को बुलाकर अपनी धाक जमाते थे। फिर विदेश घूमकर आए एजेंटों, ज्यादा पैसा कमाने वाले लोगों को सेमिनार में आए नए लोगों के सामने पेश किया जाता था।

यह एक सेमिनार का वीडियो है, जिसमें वीआईपी ट्रेड की ठगी का मास्टरमाइंड लोकेश चौधरी लोगों को झांसे में लेने का प्रयास कर रहा है।
अकेले किशनगढ़ के दो थानों में 25 से ज्यादा मामले हुए दर्ज
इसी साल फरवरी महीने में लोकेश चौधरी अचानक से कंपनी बंद कर किशनगढ़ से फरार हो गया। यह खबर मिलते ही लोगों को ठगी का एहसास हुआ। कई इन्वेस्टर्स थानों में मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे। 9 और 10 फरवरी को अजीज मोहम्मद और हनुमान छरंग नाम के दो लीडर्स ने पहली बार लोकेश चौधरी और उसके साथियों के खिलाफ करीब 8 करोड़ रुपए की ठगी कर भगा जाने के दो केस दर्ज करा दिए।

वीआईपी ट्रेड कंपनी चलाने वाला लोकेश चौधरी अभी कहां है, उसके बारे में कोई सुराग पुलिस को नहीं लगा है।
ठगी का एक केस गांधीनगर थाने में तो दूसरा केस मदनगंज थाने में दर्ज करवा दिया। इनमें से हनुमान छरंग की एफआईआर में अब्दुल समद को भी आरोपी बनाया गया था। इसी बीच अब्दुल समद ने अपने घर में चोरी की शिकायत दी और परिवार के साथ अंडरग्राउंड हो गया। मार्च महीने के आखिर में EFOM कंपनी का मालिक रामदयाल चौधरी भी अचानक किशनगढ़ से गायब हो गया और फोन बंद कर लिया।
मदनगंज और गांधीनगर थाने में दोनों कंपनियों के ठगों के खिलाफ करीब 25 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। पीड़ितों के वकील एडवोकेट रुपेश शर्मा ने बताया कि वीआईपी ट्रेड कंपनी के खिलाफ 3 मामले मदनगंज थाने में तो वहीं 19 मामले गांधीनगर थाने में दर्ज करवाए हैं। इसके अलावा दो एफआईआर EFOM कंपनी के खिलाफ दर्ज करवाई हैं। एडवोकेट रुपेश शर्मा ने बताया कि EFOM कंपनी से पीड़ित एक व्यक्ति ने सदमे में सुसाइड भी कर लिया था, जिसका मामला दर्ज करवाया है।

ठगी के 2 छोटे मोहरे पकड़े, असल खिलाड़ी बाहर घूम रहे दो महीने पहले वीआईपी ट्रेड कंपनी के कैशियर बलवीर वैष्णव और मुख्य आरोपियों के फाइनेंशियल सपोर्टर नरेंद्र उर्फ नानू को गांधीनगर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। ठगी के शिकार लोग लगातार मामले दर्ज करा रहे हैं। पीड़ित बड़े पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रहे है, बावजूद इसके सैकड़ों करोड़ की ठगी के मुख्य आरोपी पुलिस पकड़ में नहीं आए हैं।

किशनगढ़ की गांधीनगर थाना पुलिस ने वीआईपी ट्रेड कंपनी के कैशियर बलवीर वैष्णव और नरेंद्र उर्फ नानू को दो महीने पहले गिरफ्तार किया था।
अब पढ़िए पीड़ितों की आपबीती …
केस-1 : मजदूरी करने वाले ने होम लोन और कर्ज लेकर किया इन्वेस्ट, सुसाइड किया
किशनगढ़ का ओमप्रकाश मजदूरी करता था। 12 अप्रेल 2025 को उसने पंखे पर लटककर फांसी लगा ली। भाई राकेश कुमार बंजारा ने बताया कि उसने सुसाइड नोट में लिखा था- ओम सैन व राकेश सैन ने मिलकर 7 दिन में ही मकान का पट्टा गिरवी रखवाकर 8 लाख का लोन दिलवाया।

राकेश कुमार बंजारा ने बताया कि इन ठगों के जाल में फंसकर भाई ने सुसाइड कर लिया।
फिर उन पैसों को EFOM कंपनी में इन्वेस्ट करवा दिए। रातों रात अमीर बनाने का लालच देकर 4 लाख रुपए फाइनेंसर्स से कर्ज दिलवा कर भी इन्वेस्ट करवा दिए। ठगों ने लोन के कुछ पैसों की डाउन पेमेंट से एक नई पल्सर बाइक भी फाइनेंस करवा दी। कहा- कोई पूछे तो बताना कि कंपनी में इन्वेस्ट में टारगेट अचीव करने पर रिवार्ड में मिली है।
पैसा वापिस मांगने पर एजेंट ओम सैन व राकेश सैन इनकार कर दिया। बताया- रकम तो EFOM कंपनी के रामदयाल चौधरी और जीतू सिंह के पास इन्वेस्ट करवा दी है। वहां से पैसे वापिस मांगे तो मारपीट की गई। इससे परेशान होकर भाई ने सुसाइड कर लिया। अब फाइनेंस कंपनी बार-बार हमें घर नीलाम करने की धमकी दे रही है। वहीं मेरे भाई की पत्नी को गले का कैंसर है और उसका ट्रीटमेंट चल रहा है। दोनों भाइयों के परिवार को पालने की जिम्मेदारी भी मेरे पर है। जिनसे कर्जा लिया था, वो भी परेशान कर रहे हैं।

व्हाइट शर्ट और चश्मे में सुसाइड करने वाला ओमप्रकाश बंजारा। उन्हें इन्हीं दो दोस्तों ने झांसे में लेकर ये पल्सर बाइक दिलाई थी।
केस-2 : कर्जे में डूबे, मकान बिकने की कगार पर
किशनगढ़ में कपड़े सिलाई कर घर चलाने वाली संतोष कंवर ने बताया कि अब्दुल समद हमारा पुराना पड़ोसी है। सालों से भरोसा बना हुआ था। उसने कई बार VIP ट्रेड कंपनी में इन्वेस्ट कर हर महीने कई गुना इनकम के प्लान दिए। झांसे में डेढ़ लाख रुपए उधार लाकर इन्वेस्ट कर दिए।

पीड़ित महिला संतोष कंवर।
शुरुआत में तो अब्दुल समद ने हमें बढ़िया रिटर्न भी दिया। अच्छी कमाई आती देख पापा- मम्मी, बहन के नाम से करीब 10 लाख रुपए इन्वेस्ट कर दिए। इसके लिए अपनी बहन का प्लॉट, खुद के गहने पर भी लोन उठा लिया। कई रिश्तेदारों के भी 8 लाख रुपए इन्वेस्ट करवा दिया। कुल 18 लाख रुपए में से महज 3 लाख रुपए ही हमारे वापस आए थे और कंपनी बंद हो गई। अब्दुल समद बोलता था- आपके लिए तो मैं ही कंपनी हूं। आप जब चाहो मुझ से ये पेमेंट ले लेना। अब वो पैसा लौटाने को तैयार नहीं हैं।
(रोते हुए) घर की हालत खराब हो गई है। चारों तरफ से कर्ज में डूब गए हैं। मार्बल की मूर्तियां घिसने जाते हैं। रोजाना इधर-उधर से उधार लेकर पैसा चुकाते हैं। तीन बार लोन की किश्तें ओवरड्यू हो चुकी हैं। अगर जल्दी ही हमारी रकम नहीं आई तो हमारा मकान बिक जाएगा। हम सड़क पर आ जाएंगे।

केस-3 : परिवार सहित आत्महत्या करने की नौबत
किशनगढ़ निवासी इमरान पठान भी ऐसे ही शिकारों में से एक हैं। बताते हैं- दो साल पहले उसको दोस्त सुनील मालाकार ने EFOM कंपनी का प्लान समझाया था। मेरे पीछे पड़ा रहा। दावे करता था- हर महीने 8 से 10 प्रतिशत ब्याज का प्रोफिट मिलेगा। गारंटी लेता था पैसा नहीं डूबेगा।
आखिरकार झांसे में आकर 5 लाख 40 हजार रुपए का इन्वेस्टमेंट कर दिया। अगले दो तीन महीने तक हर बार वो मुझे 50 से 60 हजार रुपए हर महीने प्रॉफिट देता रहा। ये देख कर मैंने जनवरी महीने में परिचितों, रिश्तेदारों और मिलने वाले करीब 70 लोगों के 60 लाख रुपए के आस-पास इन्वेस्टमेंट करवा दिए। उनमें से एक भी आदमी का एक रुपया नहीं आया। कंपनी बंद हो गई।

इमरान पठान प्राइवेट नौकरी के जरिए अपना परिवार चलाते हैं। जिनका पैसा निवेश करवाया था, उन्हें लौटाने के लिए भटकना पड़ रहा है।
अब हालत ये हैं कि रोज 50 लोग मेरे घर में पैसों का तकाजा करने आते हैं। उनसे छिपकर रहना पड़ता है। हालत ये है कि मैंने दो बार तो सुसाइड नोट तक लिख दिया। हालांकि परिजनों और कुछ मिलने वाले हिम्मत दे रहे है पर अगर जल्दी ही ये रकम नहीं आई तो मेरे पास कोई चारा ही नहीं बचेगा। पैसा इन्वेस्ट कराने वाले धमकियां दे रहे है कि जो करना है कर लो।

पुलिस कर रही मास्टरमाइंड की तलाश इस पूरे मामले को लेकर अजमेर के एडिशनल एसपी दीपक कुमार ने बताया कि मामले में पुलिस ने प्रोएक्टिव रहते हुए कार्रवाई की हैं। अब तक दो थानों में 25 के करीब मामले दर्ज हुए हैं। मामले में मुख्य आरोपियों के दो सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया हैं। मुख्य आरोपियों की तलाश की जा रही हैं। किशनगढ़ सीओ की अगुवाई में दोनों जांच अधिकारियों के साथ एक जिला लेवल एसआईटी टीम इसका इन्वेस्टिगेशन कर रही है।
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