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श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल । इनकी बीएड की डिग्री फर्जी होने से इनका नियुक्ति आदेश जिला परिषद ने रद्द कर दिया है
श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका ने SOG की रिपोर्ट पर सेवा से हटा दिया है। उसके 32 साल पहले 1993 के नियुक्ति आदेश ही रद्द कर दिए हैं।
फर्जी डिग्री वाला टीचर श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल बिलासपुर के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय देवपुरा खजा में वरिष्ठ अध्यापक के पद पर कार्यरत था। इसी माह के अंत में रिटायरमेंट होने वाला था। इससे पहले उसकी नौकरी गई और अब कानूनी कार्रवाई भी होगी।
यह उत्तरप्रदेश के लखनऊ विश्वविद्यालय की फर्जी बीएड की डिग्री से 7 जून 1993 को मंडालिया की स्कूल में ज्वाइन किया था।
SOG जांच में खुला था मामला
अज्ञात व्यक्ति ने श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल पुत्र रामदेव कलाल की भी फर्जी डिग्री से नौकरी लगने की शिकायत की। फिर यह टीचर SOG की रडार पर आ गया। SOG की जांच में टोंक जिले का फर्जी टीचर श्रीकृष्ण चन्द्र जैकवाल की भी पोल खुल गई। SOG ने इसकी पूरी हिस्ट्री जिला परिषद को भेजी। इसमें यह फर्जी बीएड की डिग्री से नौकरी लगना पाया गया। इस पर कार्रवाई करते हुए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानका ने इसकी नियुक्ति आदेश ही रद्द कर फर्जी डिग्री से सरकारी नौकरी लगने वालों के खिलाफ बड़ा संदेश दिया है।
बीएड की फर्जी डिग्री लगाई थी
करीब एक महीने पहले उसके खिलाफ एसओजी में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उसने नियुक्ति के समय लखनऊ विश्वविद्यालय से जारी बीएड की फर्जी डिग्री लगाई थी। एसओजी ने विश्वविद्यालय से इसकी पुष्टि मांगी। 10 सितंबर को विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने स्पष्ट कर दिया कि श्रीकृष्ण की अंकतालिका और डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय ने जारी नहीं की गई है।
आरोपी ने बीमारी का बहाना बनाकर बेटे को भेजा: जिला परिषद ने आरोपी शिक्षक को 18 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को कहा लेकिन आरोपी ने बीमारी का हवाला देते हुए खुद पेश नहीं होकर अपने बेटे को भेजा। बेटे ने बीएड अंकतालिका और डिग्री का प्रमाण पत्र साथ ही 1994 में विश्वविद्यालय के नाम की एक सत्यापन रिपोर्ट भी प्रस्तुत की थी, जो फर्जी थी।
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