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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने फल, सब्जियों और मसाला फसलों की 94 नई किस्मों को अधिसूचित किया है। इनमें 11 किस्मों को राजस्थान की जलवायु के लिए अनुशंसा की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वर्षों के शोध के बाद वि
अधिसूचना के अनुसार राजस्थान के लिए उपयुक्त किस्मों में आलू की कुफरी रतन, कुफरी चिपभारत–1 व 2 है। जबकि प्याज की एनएचआरडीएफ के–883 (एल 883) किस्म की अनुशंसा की गई है। इस प्याज की खेती राजस्थान के साथ हरियाणा व पंजाब में भी की जा सकेगी। वहीं, बेर की काजरी गोला किस्म को राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्से के लिए उपयुक्त बताया गया है। इसे काजरी जोधपुर की ओर से विकसित किया गया है। यह किस्म अपने आकार सेब जैसा और मीठे स्वाद के कारण काफी लोकप्रिय है और इसे रेगिस्तान का सेब भी कहा जाता है।
काजरी संस्थान बेर की कई अन्य किस्मों पर भी शोध कर रहा है। जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। इसी तरह औषधि व मसाला फसलों में सौंफ की गुजरात फेनल 13 (जीएफ13) किस्म को गुजरात के साथ राजस्थान, हरियाणा, बिहार और उत्तरप्रदेश की जलवायु को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
जोधपुर जीरा–1 (जेजे–1) (एमसीयू–105) किस्म को राजस्थान मिट्टी, पानी व तापमान के लिहाज से बनाया गया है। वहीं, इसबगोल की नई किस्म प्रताप इसबगोल–1 (यूआई–124) को राजस्थान के लिए अनुशंसित की गई है। इसी तरह असालिया की नई किस्म प्रताप असालिया–1, (यूएलएस 15) भी राजस्थान के लिए उपयुक्त है।
कांटों से मुक्ति, सांगरी का उत्पादन भी ज्यादा
राज्य वृक्ष खेजड़ी की नई किस्म थार शोभा पर बरसों तक कृषि विश्वविश्वद्यालय बीकानेर के वैज्ञानिकों ने शोध किया। अब मंत्रालय ने वैज्ञानिकों के प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए थार शोभा किस्म की अनुशंसा कर दी है। इस किस्म की खेजड़ी कंटीली नहीं होती और सांगरी के लिहाज से बहुत फायदेमंद है। इसकी ऊंचाई कम होने से किसान आसानी से फलियां एकत्र कर लेते हैं। वहीं, खरबूजे की नई किस्म थार कस्तूरी भी रेगिस्तानी क्षेत्रों में अच्छी पैदावार देगी।
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