जयपुर में रविवार सुबह तीन महिलाएं और तीन पुरुष पानी की टंकी पर चढ़ गए। जो श्री जगदीश धाम योजना में भूखंड मालिक हैं। कुछ देर बाद तीनों पुरुष नीचे आ गए, लेकिन महिलाएं टंकी पर बैठी रहीं। जिन्हें रात करीब 8 बजे नीचे उतारा गया।
सभी ने नगर निगम ग्रेटर के डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट समेत चार लोगों पर जमीन पर कब्जा दिलाने में रुकावट डालने का आरोप लगाया। वहीं, पुनीत कर्णावट का कहना है कि पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी साजिश है। इसमें फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोगों को गुमराह कर जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह करीब सवा 11 बजे शुरू हुए इस घटनाक्रम की सूचना पर पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची थी। प्रतापनगर स्थित पानी की टंकी के नीचे जाल लगाया गया था। अधिकारी मौके पर पहुंच गए थे। टंकी पर चढ़े लोगों को समझाने में जुटे थे। वहीं, महिलाएं कूदने की धमकी दे रही थे।
सांगानेर डीएसपी विनोद समेत पुलिस के अधिकारी महिलाओं को समझाने की कोशिश की। महिलाएं नगर निगम ग्रेटर के उप महापौर को मौके पर बुलाने पर अड़ी थी। डीएसपी विनोद ने बताया – पिछले डेढ़ महीने से ये महिलाएं शिकायत लेकर आ रही हैं। लेकिन कोई पेपर नहीं दिखाती, ऐसे में हम किसी पर कैसे कोई कार्रवाई करें।
10 दिन में निष्पक्ष जांच कराने का भी आश्वासन दिया
पुलिस के आला अधिकारियों ने समझाइश कर तीनों महिलाओं और पुरुषों को रात करीब 8 बजे नीचे उतार लिया गया। इसके साथ ही मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने टंकी पर चढ़ने वाले लोगों को 10 दिन में निष्पक्ष जांच कराने का भी आश्वासन दिया है

टंकी पर चढ़े लोगों को समझाने की कोशिश की जा रही है।
एक मांग पत्र अधिकारियों को सौंपा
पानी की टंकी पर चढ़े लोगों की ओर से एक मांग-पत्र भी जारी किया गया है। इसमें श्री जगदीश धाम योजना के भूखंड धारकों ने बीजेपी के डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावट, प्राईम बिल्ड होम के निदेशक गोविंद अग्रवाल पर जमीन कब्जाने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं। साथ ही निर्माण कार्य में बाधा डालने का आरोप लगाया है।
भूखंड धारकों का कहना है कि यह भूमि अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति से वैध रूप से ली गई है। लेकिन अब कुछ लोग कब्जा देने में टालमटोल कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची।
टंकी पर चढ़ी महिलाओं के साथ आए तुलसीराम चौधरी ने बताया- हम लोगों ने 1998 में श्री जगदीश धाम योजना के नाम से पट्टे लिए थे। श्री जगदीश धाम योजना के नाम से अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति लिमिटेड ने कॉलोनी काटी थी। जिस जगह पर कालोनी काटी गई, उसे लेकर कुछ विवाद था। यहां तालाब है, इस कारण से जमीन पर स्टे आ गया। हमने पजेशन नहीं लिया।
2005 में केस करने पर स्टे आया। इसके बावजूद 2005 में पुनीत कर्णावत ने इस जमीन की रजिस्ट्री करवा ली। 2022 में इस जमीन को लेकर फैसला आया। पुनीत कर्णावट ने इस जमीन पर जेडीए अप्रूव्ड कराकर दूसरी कॉलोनी काट दी। इस जगह पर हमारे पहले से ही भूखंड थे। हम लोगों को पता चलने पर मौके पर गए। हमें वहां पर पजेशन नहीं लेने दिया गया। अब पुलिस और गुंडे धमकी दे रहे हैं। पुनीत कर्णावत से भी कई बार मिले,लेकिन वो भी डराते धमकाते हैं।
इस योजना में कुल 206 भूखंड धारी हैं। 13 को पजेशन मिला हुआ है। जो ऊपर महिलाएं चढ़ी हुई हैं, इनके भी उसमें प्लॉट हैं। यह लोग काफी सालों से यहां पर रह रही हैं।

पानी की टंकी के नीचे जाल लगाया गया।
पुनीत कर्णावट बोले- फर्जी पट्टों और ब्लैकमेलिंग के प्रयासों को लेकर पहले ही दो एफआईआर दर्ज
उपमहापौर पुनीत कर्णावट ने बताया- अचरोल गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा जारी किए गए फर्जी पट्टों और ब्लैकमेलिंग के प्रयासों को लेकर पहले ही दो एफआईआर दर्ज हैं। इनमें प्रमुख आरोपी वही लोग हैं, जो अब टंकी पर चढ़कर पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हमारी कंपनी प्राइम बिल्डहोम प्राइवेट लिमिटेड ने साल 2005 में यह जमीन चेक से भुगतान कर विधिवत रजिस्ट्री करवाई थी। अचरोल समिति ने न तो ‘जगदीश धाम’ नाम से कोई योजना बनाई, न ही ग्राम टीलावाला में कभी कोई जमीन खरीदी। यह बात राजकीय रिकॉर्ड, जयपुर विकास प्राधिकरण की रिपोर्ट और सहकारी विभाग की ऑडिट रिपोर्ट से प्रमाणित है।
समिति का कार्यक्षेत्र अचरोल ग्राम तक सीमित था। 2015 में इसके पंजीयन को भारी फर्जीवाड़े के कारण रद्द कर दिया गया था। यह पूरा घटनाक्रम एक सोची-समझी साजिश है। इसमें फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोगों को गुमराह कर जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।

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