बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया
भीलवाड़ा में हाई कोर्ट के आदेशों के बाद भी बनास नदी में बढ़ते हुए अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर आधा दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीण ट्रैक्टर ट्राली में भरकर भीलवाड़ा जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंप कर जिला कलेक्टर से बनास नदी बचाने
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सिविल पिटीशन से क्रेशर मशीनों से खनन पर रोक लगाने के बावजूद भी लीज धारक महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ऑर्डर का उल्लंघन किया जा रहा है और लगातार जेसीबी और क्रेशर मशीन से खनन किया जा रहा है।
सरकार को करोड़ों का नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि बनास नदी के ब्लॉक नंबर 7 में 8 से 10 मीटर गहराई तक खनन किया जा चुका है। जबकि इसकी परमिशन केवल 0.5 मीटर की है ।इससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपए का राजस्व का नुकसान हो रहा है ।ग्रामीणों ने बताया कि लीजधारक कंपनी द्वारा चारागाह भूमि पर रास्ते बना दिए गए, पेड़ों की कटाई कर दी गई और नदी के बहाव को रोक दिया गया है, जिसके चलते चारागाह नष्ट हो गई है, मवेशी भूखे मरने की स्थिति में है।

ग्रामीण बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर आए।
पुलिस और माइनिंग डिपार्टमेंट पर मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों ने पुलिस और माइनिंग डिपार्टमेंट पर लीजधारक से मिलीभगत के आरोप लगाते हुए कह कि पुलिस सुरक्षा में डंपरों की मदद से बजरी निकल जा रही है, विरोध करने पर ग्रामीणों को डराया धमकाया जाता है।ठेकेदार के कर्मचारी हथियार रखते हैं और मारपीट की धमकी भी देते हैं ।अगर अवैध खनन को नहीं रोका गया तो नदी की गहराई कुओं से ज्यादा हो जाएगी,जिससे सिंचाई और पीने के पानी के लिए संकट होगा। उन्होंने कहा कि बनास तभी हमारी मां है इसे बचाने के लिए हम अपने प्राण भी न्योछावर कर देंगे।
8 गांव के ग्रामीण ट्रेक्टर ट्रॉली भरकर पहुंचे
ग्रामीणों ने मांग की है कि अगर बजरी खनन किया जाता है तो वो केवल मजदूरों के माध्यम से हाथ से पारंपरिक तरीके से किया जाए ताकि नदी का स्वरूप और पर्यावरण सुरक्षित रहे ।इस दौरान चांदगढ़ , अकोला जीवा खेड़ा , खजाना , धोनी होलिराड़ा , गीगा का खेड़ा और बड़लियास सहित कई गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में ट्रैक्टर ट्राली लेकर भीलवाड़ा कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन किया।
ये है प्रमुख मांगे
- ब्लॉक नंबर 7 की लीज को निरस्त किया जाए।
- हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की सख्ती से पालन करवाई जाए।
- अवैध मशीनों और डंपरों पर कार्रवाई हो।
- माइनिंग विभाग और लीज धारक के बीच की मिलीभगत की जांच की जाए।
- पर्यावरण और चारागाह भूमि की बहाली की व्यवस्था की जाए।

बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए
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