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भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को युवा वर्ग तक पहुंचाने के अपने सतत प्रयासों के तहत स्पीक मैके ने जयपुर में एक संगीत आयोजन किया।

भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति को युवा वर्ग तक पहुंचाने के अपने सतत प्रयासों के तहत स्पीक मैके ने जयपुर में एक संगीत आयोजन किया, जिसमें पद्मश्री सम्मानित गायिका विदुषी सुमित्रा गुहा ने अपनी रचनाओं और सुरों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्य

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स्कूल में आयोजित संगीत सभा की शुरुआत राग बैरागी भैरव की पारंपरिक रचना सुर सुर से साध ले रसिक गाओ से हुई, जिसे तीनताल में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद राग गुर्जरी टोडी की तेज लय वाली एकताल में खुद की रचना बजे बजे बजे डमरू और अंत में मीरा भजन मैं तो सांवरे रंग राची ने वातावरण को भक्तिरस से भर दिया।

संगीत सभा की शुरुआत राग बैरागी भैरव की पारंपरिक रचना सुर सुर से साध ले रसिक गाओ से हुई, जिसे तीनताल में प्रस्तुत किया गया।

संगीत सभा की शुरुआत राग बैरागी भैरव की पारंपरिक रचना सुर सुर से साध ले रसिक गाओ से हुई, जिसे तीनताल में प्रस्तुत किया गया।

विद्यालय के प्राचार्य ए.के. शर्मा ने कलाकारों का हार्दिक स्वागत किया और स्पीक मैके की जयपुर संयोजिका हिमानी खींची सहित विद्यालय की पूर्व छात्रा भाव्या का भी अभिनंदन किया। शर्मा ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे भारतीय संगीत की इस विरासत को समझें और इससे जुड़ें।

ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के मंच पर सुमित्रा गुहा ने राग श्रीरंजिनी में हे दीननाथ हे जगन्नाथ और सांवरे सलोने सुंदर श्याम जैसी रचनाओं से कार्यक्रम का आरंभ किया। इसके पश्चात राग चारुकेशी में एकल प्रस्तुति और मीरा भजन कहां कहां जाऊं तेरे साथ कन्हैया ने श्रोताओं को गहरे भावनात्मक स्पंदनों से जोड़ दिया।

यूनिवर्सिटी के मंच पर सुमित्रा गुहा ने राग श्रीरंजिनी में हे दीननाथ हे जगन्नाथ और सांवरे सलोने सुंदर श्याम जैसी रचनाओं से कार्यक्रम का आरंभ किया।

यूनिवर्सिटी के मंच पर सुमित्रा गुहा ने राग श्रीरंजिनी में हे दीननाथ हे जगन्नाथ और सांवरे सलोने सुंदर श्याम जैसी रचनाओं से कार्यक्रम का आरंभ किया।

यहां मंच संचालन और आयोजन में स्पीक मैके जयपुर की टीम के मौली और देवराज की सराहनीय भूमिका रही। यूनिवर्सिटी के डॉ. नवीन शर्मा ने दोनों की प्रशंसा करते हुए युवाओं को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

विदुषी सुमित्रा गुहा के साथ संगत में राजेन्द्र प्रसाद बनर्जी (हारमोनियम), प्रदीप कुमार सरकार (तबला), रेणु (तानपूरा) शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में सुमित्रा गुहा ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए रागों की विशेषताओं, साधना की भूमिका और भारतीय शास्त्रीय संगीत के महत्व पर गहराई से चर्चा की।



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