बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता कर्नल सोनाराम चौधरी का दिल्ली में बुधवार रात को निधन हो गया। सीने में दर्द होने पर वे खुद गाड़ी से अपोलो हॉस्पिटल पहुंचे। वहां उनका ऑपरेशन हुआ। इसके बाद उन्होंने खुद को स्वस्थ्य बताते हुए एक पोस्ट भी शेयर
इसके कुछ देर बाद रात करीब 11:15 बजे उनका निधन हो गया। सोनाराम चौधरी चाहे बीजेपी में रहे या फिर कांग्रेस में हमेशा अपने बेबाक बयानों की वजह से चर्चा में रहे। अपनी ही पार्टी के नेताओं से मतभेद भी हुआ। चाहे हरीश चौधरी हों या फिर मेवाराम जैन। मेवाराम जैन को हराने के लिए वे खुद भाजपा उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए थे।
वे चाहते थे कि राजस्थान का सीएम कोई किसान होना चाहिए। उनके इसी स्टैंड की वजह से पूर्व सीएम अशोक गहलोत से विरोधाभास भी रहा। जब पूर्व सीएम वसुंधरा राजे उन्हें बीजेपी में लाईं और सांसद का चुनाव लड़ाया तो अटल बिहारी वाजपेयी के खास रहे जसवंत सिंह को बड़े अंतर से हराया।
बेनीवाल की जीत पर बोले- यह कर्नल सोनाराम की जीत है 2024 लोकसभा चुनाव में RLP छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए उम्मेदाराम बेनीवाल ने लोकसभा चुनाव लड़ा। तब पूरी कांग्रेस के दिग्गज नेता एकजुट नजर आए। इसमें कर्नल सोनाराम चौधरी, पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी, हरीश चौधरी समेत तमाम नेता शामिल रहे।
लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कर्नल सोनाराम चौधरी ने स्पीच में कहा था- जब वो जीते तो मोबाइल पर बधाई दी। तब मैंने उनसे कहा उम्मेदाराम जी आप नहीं जीते हैं, यह कर्नल सोनाराम चौधरी जीता है। कोई फर्क नहीं है। मुझे उम्मीद है उम्मेदों का उम्मीद उम्मेदाराम जी आपकी 5 साल तक बहुत सेवा करेंगे।
पूर्व सीएम से खिलाफत, हरीश चौधरी से भी मतभेद रहा 1994 में सेना से रिटायर होने के बाद परसराम मदेरणा उन्हें राजनीति (कांग्रेस) में लेकर आए। परसराम मदेरणा के वे खास माने जाते थे। 2008 में जब उन्होंने बायतु विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। इस जीत के बाद उन्होंने बयान दिया था कि राजस्थान का सीएम किसान होना चाहिए। उनकी इच्छा थी कि मदेरणा को सीएम के पद से नवाजा जाए। अशोक गहलोत सीएम बने। इसी के बाद से उनकी तल्खी बढ़ गई। इसके बाद भी कई बार उन्होंने कहा था कि राजस्थान का सीएम किसान होना चाहिए।
इधर, 2009 में लोकसभा चुनाव के बाद उनकी हरीश चौधरी से भी मतभेद शुरू हो गए। 2009 में सांसद का चुनाव हरीश चौधरी ने लड़ा और पहली बार में ही वे जीत गए थे। इससे पहले लंबे समय से कर्नल सोनाराम चौधरी ही सांसद रहे थे। इसके चलते दोनों के बीच कुछ मुद्दों पर राजनीति अदावत थी। इसी के चलते दोनों के बीच मतभेद होना शुरू हो गए थे, जो लंबे समय तक रहे। लेकिन, कांग्रेस में कर्नल की वापसी के बाद सुलह हो गई।

कर्नल सोनाराम ने बीजेपी से बगावत कर जैसलमेर-बाड़मेर सीट से चुनाव लड़ा था।
अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमान कहे जाने वाले जसोल को हराया कर्नल सोनाराम चौधरी के पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से राजनीतिक तौर पर अच्छे संबंध थे। वसुंधरा राजे 2014 में कर्नल को बीजेपी में लेकर आईं। बीजेपी टिकट देकर बाड़मेर-जैसलमेर से चुनाव लड़वाया था।
कर्नल की पार्टी में एंट्री से अटल बिहारी वाजपेयी के हनुमान कहे जाने वाले जसवंत सिंह जसोल नाराज हो गए। इस पर बीजेपी से बगावत करके निर्दलीय चुनाव लड़ा था। वसुंधरा राजे ने अपनी पूरी ताकत लगाते हुए कर्नल सोनाराम चौधरी को यहां से जीता दिया।
पूर्व विधायक से अदावत कर्नल सोनाराम चौधरी और पूर्व विधायक मेवाराम जैन के बीच राजनीति अदावत काफी रही। मई 2017 में जिला जिला परिषद की मीटिंग में सांसद सोनाराम चौधरी और बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन आमने-सामने हो गए। उन्होंने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लगा दी। मेवाराम जैन ने मीटिंग में कहा था कि भ्रष्टाचार को लेकर सांसद सोनाराम चौधरी का बाड़मेर स्थित निजी आवास भी संदेह के घेरे में है, उसकी जांच होनी चाहिए।
इस पर दोनों आमने-सामने हो गए। विधायक जैन अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोप पर कहा कि हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने भी कथित भ्रष्टाचार को लेकर उन्हें क्लीन चिट दे दी है। सांसद ने कहा कि कोर्ट की बात छोड़िए, अब आगे-आगे देखिए, तुम्हारा क्या होता है। इस दौरान दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर करीब पन्द्रह मिनट तक चला।
इसी अदावत के चलते 2018 में जब पूर्व विधायक मेवाराम जैन चुनावी मैदान में उतरे तो उन्हें हराने के लिए बाड़मेर से कर्नल सोनाराम चुनावी मैदान में उतरे और भाजपा से चुनाव लड़ा। इधर, इस सीट पर बीजेपी से तैयारी कर रही डॉ. प्रियंका चौधरी नाराज हो गईं। कर्नल इनको मनाने के लिए घर भी पहुंचे थे। लेकिन, अंदरखाने नाराजगी का खामियाजा भुगतते हुए कर्नल सोनाराम चौधरी बड़े अंतर से कांग्रेस के मेवाराम जैन से चुनाव हार गए थे।
2019 में बीजेपी ने काटा टिकट तो नाराज हुए कर्नल सोनाराम चौधरी बीजेपी से लगातार दूसरी बार 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट मांग रहे थे। लेकिन, बीजेपी ने उनको टिकट नहीं देकर बायतु विधानसभा सीट से हारे कैलाश चौधरी को टिकट दे दिया।
तब कर्नल सोनाराम चौधरी नाराज हो गए। तब उन्होंने कहा कि कैलाश चौधरी चुनाव नहीं जीत पाएंगे। तब सामने कांग्रेस टिकट पर कर्नल मानवेंद्र सिंह जसोल चुनाव लड़ रहे थे।

वसुंधरा राजे कर्नल सोनाराम को बीजेपी में लेकर आई थीं।
आरएलपी सांसद हनुमान से रहे मतभेद कर्नल के आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल से हमेशा मतभेद रहे। कर्नल अलग-अलग मंचों से कई बार कह चुके थे कि हनुमान बेनीवाल पढ़ाई करने वाले युवाओं को राजनीति में लेकर आ रहे हैं। इससे युवा पढ़ाई से दूर हो रहे हैं।
रिफाइनरी को लेकर किया था प्रदर्शन यूपीए सरकार ने बायतु के लीलाना में रिफाइनरी की घोषणा की गई थी। लेकिन, बायतु में जमीन अधिग्रहण (एक्वायर) और मुआवजे को लेकर किसानों के साथ कर्नल सोनाराम चौधरी धरने पर बैठ गए थे। तब ज्यादा विरोध होने पर सरकार ने रिफाइनरी की जगह बदलकर पचपदरा कर दी गई थी। तब कर्नल सोनाराम चौधरी ने जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।
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कर्नल सोनाराम के निधन की खबर पढ़िए…
कांग्रेस-नेता और 4 बार सांसद रहे कर्नल सोनाराम का निधन:खुद को स्वस्थ बताते हुए पोस्ट शेयर की, कुछ देर बाद ही निधन, सीने में हुआ था दर्द

बाड़मेर-जैसलमेर के पूर्व सांसद और कांग्रेस नेता कर्नल सोनाराम चौधरी का दिल्ली में बुधवार रात को निधन हो गया। वे दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल के पास किसी मीटिंग में शामिल होने गए थे। (पढ़ें पूरी खबर)
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