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मुकनाराम भील का सम्मान करते हुए एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई।
आत्मसंकल्प से व्यक्ति अपने जीवन में रचनात्मक परिवर्तन ला सकता है। सीमांत उपखंड क्षेत्र सेड़वा की भील बस्ती के निवासी मुकनाराम भील ने यह कर दिखाया है। मुकनाराम ने बताया कि युवावस्था में गलत संगत में पड़ने से वह नशे की गिरफ्त में आ गए थे। उसी दौरान गां
65 वर्षीय मुकनाराम 10वीं पास हैं और वर्ष 2022 से प्रतिदिन 5–6 घंटे राम नाम लिखते हैं। अब तक वे 70 लाख बार राम नाम लिख चुके हैं। उनका लक्ष्य एक करोड़ राम नाम लिखने का है। लक्ष्य पूरा होने पर वे इसे वाराणसी स्थित रामनाम कोष में जमा करवाएंगे। मुकनाराम का कहना है कि भगवान श्रीराम के चरित्र से उन्हें प्रेरणा मिली, जिसके बल पर उन्होंने गलत संगत, बुरी आदतें और नशे को सदा के लिए त्याग दिया।
आज मुकनाराम भील समाज में पेड़-पौधों के संरक्षण और नशा मुक्ति के लिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। ग्रामीणों के आग्रह पर उपखंड अधिकारी बद्रीनारायण विश्नोई ने शनिवार को मुकनाराम को श्रीफल और कल्याण पत्रिका की प्रति भेंट कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर एसडीओ विश्नोई ने ग्रामीणों से चर्चा के दौरान कहा कि संत वाणियां और अच्छा साहित्य समाज को हमेशा सही दिशा देता है। मनुष्य आत्मसंकल्प से अपने जीवन में सुधार कर सकता है।
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