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पीड़ित महिलाओं को एक छत के नीचे मिलेगी मदद

जिले की महिलाओं को हिंसा, उत्पीड़न और संकट की स्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने वाला सखी वन स्टॉप सेंटर अब नए भवन में शिफ्ट होगा। इसके लिए 43.90 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। नया भवन महिला अधिकारिता विभाग के कार्यालय परिसर में बनेगा।

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जिला कलक्टर डॉ. अरुण गर्ग के विशेष प्रयासों से यह मंजूरी संभव हो सकी है। अब तक सखी वन स्टॉप सेंटर बीडीके अस्पताल परिसर में संचालित हो रहा था, लेकिन वहां चल रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक निर्माण कार्य में यह भवन बाधक बन रहा था। इस वजह से निर्माण कार्य भी अधर में लटका हुआ था। लंबे समय से दोनों विभागों के बीच समन्वय की जरूरत महसूस की जा रही थी।

जिला प्रशासन की पहल और विभागों के आपसी तालमेल के बाद यह समाधान निकाला गया कि सेंटर को महिला अधिकारिता विभाग की जमीन पर ही स्थानांतरित किया जाए। इसके लिए क्रिटिकल केयर ब्लॉक की बजट राशि से ही 43.90 लाख रुपए की राशि स्वीकृत कर दी गई है।

महिला अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक विप्लव न्यौला ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, जयपुर से प्राप्त निर्देशों और जिला कलेक्टर झुंझुनूं के पत्र के क्रम में यह स्वीकृति जारी हुई है। उन्होंने बताया कि नया भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा, जहां महिलाओं को परामर्श, कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा और पुलिस सहयोग जैसी सेवाएं एक ही छत के नीचे मिल सकेंगी। इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर पीड़ित महिलाओं और उनके बच्चों को अस्थायी आश्रय भी सेंटर पर उपलब्ध कराया जाएगा।

न्यौला ने बताया कि सखी वन स्टॉप सेंटर की अवधारणा ही महिलाओं को एक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराना है। यहां हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को तुरंत राहत और न्याय प्रक्रिया से जुड़ी सभी आवश्यक सेवाएं एक ही स्थान पर मिल जाती हैं। अभी तक सेंटर बीडीके अस्पताल परिसर में संचालित हो रहा था, लेकिन जगह की कमी और निर्माण कार्य के चलते कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही थीं।

जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि यह कदम महिलाओं के हित में एक बड़ी राहत साबित होगा। उन्होंने कहा कि “काफी समय से बीडीके अस्पताल में चल रहे निर्माण कार्य में सखी वन स्टॉप सेंटर भवन बीच में आने से कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था। अब दोनों विभागों के आपसी तालमेल और जिला प्रशासन के मोटिवेशन के बाद सखी वन स्टॉप सेंटर महिला अधिकारिता विभाग के परिसर में ही बनाया जाएगा, जिसके लिए निर्माण राशि भी स्वीकृत कर दी गई है।”

महिला अधिकारिता विभाग का मानना है कि जब महिलाएं हिंसा या उत्पीड़न का शिकार होती हैं, तो उन्हें अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी पुलिस स्टेशन, कभी अस्पताल, तो कभी अदालत। इस प्रक्रिया में समय भी लगता है और पीड़िता मानसिक रूप से और अधिक तनावग्रस्त हो जाती है। सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य यही है कि महिला को सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे तत्काल उपलब्ध हों।



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