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फतहसागर झील के बीच बने नेहरू गार्डन की राह 4 साल बाद फिर से खुलने वाली है, लेकिन बदले मार्ग से। 45 साल में पहली बार इस गार्डन के लिए रानी रोड छोर पर राजीव गांधी पार्क के पास से नावें चलाई जाएंगी। अभी तक इसी झील के मोती मगरी क्षेत्र से नावों का संचालन
नए प्वाइंट से गार्डन की दूरी करीब 1 किमी रहेगी, जबकि मोती मगरी से आधा किमी थी। यानी 500 मीटर का रास्ता बढ़ गया है। 4.5 एकड़ में फैले इस पार्क में एक पोखर, फूल का बगीचा, कई फव्वारे के साथ ही रेस्टोरेंट भी है। साल 2015 में झील में पानी का जलस्तर बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने गेट पर एक पाटिया खड़ा कराया था। इससे भराव क्षमता 13 से बढ़कर 14 फीट हो गई। जल स्तर बढ़ने से झील के बीच बने गार्डन का धरातल डूब गया और इसकी दुर्दशा होने लगी थी। यूडीए ने सौंदर्यीकरण के लिए 2021 में गार्डन को बंद किया। काम फरवरी 2023 से शुरू कराया। यह पिछले साल जनवरी तक पूरा होना था, लेकिन बारिश और पानी के भराव के कारण देरी हुई।
सौंदर्यीकरण पर करीब 7.5 करोड़ खर्च किए गए हैं। गार्डन में म्यूजिकल फाउंटेन, जंगल सीन पार्क, ओपन थियेटर, जहाजनुमा रेस्टोरेंट को नया रूप दिया गया है। मखमली हरी घास उगाई गई है। अभी लाइटिंग का काम बाकी है। गार्डन में रेस्टोरेंट भी अभी शुरू नहीं किया जाएगा। इसके लिए यूडीए टेंडर करेगी। लाइटिंग शुरू होने के बाद जंगल सीन, म्यूजिकल फाउंटेन, मल्टीमीडिया वाटर शो, 7-डी थियेटर, थीमेटिक प्रवेश द्वार, आर्टिफिशियल ग्लो एनीमल, एनिमेट्रोनिक्स, फसाड़ लाइटिंग व सेल्फी प्वाइंट शुरू होंगे। तब गार्डन रात 10 बजे तक खुलेगा।
57 साल पहले 1967 को इस गार्डन का उद्घाटन हुआ था। इसे साल 1980 में पर्यटकों के घूमने-फिरने के लिए खोला गया। शुरुआत में नावों का संचालन पर्यटन विभाग के पास रहा। फरवरी 2021 से इसे यूडीए को ट्रांसफर किया गया। तभी से रखरखाव व सौंदर्यीकरण के कामों को लेकर इसे बंद कर दिया गया। अब पर्यटक फिर से इसे देख सकेंगे।
रास्ता तो बदल दिया, लेकिन ये चुनौतियां रहेंगी
गर्मियों में रानी रोड छोर का पानी सूख जाएगा, नाव कैसे चलेंगी?
यूडीए ने रानी रोड छोर से नावें चलाने की तैयारी तो कर ली है, लेकिन गर्मियों के दाैरान झील के इसी हिस्से का पानी सबसे पहले कम पड़ता है। नीचे चट्टानें और जलीय खास है। पानी कम पड़ने पर नाव नहीं चल पाएंगी।
ये समाधान बता रहे अफसर
यूडीए का कहना है कि जेटी को झील में 50 फीट अंदर तक बना रहे हैं। पानी कम भी हुआ तो ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।
प्रवासी पक्षियों का क्या?
झील के रानी रोड वाले छोर पर झील में सन्नाटा सा पसरा रहता है। इसी कारण यहां प्रवासी सहित स्थानीय पक्षियों का जमावड़ा रहता है। जहां जेटी बनाई जा रही है, वहां कूट पक्षी सैकड़ों की तादाद में हैं। इन पर असर आने की संभावना रहेगी।
ये समाधान बता रहे
अफसरों का कहना है कि जहां जेटी है, वहां आसपास में पक्षियों के ठिकाने नहीं हैं। उनके लिए अलग से टापू बने हुए हैं। ऐसे में परिंदों के ज्यादा प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
30 सीटर 7 नावें, किराया 220 रुपए गार्डन में आने-जाने के लिए 30 सीटों वाली 7 डीलक्स इलेक्ट्रोनिक बोट शुरू होंगी। प्रति देशी-विदेशी पर्यटक 220 रु., 10 से 15 रु. गार्डन चार्ज भी लेंगे। हालांकि, अभी गार्डन का किराया तय नहीं हुआ है। नाव के किराये में ही जोड़कर इसे वसूला जाएगा। इस राशि में आना-जाना शामिल होगा।
यूडीए ने 2.66 करोड़ रुपए में 5 साल के लिए बोटिंग का टेंडर किया है। इस राशि में हर साल 10% की बढ़ोतरी होगी। इसी आधार पर टिकट की कीमत में इजाफा होगा। गार्डन तक नावों के आने-जाने के लिए राजीव गांधी पार्क के पास जेटी बनाने का काम शुरू हो गया है। फिलहाल नेहरू गार्डन में जाने-आने का समय सुबह 9 से सूर्यास्त तक रहेगा। बाद में बढ़ाकर रात 10 बजे तक किया जाएगा। यूडीए आयुक्त राहुल जैन ने बताया कि रक्षाबंधन और स्वतंत्रता दिवस तक गार्डन शुरू कर दिया जाएगा।
भीड़-पार्किंग जैसे कारणों से बदला मार्ग ट्रैफिक – अभी गार्डन तक नावों का संचालन मोती मगरी के पास से हो रहा था। यहां बोटिंग के 2 अन्य प्वाइंट भी हैं। हमेशा भीड़ रहती है। पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। ठेले और केबिन भी लगे हैं। जाम की समस्या रहती है।
फुटफॉल – फतहसागर पर अभी काला किवाड़ से झरने और पाल रोड पर रौनक नजर आती है। रोज 1500 पर्यटक पहुंचते हैं। मोती मगरी, मुंबइया बाजार, झरना-पाल पर रहती है, जबकि रानी रोड पर ऐसा नजारा नहीं दिखता।
नया डेस्टिनेशन – रानी रोड छोर पर पर्यटकों के मनोरंजन के लिए कोई खास प्वाइंट नहीं हैं। यह रोड अमूमन वाहन के जरिये झील के चक्कर लगाने के काम आती है। राजीव गांधी पार्क और संजीव पार्क हैं, लेकिन इनमें भी कुछ खास नहीं होने से स्थानीय लोग ही पहुंचते हैं। नेहरू गार्डन की नावों के संचालन से पर्यटकों के लिए यह नया डेस्टिनेशन रहेगा।।
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