गुजरात का वडनगर अपनी सैकड़ों साल पुरानी धरोहर और नए डेवलेपमेंट के साथ देश-दुनिया में नई पहचान बना रहा है। यह वही शहर है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचपन में चाय बेचते थे। स्कूली शिक्षा हासिल की। आज यही शहर बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। पुराने मोह
स्कूल को मॉडल और योग स्कूल का रूप दिया गया है। रेलवे स्टेशन को आधुनिक रूप मिल रहा है। पांच किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस कस्बे की आबादी करीब 35 हजार है, लेकिन विकास कार्य इसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
वडनगर बनेगा टूरिस्ट स्पॉट
वडनगर को अंतरराष्ट्रीय स्तर से जोड़ने के लिए 200 करोड़ रुपए की लागत से विश्वस्तरीय हेरिटेज म्यूजियम बनाया जा रहा है। यह ग्रीस के एथेंस की तर्ज पर जमीन के अंदर तैयार होगा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा अंडरग्राउंड म्यूजियम होगा। आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट्स की निगरानी में बनने वाले इस म्यूजियम में प्रोजेक्टर से वडनगर के गौरवशाली इतिहास पर आधारित फिल्म दिखाई जाएगी। यहां नरेंद्र मोदी के वडनगर स्टेशन पर चाय बेचते हुए भी दृश्य शामिल किए गए हैं। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य सिर्फ इतिहास को संजोना ही नहीं, बल्कि इसे पर्यटन का केंद्र बनाना भी है।

पीएम मोदी का स्कूल, जिसे मॉडल स्कूल के तौर पर तैयार किया गया है।
मॉडल स्कूल और योग सेंटर
नरेंद्र मोदी के स्कूल को मॉडल स्कूल और योग सेंटर के रूप में तैयार किया गया है। यहां इंटरनेशनल लेवल की सुविधाएं विकसित की गई हैं। ‘प्रेरणा’ नाम से इस स्कूल में देशभर से सिलेक्टेड बच्चों को सात दिन के प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है। उन्हें योग की शिक्षा देने के साथ वडनगर के इतिहास से जोड़ने के लिए नगर भ्रमण भी कराया जाता है।

यह वही तालाब है, जिसके बारे में किस्सा मशहूर है कि मोदी बचपन में यहां से मगरमच्छ का बच्चा पकड़कर घर ले आए थे
उदयपुर की तर्ज पर तैयार हो रहा शर्मिष्ठा तालाब
वडनगर में प्राचीन बौद्ध साइट्स पर भी हेरिटेज म्यूजियम तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर के बौद्धिज्म से जुड़े पहलुओं को दिखाया जा सके। शहर के ऐतिहासिक शर्मिष्ठा तालाब का पुनर्विकास उदयपुर मॉडल पर किया गया है। यह वही तालाब है, जिसके बारे में किस्सा मशहूर है कि मोदी बचपन में यहां से मगरमच्छ का बच्चा पकड़कर घर ले आए थे। इसके अलावा शहर का प्राचीन हाटकेश्वर महादेव मंदिर आज भी अपनी स्थापत्य कला और शिवलिंग के साथ बने गुंबदों की कलाकृतियों के लिए प्रसिद्ध है।
वडनगर का कीर्ति तोरण, सोलंकी राजाओं की विजयगाथा
मेहसाणा जिले के वडनगर में स्थित कीर्ति तोरण 12वीं शताब्दी की अनुपम धरोहर है। राजस्थान से लाए गए पत्थरों से निर्मित करीब 40 फीट ऊंचे इन तोरणों में धातु का प्रयोग नहीं किया गया है। यह गुजरात की मारू-गुर्जर शैली की भव्यता और जटिल नक्काशी का अद्भुत उदाहरण हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने इसे संरक्षित स्मारक का दर्जा दिया है।

वडनगर में स्थित कीर्ति तोरण शहर के सैकडों साल पुराने इतिहास का गवाह है।
इतिहासकारों और स्थानीय गाइडों के अनुसार, कीर्ति तोरण सोलंकी राजाओं की विजयों का प्रतीक माने जाते हैं। माना जाता है कि यह कभी किसी विशाल मंदिर परिसर का हिस्सा रहे होंगे, हालांकि इसके अवशेष अब नहीं मिलते। फिर भी ये तोरण अपने आप में उस काल की संस्कृति, शौर्य और स्थापत्य कला की गवाही देते हैं।
कीर्ति तोरण की नक्काशी में ज्यामितीय आकृतियां और भारतीय कला की बारीकियां झलकती हैं। यह सिर्फ स्थापत्य कौशल का नमूना नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सौंदर्य दृष्टि का भी प्रतीक है। आज भी यह स्मारक इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। गुजरात सरकार ने इसे राज्य का आधिकारिक प्रतीक घोषित किया है और इसके संरक्षण के लिए लगातार कार्य चल रहे हैं।
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