साल 2010… ।
खैरथल-तिजारा का मातौर गांव… ।
मामा-भांजे ने नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के नाम से फाइनेंस कंपनी बनाई। खुद का ऑफिस खोला और लोगों को रकम पर साल का 24% तक ब्याज देने का झांसा दिया। बॉन्ड, पासबुक और रसीदें भी छपवाईं।
पहले कुछ साल ब्याज के साथ रुपए लौटाकर विश्वास जीता। इसके बाद लोग झांसे में आकर मेहनत से कमाई हुई मोटी रकम FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) और RD (रिकरिंग डिपॉजिट) में जमा कराने लगे। 15 साल में निवेश के नाम पर जमा किए गए करोड़ों रुपए मामा-भांजा लेकर फरार हो गए।
आक्रोशित लोगों ने गांव में उनके घर में घुसकर तोड़फोड़ कर दी और तीन बाइकों को आग के हवाले कर दिया। पुलिस पहुंची तो लोगों का गुस्सा देख वापस लौटना पड़ा, लेकिन बाद में भारी जाप्ते के साथ लौटकर पहुंची। फिलहाल गांव में शांति है।
भास्कर ग्राउंड पर पहुंचा और लोगों से बातचीत की।
अब गांव के घर-घर में एक ही चर्चा है कि मेहनत से कमाकर जमा किया रुपया वापस कैसे आएगा? सिलाई, खेतों में मेहनत-मजदूरी कर जमा कराए रुपयों से किसी को बेटियों की शादी करनी थी तो किसी को मकान बनाना था। अब सभी सपने चूर होते दिख रहे हैं।
सबसे पहले घटना से जुड़ी ये तस्वीरें देखें …

मातौर में बस स्टैंड के पास मैन रोड पर बने ऑफिस को बंद कर आरोपी फरार हो गए।

मातौर गांव में दाताराम चौधरी के घर पहुंचे आक्रोशित लोगों ने तीन बाइक आग के हवाले कर दी।

मातौर गांव में दाताराम के मकान के अंदर घुसकर तोड़फोड़ कर तहस नहस कर दिया।

मकान के अंदर एसी-फ्रीज समेत घरेलू सामान को तोड़ दिया गया।
अब पूरा घटनाक्रम सिलसिलेवार पढ़िए…
मातौर गांव में रहने वाला दाताराम चौधरी खेती-बाड़ी के साथ पशुओं से अच्छी कमाई कर रहा था। साल 2018 में हरियाणा में रहने वाले भांजे नरेश चौधरी ने ठगी की योजना बनाई। मामा-भांजे ने मिलकर नवअंश इंडिया निधि लिमिटेड के नाम से फाइनेंस कंपनी बनाई। इसके बाद मातौर गांव में बस स्टैंड के पास मेन रोड पर खुद की दुकानों में ऑफिस खोला।
इसके बाद दोनों ने लोगों से संपर्क कर खाते खुलवाने और राशि अलग-अलग स्कीमों में जमा करवाने के लिए राजी किया। गांव के कुछ लोगों को एजेंट बनाकर खाते खुलवाने का टारगेट दिया। लोगों को राशि पर 2 प्रतिशत मासिक (सालाना 24 प्रतिशत) ब्याज देने का झांसा दिया गया।
लोन लेने पर राशि पर 3 प्रतिशत ब्याज और तय समय से पहले जमा राशि निकलवाने पर 10 प्रतिशत कटौती का नियम बनाया गया। इन शर्तों को रसीद और पासबुक पर प्रिंट करवाया गया।

रुपए जमाने कराने वाले लोगों को इस तरह की रसीदें दी गई।
ऐसे शुरू किया ठगी का खेल
सबसे पहले स्थानीय कमेटियों (लॉटरी सिस्टम) में बचत की राशि जमा कराने वालों को टारगेट किया गया। ब्याज के साथ जमा राशि लौटाने का वादा किया। लोगों को 3 प्रतिशत ब्याज पर रुपए दिए जाने लगे। जरूरत पर लोगों को लोन मिलने लगे और लेनदेन बढ़ता गया।
15 साल तक कई लोगों को ब्याज समेत राशि लौटाई गई। लालच बढ़ा तो निवेशक स्कीम मैच्योर होने वाली राशि को वापस जमा कराने लगे। इसके साथ ही अन्य लोगों ने भी बचत और पेंशन के रुपयों के अलावा मोटी रकम जमा कराना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के अलावा खैरथल-तिजारा और मुंडावर के हजारों लोगों के खाते खोले गए। ऑफिस में करोड़ों रुपए जमा हो गए।

फाइनेंस कंपनी में खाता खुलवाकर रुपए जमा कराने वालों को पासबुक जारी कर लेनदेन को मेंनटेन किया जाता था।
अचानक लेनदेन बंद होने से शंका
करीब दो महीने पहले ऑफिस में लोगों को रुपए देना बंद कर दिया गया, जबकि राशि जमा करने की प्रक्रिया चलती रही। लोग परेशान होने लगे तो रुपयों के डूबने का डर सताने लगा। लोगों ने ऑफिस में खाते खुलवाने वाले एजेंटों को पकड़ना शुरू कर दिया और रुपयों की मांग करने लगे।

मातौर गांव में रहने वाले फाइनेंस कंपनी के एजेंट दिनेश कुमार 11 सितंबर 2025 की रात ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। भाई ने आरोप लगाया था उस पर लगातार लोगों के रुपए लौटाने का दबाव आ रहा था।
एजेंट की मौत के बाद संचालक फरार
इसी दौरान 11 सितंबर 2025 की रात गांव के रहने वाले दिनेश कुमार की मौत हो गई, जो फाइनेंस कंपनी का एजेंट था। खैरथल रेलवे अंडरपास के पास दिनेश का शव मिला। घटना के बाद फाइनेंस कंपनी संचालक दाताराम चौधरी गांव छोड़कर फरार हो गया। दिनेश के भाई अमित ने आरोप लगाया- करोड़ों की राशि डूबने के डर से एजेंट पर दबाव बढ़ा, जिसके चलते उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी। ठगी के आरोपी मामा दाताराम चौधरी और भांजा नरेंद्र चौधरी समेत पांच लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया गया।

लेनदेन की पासबुक के ऊपर साखा में मातौर लिखा गया, जबकि दूसरी जगह हैड ऑफिस का पता मातौर लिखा गया।
पंचायत में कहा- चार दिन में रुपए लौटा दूंगा, फिर गायब
19 सितंबर को फाइनेंस कंपनी के वाड़े को लेकर लोगों की पंचायत हुई। मातौर गांव की सरपंच के देवर महेंद्र ने दाताराम चौधरी से संपर्क कर गांव में बुलाया।
महेंद्र ने बताया- दाताराम को विश्वास दिलाया गया कि गांव में उसके साथ कुछ नहीं किया जाएगा। लोगों के जमा रुपयों को लेकर वह गांव आकर बात करे। पंचायत में दाताराम चौधरी ने लोगों को विश्वास दिलाया कि सभी निवेशकों के रुपए नरेश चौधरी (भांजा) से दिलवा देगा। सारे रुपए नरेश के पास ही हैं। रुपए लौटाने के लिए चार दिन का समय मांगा और लोगों से रसीद व बॉन्ड जमा कराने को कहा। इसके बाद दाताराम परिवार के साथ गायब हो गया।

23 सितंबर को रुपए नहीं लौटाने पर गुस्साएं लोगों ने मातौर गांव में दाताराम के घर में घुसकर तोड़फोड़ की और तीन बाइक में आग लगा दी।
गुस्साए लोगों ने घर में घुसकर की तोड़फोड़, तीन बाइक फूंकी
वादे के मुताबिक चार दिन बाद 23 सितंबर को दाताराम चौधरी लोगों को नहीं मिला। रात में दाताराम के घर से भैंसें पिकअप में लोड कर ले जाने की सूचना पर लोगों का गुस्सा भड़क गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण दाताराम के घर घुस गए और तोड़फोड़ करना शुरू कर दिया। इस दौरान वहां खड़ी तीन बाइक को आग के हवाले कर दिया। दाताराम के घर में कोई नहीं था, लेकिन पास में उसके भाई उमराव चौधरी के परिवार की जान सांसत में आ गई। सूचना मिलने पर खैरथल पुलिस मौके पर पहुंची।

ASP रतन लाल भार्गव ने बताया-
ग्रामीण निवेशकों का आरोप है कि फाइनेंस कंपनी मालिक और उसके एजेंट करोड़ों रुपए लेकर फरार हो गए हैं। गुस्से में भीड़ ने दाताराम चौधरी के घर पर हमला किया। घटना की सूचना बुधवार रात (23 सितंबर) करीब 10 बजे मिली थी।
मौके पर पहुंचते ही लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया। घबराए पुलिसकर्मी वापस लौट गए। अतिरिक्त जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचकर हालात पर नियंत्रण पाया। गांव के पांच लोगों को शांतिभंग के आरोप में हिरासत में लिया गया। दाताराम का परिवार घर पर नहीं था, वहीं उसके भाई उमराव चौधरी के परिवार को सुरक्षित निकाला गया।

आरोप है मामा दाताराम और उसका भांजा नरेंद्र चौधरी लोगों के करोड़ों रुपए लेकर फरार हो गए।
अब पढ़िए लोगों का दर्द और चिंता…
दिव्यांग सीमा ने बताया- सिलाई मशीन चलाकर एक-एक रुपया जोड़ा और विकलांगता की पेंशन से अपनी बेटियों की शादी के लिए पौने दो लाख रुपए दाताराम को जमा करवाए थे। जब उन्होंने पैसे मांगे तो दाताराम ने उन्हें नहीं दिए। बल्कि कहा कि आपके पैसों की जिम्मेदारी मेरी है। लेकिन अब दाताराम गांव छोड़कर भाग गया है।
बुजुर्ग प्रेमवती ने बताया- दाताराम के जरिए 3 लाख रुपए जमा करवाए। इसके अलावा 3 लाख रुपए उनके बड़े बेटे ने, साथ ही 1 लाख 50 हजार उनकी छोटी बहू और 1 लाख 50 हजार उनके पोते ने जमा करवाए। इन सभी के कुल 9 लाख रुपए दाताराम के जरिए फाइनेंस कंपनी में 18 महीने की FD करवा कर जमा किए गए। दाताराम ने FD करने वाले लोगों को आश्वासन दिया था कि जब FD पूरी हो जाएगी तो अपने पैसे वापस ले लेना। बुढ़ापे में गुजर-बसर करने के लिए उन्होंने FD के जरिए पैसे दाताराम को दिए थे।
बिजली बोर्ड से रिटायर्ड कर्मचारी शंभूदयाल ने बताया- दाताराम के जरिए अपना और पत्नी का खाता खुलवाया। उन्होंने 6 लाख 20 हजार रुपए जमा करवाए, जिसमें 2 लाख 15 हजार उनके खुद के थे, बाकी पत्नी के पैसे थे। गांव के लोगों ने दाताराम पर विश्वास कर करोड़ों रुपए जमा करवाए, लेकिन दाताराम करीब 25 करोड़ रुपए लेकर भाग गया। उन्होंने बताया कि वह अपनी पेंशन से हर महीने 10,000 रुपए दाताराम को जमा करवाते थे।
हुक्म कौर ने बताया कि 3 लाख उनके खुद के, 5 लाख उनके लड़के के और 2 लाख उनकी लड़की के दाताराम को जमा करवाए गए थे। दाताराम ने ब्याज देने का लालच देकर लोगों से पैसे जमा करवाए और शुरू में कुछ समय तक ब्याज भी दिया, लेकिन बाद में ब्याज देना बंद कर दिया। मजदूरी कर बड़ी मेहनत से यह पैसे जमा करवाए थे, लेकिन अब दाताराम के भाग जाने से लोगों में भारी आक्रोश है।
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