झुंझुनूं में डिजिटल शिक्षा का अधूरा सपना
झुंझुनूं जिले के स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) लैब स्थापित की गईं, लेकिन आज ये लैब धूल फांक रही हैं। 533 में से 226 लैब पूरी तरह बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों विद्यार्थी तकनीक

226 लैब बंद, जिम्मेदार अधिकारी एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी, विद्यार्थी भविष्य से वंचित।
बंद पड़ी लैब: कहीं गोदाम, कहीं धूल की परत
जिले में स्थापित 533 आईसीटी लैब में से केवल 307 ही चालू हैं। बाकी 226 लैब या तो स्थायी रूप से बंद हैं या फिर उनका उपयोग गोदाम के रूप में किया जा रहा है। जिन कमरों में कभी बच्चों को कंप्यूटर सिखाने का सपना देखा गया था, आज उन कंप्यूटरों पर धूल की मोटी परत जमी हुई है। स्क्रीन, कीबोर्ड और माउस बंद कमरों में पड़े हैं। ये दृश्य सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा की जमीनी हकीकत बयां कर रहे हैं।

झुंझुनूं के सरकारी स्कूल में बंद पड़ी आईसीटी लैब, कंप्यूटरों पर जमी धूल तकनीकी शिक्षा की हकीकत बयां कर रही है।
तकनीकी ज्ञान से वंचित हो रहे विद्यार्थी
ये लैब ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों के बीच की डिजिटल खाई को कम करने के उद्देश्य से खोली गई थीं। इनका मकसद विद्यार्थियों को कंप्यूटर आधारित शिक्षण, ऑनलाइन पाठ्यक्रम और तकनीकी ज्ञान देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करना था। लेकिन इन लैब के बंद होने से सरकारी स्कूलों के बच्चे तकनीकी शिक्षा में पिछड़ रहे हैं। एक तरफ निजी स्कूलों में बच्चे स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित हैं।
कागजों में चल रही है योजना
इन लैब के संचालन की जिम्मेदारी ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत निजी कंपनियों को सौंपी गई थी। कंपनियों का काम तकनीकी सहयोग और प्रशिक्षित ऑपरेटर उपलब्ध कराना था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और निगरानी की कमी ने इस योजना को पस्त कर दिया है। कागजों में यह योजना भले ही चल रही हो, लेकिन हकीकत में इसका लाभ विद्यार्थियों तक नहीं पहुँच पा रहा है। यहां तक कि जिले में 19 रोबोटिक्स लैब भी संचालित करने की योजना थी, जो अभी तक शुरू नहीं हो पाई है।

कभी बच्चों को डिजिटल शिक्षा देने का सपना दिखाने वाली करोड़ों की लैब आज ताले में जकड़ी खड़ी है।
जिम्मेदार एक-दूसरे पर डाल रहे हैं
जब इस मामले में अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो सब एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजेश मील ने बताया कि आईसीटी लैब का संचालन समसा (समग्र शिक्षा अभियान) करता है और वही इसकी सटीक जानकारी दे सकता है। समसा के एडीपीसी जयदीप झाझड़िया से संपर्क नहीं हो सका। अधिकारियों का यह रवैया दिखाता है कि किसी को भी इन बंद पड़ी लैब की चिंता नहीं है।

जेपी जानू स्कूल में स्मार्ट क्लास चल रही हैं,
डिजिटल इंडिया के सपने पर प्रश्नचिह्न
सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ और आधुनिक शिक्षा पर लगातार जोर दे रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर करोड़ों रुपये की लागत से बनी ये लैब बंद पड़ी हैं। यदि इन पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को इसका सीधा नुकसान होगा। तकनीकी सहायता, इंटरनेट सुविधा और प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति के बिना डिजिटल शिक्षा का सपना केवल सपना बनकर रह जाएगा।
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