जैसलमेर के जवाहिर हॉस्पिटल में मृतक अरबाज की मां बेसुध हैं।
यह दर्द है जैसलमेर के पूनमनगर गांव में सरकारी स्कूल का गेट गिरने से जान गंवाने वाले मासूम अरबाज (7) के मामा जमशेर खान का। हादसे के बाद से ही जमशेर की बहन और अरबाज की मां खेतु बेसुध है।
उनका 2 दिन से हॉस्पिटल में इलाज जारी है। हालत ऐसी है कि वे अरबाज के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सकीं। मां को जब भी होश आता है, सिर्फ एक ही नाम पुकारती है, “म्हारो छोरो… अरबाज…” और फिर फफक कर रो पड़ती है, बेसुध हो जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि महिला गहरे मानसिक आघात और डिप्रेशन में है।
सोमवार (28 जुलाई) दोपहर 1 बजे अरबाज अपनी बहन के साथ घर जाने के लिए उसके स्कूल के बाहर पहुंचा। अचानक स्कूल का भारी-भरकम लोहे का गेट और उसका पत्थर का पिलर गिर पड़ा। जिसके नीचे आने से अरबाज की मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हादसे में एक और बच्ची व टीचर घायल हुए थे।

हादसे के बाद से ही अरबाज की मां खेतु बेसुध है। होश में आने पर वह अपने बेटे का नाम पुकार रही हैं।
भाई बोला- बहन की हालत ने हमें झकझोर दिया
खेतु के भाई जमशेर खान कहते हैं- गेट साल भर से टूटा पड़ा था, किसी ने सुध नहीं ली। अब जब एक मासूम की जान चली गई, तो सबकी नींद खुली है। क्या इसी दिन का इंतजार था?
3 साल पहले कोरोना के कारण खेतु के पति तालब खान का निधन हो गया था। तब से खेतु ने अपने बच्चों के लिए खुद को संभाला। मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई और परवरिश करती रही।
लेकिन अरबाज की मौत के बाद खेतु की चीख हम सभी को झकझोर रही है। पीहर और ससुराल वाले दोनों तरफ से लोग आकर उसे संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं है।
अरबाज के मामा गुलशेर ने कहा- खेतु ने अरबाज के लिए सब कुछ किया था। पति की मौत के बाद जैसे-तैसे मेहनत-मजदूरी करके बेटे को स्कूल भेजा। वो कहती थी- ‘म्हारो छोरो बड़ा होके अफसर बनेगो।’ आज वही छोरा चला गया।

तस्वीर में मां खेतु के साथ अरबाज (7), जिसकी हादसे में मौत हो गई।
नानी बोली- पहले जमाई खोया, अब नाती
अरबाज की नानी ने कहा- पहले जमाई खोया और अब नाती। अपनी ही बेटी का घर उजड़ते देख रही हूं। महिलाओं ने उन्हें संभाला और घर में ले गईं। घर के बाहर मातम छाया हुआ है।
तालब खान के चाचा ईशा खान का कहना है कि ये बहुत ही गरीब परिवार है। पहले पिता की मौत हुई, तब भी कोई मुआवजा नहीं मिला। अब प्रशासन की लापरवाही से बेटे की मौत हुई है। फिर भी मुआवजा नहीं मिला। केवल आश्वासन दिया जा रहा है।

जवाहिर हॉस्पिटल में खेतु के 2 भाई और देवर (ब्लू शर्ट में) लगातार उसे संभाल रहे हैं।
परिवार गरीब, गांव वालों ने चंदा करके मदद की थी
चाचा सादिक खान ने बताया- तालब खान एक लोक कलाकार थे। उनके चार बच्चे थे। तालब खान की मौत कोरोना काल में हुई थी। अभी तक कोरोना में मौत का मुआवजा नहीं मिला। गांव वालों ने चंदा करके कुछ रकम दी, जिससे परिवार का गुजारा चलने लगा।
परिवार में अरबाज खान, रईस खान (9) और 2 बहनें थीं। बड़ी बहन मधु पूनम नगर की उच्च माध्यमिक बालिका स्कूल में छोटी बहन राजू के साथ ही पढ़ती है।

तस्वीर सोमवार की है। सरकारी स्कूल के इसी गेट के नीचे दबने से अरबाज की मौत हो गई थी।
विधायक बोले- जो भी आरोपी होगा कार्रवाई की जाएगी
मामले को लेकर जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी ने कहा- मैंने प्रशासन से आग्रह किया है कि हादसा जिस वजह से हुआ और जो इसमें आरोपी हैं उन पर कार्रवाई की जाए। गेट को ठीक करा लेना चाहिए था। मामले में ग्राम विकास अधिकारी को सस्पेंड किया गया है।
रविंद्र भाटी ने कहा- यह हत्या है
शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अरबाज की मौत को सिस्टम की ओर से की गई हत्या बताया है। भाटी ने वीडियो जारी कर कहा- शिक्षा मंत्री जी, अभी कुछ दिन पहले झालावाड़ में स्कूल की छत गिरने से मासूम बच्चों की मौत हुई।
उनकी सिस्टम ने हत्या की और अभी उनकी चिता की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि आज जैसलमेर में एक मासूम की इसी सिस्टम ने हत्या कर दी। एक शिक्षक के दोनों पैर चले गए।
यह बालक जिसकी मौत हुई है, वो हमारे बच्चे हैं, उन्हें न्याय मिलना चाहिए। अगर इस बच्चे को न्याय नहीं मिला तो, मैं यह लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लडूंगा।
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अरबाज (7) और मधु (9) को लेने हमेशा उसके चाचा जाते थे। 28 जुलाई को किसी काम की वजह से नहीं जा पाए। अरबाज अपने स्कूल से निकलकर बहन मधु के स्कूल पहुंच गया। गेट पर वह इंतजार कर रहा था। बहन आती, उससे पहले मौत आ गई। पूरी खबर पढ़िए
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