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अब बच्चे बजाएंगे हारमोनियम, ढोलक और गिटार
झुंझुनूं जिले के 21 पीएमश्री स्कूलों में अब पढ़ाई के साथ-साथ संगीत शिक्षा को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय, लोक और आधुनिक संगीत की विधाओं से परिचित कराया जाएगा। अब बच्चे हारमोनियम, ढोलक, गिट
संगीत शिक्षा के लिए बजट और व्यवस्था
परिषद ने प्रत्येक पीएमश्री स्कूल को संगीत से संबंधित गतिविधियों के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता आवंटित की है।वाद्ययंत्रों की खरीद और रख-रखाव के लिए प्रत्येक स्कूल को 50 हजार रुपए का बजट दिया गया है।प्रशिक्षकों की व्यवस्था के लिए प्रत्येक स्कूल को एक लाख रुपए तक की राशि आवंटित की गई है।
वाद्ययंत्रों की अनिवार्यता
योजना के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि हर स्कूल में कम से कम छह प्रकार के वाद्ययंत्र और एक लोक वाद्ययंत्र अवश्य उपलब्ध हो, जिससे विद्यार्थियों को संगीत की विविध विधाओं का अनुभव मिल सके।
प्रशिक्षकों की व्यवस्था
जिन स्कूलों में नियमित संगीत शिक्षक का पद रिक्त है, वहां अस्थायी प्रशिक्षक बुलाए जाएंगे। इन प्रशिक्षकों को प्रति कालांश 400 रुपए का मानदेय दिया जाएगा। विद्यालय स्तर पर गठित एक क्रय समिति पूरी पारदर्शिता के साथ वाद्ययंत्र खरीदेगी और उनका भौतिक सत्यापन तथा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
नियमित कक्षाएं लगेगी
सप्ताह में चार दिन कक्षाएं: प्रत्येक पीएमश्री स्कूल में सप्ताह में कम से कम चार दिन संगीत की कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इन कक्षाओं में विद्यार्थियों को गायन, वादन, ताल, लय और रागों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मासिक मंच प्रदर्शन: सीखी गई गतिविधियों का प्रदर्शन हर महीने के अंतिम शनिवार को स्कूल मंच पर कराया जाएगा। इसके अलावा, सालाना सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आयोजित होगी।
अनिवार्य रिकॉर्ड और मूल्यांकन
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिए हैं कि विद्यार्थियों द्वारा सीखे गए वाद्ययंत्रों और विधाओं का सॉफ्ट कॉपी में रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। इससे विभागीय स्तर पर स्कूलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना आसान होगा।
प्रार्थना सभा में बदलाव
अब स्कूलों की प्रार्थना सभा केवल प्रार्थना तक सीमित नहीं रहेगी। उसमें भी संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल किया जाएगा। हर दिन अलग-अलग कार्यक्रम होंगे।
मॉडल बनेंगे पीएमश्री स्कूल
राज्य सरकार इन 21 पीएमश्री स्कूलों को एक मॉडल के रूप में विकसित कर रही है। यहां शुरू की गई गतिविधियों को बाद में जिले के अन्य विद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। विभाग का मानना है कि संगीत, कला और खेल जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों की मानसिक और शारीरिक क्षमता को संतुलित करती हैं।जिला शिक्षा अधिकारी राजेश मील ने बताया कि संगीत शिक्षा को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों दोनों में काफी उत्साह है। यह पहल बच्चों की प्रतिभा को निखारने, आत्मविश्वास बढ़ाने और सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजना का पूरा लाभ विद्यार्थियों तक पहुँचे।
शहीद कर्नल जेपी जानू राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल राजेंद्र कुमार दड़िया ने कहा कि संगीत शिक्षा से बच्चों को भारतीय संगीत की विविध शैलियों का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी आत्म अभिव्यक्ति में निखार आएगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
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