![]()
नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) रैंकिंग-2025 को गुरुवार को जारी हुई। यह इसका 10वां संस्करण था। दैनिक भास्कर ने पिछले 10 साल की रैंकिंग का एनालिसिस किया तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
देश की 100 यूनिवर्सिटीज-कॉलेज की हर साल जारी होने वाली रैंकिंग में 2018 से 2025 तक प्रदेश का एक भी सरकारी स्टेट विवि और कॉलेज जगह नहीं बना सका। यह हाल भी तब है जब प्रदेश में 27 सरकारी विवि और 275 कॉलेज हैं। इस साल सेंट्रल यूनिवर्सिटी किशनगढ़ इकलौता विवि है जो इस रैंकिंग में शामिल हुआ। राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर सिर्फ 2016 में 1 बार, कोटा यूनिवर्सिटी 2016 व 17 में 2 बार, राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटेरनरी एंड एनिमल साइंसेज बीकानेर 2016 व 17 में दो बार जगह बना सकी।
डेंटल कॉलेज… साल 2020 में उदयपुर का पेसिफिक शामिल, इसके बाद से सूखा
- आर्किटेक्चर : 2018 में शामिल किया। 2018 में देश के 10 संस्थानों की रैंकिंग जारी की, जिनमें राजस्थान का कोई नहीं था। 2019 में 15 में-2020 में 20 संस्थानों में-2021 में 25 में-2022 में 30 संस्थानों में में भी शून्य स्कोर रहा। साल 2023 में 30 में से जयपुर का 1 निजी कॉलेज जगह बना पाया। 2024 व 2025 में में 40-40 संस्थानों में 2-2 निजी संस्थान ही जगह बना सके।
- डेंटल : श्रेणी 2020 में शामिल। साल 2020 में 30 संस्थानों में प्रदेश से सिर्फ 1 निजी पेसिफिक डेंटल कॉलेज उदयपुर ने ही जगह बनाई। साल 2021, 22, 23, 24 व 2025 में 40-40 संस्थानों की सूची में राजस्थान का एक भी डेंटल कॉलेज जगह नहीं बना सका।
- इनोवेशन : 2023 में शामिल किया गया। इसमें 2023, 2024 व 2025 में प्रदेश का कोई भी संस्थान जगह नहीं बना सका है।
- ओपन-स्किल-इनोवेशन विवि : तीन श्रेणियों को अलग-अलग 2024 में शामिल किया गया। साल 2024 व 2025 में राजस्थान का कोई भी शिक्षण संस्थान ओपन यूनिवर्सिटी व स्किल यूनिवर्सिटी और इनोवेशन में अपनी जगह नहीं बना सका।
कॉलेज – सरकारी का आंकड़ा शुरुआत से शून्य यह श्रेणी साल 2017 में शामिल। 2017 से 2025 तक हर साल 100-100 कॉलेजों की सूची जारी की जा रही है। इसमें राजस्थान का स्कोर 2017 में शून्य, 2018 में शून्य (0), 2019 में शून्य (0), 2020 में 1 निजी कॉलेज, 2021 में 1 निजी कॉलेज, 2022 व 2023 में फिर शून्य (0), 2024 में 1 निजी कॉलेज और 2025 में फिर शून्य (0) रहा।
भास्कर एक्सपर्ट-साधनों की कमी दूर करें, कार्मिकों की क्षमता को बढ़ाने के प्रयास हों “अच्छी रैंकिंग राज्यों की अच्छी छवि बनती है। संस्थानों की विश्वसनियता भी बढ़ती है। इसमें सुधार के लिए निर्धारित मापदंडों को पूरा करना होगा। रैंकिंग से संबंधित कामों के संपादन की सतत मॉनिटरिंग करनी होगी। ताकि रैंकिंग फ्रेमवर्क के क्रियान्वयन व उससे संबंधित निर्देशन और पर्यवेक्षण की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। संस्थानों में संसाधनों की कमी को समस्या को दूर करने की आवश्यकता है। कार्मिकों की क्षमता संवर्धन की भी जरूरत है ताकि वे रैंकिंग के मूल दर्शन को समझ कर कार्य कर सकें।” -डॉ. गिरिराज सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, सुविवि
Discover more from Kuchaman City Directory
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
Comments