आचार्य जी टोंक में पंच कल्याण की स्वीकृति दी है।
पुरानी टोंक में श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंच कल्याणक 7 नवंबर से 12 नवंबर तक आचार्य वर्धमान सागर महाराज के संघ सानिध्य में होगा। पंचकल्याणक से प्रतिमाओं में अतिशय बढ़कर पूजनीय हो जाती है। जिनालय से धर्म वृद्धि मंगल होता है। इस नगर में पूर्व भगवान श्री
राजेश पंचोलिया के अनुसार पंच कल्याणक महोत्सव की पावन तिथि घोषणा से सभा मंडप भगवान और आचार्य श्री की जय जयकार से मंदिर गुंजायमान हो गया। आचार्य श्री ने बताया कि जिनवाणी आगम परम्परा का पालन अच्छी बात है। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने उपदेश में बताया कि 9 फीट के पद्मासन श्री पार्श्वनाथ भगवान का पंच कल्याणक के लिए आचार्य श्री संघ सानिध्य बगैर पुरुषार्थ के आपको प्राप्त हुआ है। शुद्ध कुलाचार और सदाचार वाले परिवार में तीर्थंकर भगवान का जन्म होता हैं। मंदिर टूटने, मिटने पर नया बन जाता हैं,।लेकिन जिनवाणी मिटने, नष्ट होने पर दोबारा नहीं लिख सकते है।

जैन समाज की ओर से पंचामृत अभिषेक किया गया।
आज आचार्य संघ सानिध्य में श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक हुआ। आज संतों से सभी 5 जिनालयों के दर्शन किए। इससे सभी साधु प्रसन्न हुए।
समाज प्रवक्ता राजेश अरिहंत ने बताया कि जैन समाज पुरानी टोंक द्वारा श्री आदिनाथ जिनालय नसिया से बैंड बाजे के साथ नगर के प्रमुख मार्गो से होते हुए श्री चंद्रप्रभु श्रीशांतिनाथ, श्री नेमीनाथ श्री पार्श्वनाथ जिनालय में आचार्य संघ की भव्य अगवानी कमेटी तथा महिला मंडल द्वारा की गैम फिर चरण प्रक्षालन कर मंगल आरती की गई। इस दौरान समाज के पदम गोधा, मोनू चौधरी, रमेश छाबड़ा, पवन बिलासपुरिया, अनिल जैन, अजय सोगानी, विनोद बाकलीवाल, नीरज सोगानी तथा कमेटी के द्वारा अर्ध्य समर्पित किए गए। आचार्य संघ की आहार चर्या अग्रवाल धर्मशाला में हुई।
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