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जोधपुर में इस साल की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को जोधपुर महानगर न्यायक्षेत्र में किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जोधपुर महानगर के सचिव राकेश रामावत ने बताया कि चिह्नित प्रकरणों के निस्तारण के लिए कुल 8 बेंचों का गठन किया गया है। इनमें से 6 बैंच लंबित प्रकरणों की सुनवाई के लिए गठित की गई हैं।
गठित बेंचों का विवरण
•श्रम एवं औद्योगिक न्यायालय से संबंधित प्रकरण – 1 बैंच का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता देवेन्द्र सिंह नागर, पीठासीन अधिकारी श्रम व औद्योगिक न्यायालय, जोधपुर करेंगे। •पारिवारिक एवं वाणिज्यिक न्यायालय से संबंधित प्रकरण -1 बैंच गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता श्री सतीश चन्द्र गोदारा, पीठासीन अधिकारी पारिवारिक न्यायालय संख्या 1, जोधपुर महानगर करेंगे। •राजस्व न्यायालय प्रकरण -1 बैंच गठित की गई है, जिसमें सिद्धेश्वर पुरी (सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश संवर्ग) न्यायिक अधिकारी सदस्य तथा जवाहर चौधरी (एडीएम प्रथम, जोधपुर) राजस्व अधिकारी सदस्य होंगे। •स्थायी लोक अदालत, उपभोक्ता मंच व प्रि-लिटिगेशन प्रकरण -1 बैंच गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश रामावत करेंगे।
निस्तारित होने वाले प्रकरण राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य प्रकरणों का निस्तारण किया जाएगा। इनमें ये प्रकरण शामिल होंगे • फौजदारी प्रकरण • धारा 138 परक्राम्य विलेख अधिनियम के प्रकरण • धन वसूली, एमएसीटी, श्रम एवं नियोजन विवाद, कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम से जुड़े प्रकरण • बिजली, पानी एवं अन्य बिल भुगतान संबंधी प्रकरण (अशमनीय मामलों को छोड़कर) • पारिवारिक विवाद (तलाक को छोड़कर) • भूमि अधिग्रहण, राजस्व संबंधी मामले, पैमाइश एवं डिवीजन ऑफ होल्डिंग • वाणिज्यिक विवाद, बैंक विवाद, सहकारिता विवाद • परिवहन, स्थानीय निकाय, रियल एस्टेट, रेलवे क्लेम्स व कर संबंधी विवाद • उपभोक्ता एवं सेवा प्रदाता विवाद • सिविल प्रकरण (किरायेदारी, बंटवारा, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा, क्षतिपूर्ति, विनिर्दिष्ट पालन दावे) • अन्य राजीनामा योग्य प्रकरण जो अधिकरणों/आयोगों/मंचों/प्राधिकारियों के समक्ष लंबित हों—शामिल होंगे।
आमजन से अपील जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) जोधपुर महानगर के सचिव ने सभी नागरिकों से अपील की है कि जिनके भी प्रकरण इन विषयों से संबंधित हैं। वे शनिवार को प्रातः 10 बजे से सांय 4 बजे तक राष्ट्रीय लोक अदालत में उपस्थित होकर आपसी समझाइश व लोक अदालत की भावना से अपने विवादों का निस्तारण करवा सकते हैं। इससे न केवल समय और खर्च की बचत होगी, बल्कि न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा।
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