पहाड़ियों के बीच स्थित उदयपुर के उबेश्वरजी में वन विभाग की ओर से तीन स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण किया गया।
उदयपुर जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक स्थल उबेश्वरजी में वन विभाग की ओर से निर्मित जल संरचनाओं और शिव वन उद्यान का लोकार्पण मंगलवार शाम पांच बजे किया गया। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया, वन एवं पर्याव

उदयपुर के उबेश्वरजी में पौधारोपण करते वन मंत्री संजय शर्मा
अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित उबेश्वरजी में शिव मंदिर के समीप प्राकृतिक पोखर से बहने वाले झरने को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए वन विभाग की ओर से तीन स्तर पर जल संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। साथ ही शिव वन उद्यान भी विकसित किया गया है।
समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि भगवान उबेश्वर महादेव की कृपा से इस क्षेत्र में विकास के कार्य संभव हो पा रहे हैं। संत अवधेशानंद महाराज के चातुर्मास के पश्चात इस क्षेत्र में तेजी से विकास हुआ और पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र बना। उबेश्वर महादेव के ऊपर पहाड़ी पर वैष्णो देवी माता मंदिर की स्थापना के पश्चात सारा परिदृश्य ही बदल गया।
कटारिया ने कहा कि वन एवं इको टूरिज्म की दृष्टि से उदयपुर के विकास में विभाग के अधिकारियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। उदयपुर की झीलें यहां के पर्यटन की जान हैं इन्हें वर्ष पर्यंत भरा रखने के लिए देवास योजना को पूरा करने के प्रयास किए जिनमें सफलता मिली।
उबेश्वर महादेव का यह झरना आने वाले दिनों में बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र बनेगा। यह उदयपुर जिले में प्राकृतिक पर्यटन की नई पहचान बनेगा। उन्होंने कहा कि उदयपुर में इको टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं नए स्थल चिन्हित कर उन्हें विकसित किया जाना चाहिए।
वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि उदयपुर का स्थान अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर पर्यटन की दृष्टि से पहले ही अग्रणी है। शहर के आसपास इस तरह के पर्यटन स्थलों के विकास से पर्यटकों को अतिरिक्त विकल्प प्राप्त होंगे। इको टूरिज्म के रूप में विकसित होने वाले यह स्थल पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं।
जनजाति क्षेत्र विकास विभाग मंत्री बूलाल खराड़ी ने कहा कि महाराणा प्रताप के समकालीन कई ऐसे स्थल है जो पर्यटक की दृष्टि से आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं, उन्हें चिन्हित कर विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
प्रारंभ में सभी ने पौधारोपण किया। वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) सेडू राम यादव, मुख्य वन संरक्षक जोधपुर आरके जैन, मुख्य वन संरक्षक उदयपुर सुनील छिद्री, उप वन संरक्षक मुकेश सैनी व अजय चित्तौड़ा, यादवेंद्रसिंह आदि ने अतिथियों का स्वागत किया। विभागीय अधिकारियों ने अवगत कराया कि क्षेत्र में 650 हेक्टेयर रिजर्व फॉरेस्ट है। इसमें से 10 हेक्टेयर को विकसित किया गया है।
इस दौरान उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, एयरफोर्स के विंग कमाण्डर वीवी मेहर, युआईटी पूर्व अध्यक्ष रविन्द्र श्रीमाली, बड़गांव प्रधान प्रतिभा नागदा, जिला परिषद सदस्य पुष्पा शर्मा आदि भी उपस्थित रहे।

वन मंत्री संजय शर्मा दोपहर में उदयपुर जिला परिषद सभागार में समीक्षा बैठक लेते
सफारी की फेसिंग गिरने की जांच नहीं होने पर नाराज हुए मंत्री इससे पहले दोपहर में वन राज्यमंत्री संजय शर्मा ने जिला परिषद सभागार में विभागीय योजनाओं की प्रगति संबंधी समीक्षा बैठक ली। शर्मा ने सज्जनगढ़ लॉयन सफारी के कार्य की जानकारी ली। इसमें अधिकारियों ने बताया कि लॉयन सफारी के लिए 2200 मीटर की फेसिंग की जानी है, उसमें से 1900 मीटर काम हो चुका है। पूर्ण हुए कार्य में से गत मई माह में करीब 300 मीटर की फेसिंग गिर गई थी, जिसकी जांच चल रही है। इस पर मंत्री शर्मा ने तीन माह में भी जांच नहीं होने पर नाराजगी जताई। साथ ही कहा कि यह छोटा मामला नहीं है। यदि सफारी शुरू होने के बाद फेसिंग गिरती और वन्यजीव उस एरिया से बाहर आ जाते तो क्या स्थिति बनती। यह मोनिटरिंग की भी लापरवाही का सूचक है। उन्होंने निष्पक्ष और त्वरित जांच करते हुए संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। साथ ही जिला कलक्टर नमित मेहता को विभागीय जांच की निगरानी के लिए प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त करने को कहा।
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