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उदयपुर| शहर में भविष्य की पेयजल सप्लाई में अहम भूमिका निभाने वाले देवास तृतीय-चतुर्थ बांधों के निर्माण की राह अब खुलती नजर आ रही है। इस परियोजना के बदले टाइगर रिजर्व क्षेत्र या वन्यजीव अभयारण्य के नजदीक जमीन मांग रहे वन विभाग के लिए जमीन ढूंढ़ ली गई ह
दरअसल, 1691 करोड़ लागत की यह परियोजना वन विभाग की 174.1106 हैक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित है। उदयपुर जिले में वन्यजीव अभयारण्य के पास इतनी गैर वन भूमि उपलब्ध नहीं है। सरकार के निर्देश पर कलेक्टर नमित मेहता ने अलवर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला को पत्र भेजा। इसमें कहा था कि यह योजना सीएम भजनलाल की प्राथमिकता में है। इसके लिए टाइगर रिजर्व क्षेत्र-वन्यजीव अभयारण्य से सटी 174.1106 हैक्टेयर गैर वन भूमि वन विभाग को देनी है। उदयपुर में तो यह उपलब्ध नहीं है, लेकिन सरिस्का टाइगर रिजर्व से लगे कालेड़, प्रतापगढ़ के वनखंड में है। इस पर अलवर कलेक्टर ने सर्वे कराकर भूमि देने के लिए कागजी कार्यवाही पूरी करवा दी।
बता दें कि वन विभाग ने इस साल 9 मार्च को उदयपुर जिले में कहीं भी जमीन के बदले उतनी ही गैर वन भूमि की मांग की थी। कलेक्टर ने भूमि देने के आदेश जारी किए थे। उस समय 19 जून को वन विभाग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए नई मांग रखी कि उसे टाइगर रिजर्व क्षेत्र-वन्यजीव अभयारण्य के नजदीक भूमि दी जाए।
2031 तक चाहिए होगा 2397 एमसीएफटी पानी, अभी 1738 ही मौजूद
जन स्वास्थ्य अभियान्त्रिकी विभाग के अनुसार वर्ष 2031 तक उदयपुर शहर की जनसंख्या 8 हजार 75 हजार 874 तक पहुंचने की संभावना है। इस आबादी के लिए करीब 2397 एमसीएफटी पानी हर साल चाहिए होगा। इसकी तुलना में अभी 1738 एमसीएफटी पेयजल ही उपलब्ध है। जनसंख्या वृद्धि की गणना के अनुसार यह मांग वर्ष 2036 तक 2613 एमसीएफटी तक पहुंच जाएगी। इसी मांग की पूर्ति के लिए देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना तैयार की गई है। इससे उदयपुर शहर को प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। अभी फतहसागर, पिछोला झील के खाली होने पर आकोदड़ा, मादड़ी, अलसीगढ़ बांध से पानी लाते हैं।
टाइगर रिजर्व या किसी अभयारण्य के पास भूमि की मांग को लेकर अटका रखी थी एनओसी
अलवर कलेक्टर अर्तिका ने रिपोर्ट बनाकर राजस्व ग्र्रुप-3 विभाग के शासन उपचिव को प्रस्ताव भिजवा दिया है। इसमें लिखा है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व से लगे कालेड़, प्रतापगढ़ वनखंड में खसरा 955 रकबा 340.32 हैक्टेयर पहाड़ की भूमि उपलब्ध है। इसमें से 174.1106 हैक्टेयर भूमि वनीकरण के लिए आरक्षित की जा सकती है। अब प्रदेश सरकार की मुहर लगाते ही ये गैर वन भूमि वन विभाग दे दी जाएगी। इसके बाद वन विभाग एनओसी देगा। एनओसी मिलने के बाद जल संसाधन विभाग निर्माण कार्य शुरू करा सकेगा। जल संसाधन विभाग देवास तृतीय-चतुर्थ बांधों और सुरंग (टनल) निर्माण के लिए काम करने वाली कंपनियों को गत 7 अक्टूबर 2023 को ही वर्क आर्डर जारी कर चुका है। एनओसी मिलने के बाद सभी निर्माण एजेंसी काम शुरू कर देंगी।
पिछोला-फतहसागर हमेशा भरी रहेंगी
देवास तृतीय एवं चतुर्थ परियोजना की अनुमानित लागत 1690.55 करोड़ है। तृतीय की भराव क्षमता 390 एमसीएफटी और चतुर्थ की 703 एमसीएफटी होगी। चतुर्थ बांध से 4.34 किमी की टनल बनाकर ग्रेविटी से पानी को तृतीय बांध में ले जाया जाएगा। 10.50 लंबी सुरंग से देवास द्वितीय (आकोदडा बांध) में ले जाएंगे। फिर आकोदड़ा बांध और सुरंग के जरिये पिछोला झील में लाएंगे। यहां से फतह सागर झील को भी पानी दिया जाएगा। इससे पिछोला-फतह सागर झील सालभर भरी रहेंगी।
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