नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्मार्ट मीटर के टेंडर को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। जूली ने प्रदेश में स्मार्ट मीटर योजना को बंद करने और स्मार्ट मीटर टेंडर की जांच करने की मांग उठाई है। जूली ने लिखित बयान जारी कर कहा कि भाजपा को चंदे के तौर पर दिए
जूली ने कहा-

कंपनी के ब्लैक लिस्टेड होने के मात्र 23 दिन बाद ही टेण्डर जारी करने से यह साबित होता है कि कितना बड़ा घोटाला है। यह आश्चर्य की बात है कि करीब डेढ करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर लगाने के लिये प्रदेश के तीनों बड़े डिस्कॉम जयपुर, अजमेर और जोधपुर ने एक ही कम्पनी को टेंडर दे दिया।

5 अगस्त, 2024 को गोवा सरकार के उर्जा विभाग के चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर स्टीफन फर्नांडिस के हस्ताक्षर से मैसर्स जीनस पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. और एचपीएल इलेक्ट्रिक एण्ड पावर लि. को ब्लैक लिस्ट करने का आदेश जारी किया गया था। इसके ठीक 23 दिन बाद ही अजमेर डिस्कॉम ने 1269 करोड़ 56 लाख, जयपुर डिस्कॉम ने 3121.42 करोड़ और इसी तरह जोधपुर डिस्कॉम ने भी हजारों करोड़ के टेंडर जारी कर दिए।
जूली ने कहा- बिजली कंपनियों ने केंद्र के इशारे पर भाजपा की लाभप्रदाता कंपनी की मदद के लिए नियमों को भी ताक पर रख दिया। राजस्थान सरकार के टेंडर नियमों में साफ लिखा है कि ब्लैक लिस्टेड फर्म को टेंडर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा, इसके बावजूद ब्लैक लिस्टेड कम्पनी को टेंडर जारी किये जाने से यह साबित होता है कि बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।
पुराने मीटर काम कर रहे तो जनता पर स्मार्ट मीटर जबरन क्यों थोंपे जा रहे?
जूली ने स्मार्ट मीटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पुराने बिजली के मीटर अच्छी तरह काम कर रहे हैं, तो स्मार्ट मीटर क्यों थोपे जा रहे हैं? प्रदेश के बिजली उपभोक्ता स्मार्ट मीटरों के कारण बिजली के बिलों 10 से 30 प्रतिशत तक बढोत्तरी होने की शिकायत कर रहे हैं। भाजपा ने घाटे में चल रही कंपनियों के जिम्मे 14 हजार 37 करोड़ की स्मार्ट मीटर योजना लाद दी है। प्रदेश की जनता में जबरन स्मार्ट मीटर लगाये जाने को लेकर जबर्दस्त आक्रोश है और प्रदेश के कई जिलों में तो मारपीट तक की नौबत आ रही है। कांग्रेस जनहित पर पार्टी हित को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और सरकार की दमनकारी नीति और भ्रष्टाचार का कड़ा विरोध करेगी।
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