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राज्य विधानसभा में सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक और राजस्थान आयुर्विज्ञान विधेयक (रिम्स बिल) पास हो गया। रिम्स बिल पास होने के साथ ही सदन की कार्यवाही 9 सितंबर तक स्थगित कर दी गई। जयपुर में एम्स की तर्ज पर रिम्स बनाने
रिम्स में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरयूएचएस) का विलय होगा। कैंसर इंस्टीट्यूट रिम्स में शामिल होंगे। रिम्स बिल में इसके गठन से लेकर गवर्निंग काउंसिल तक के प्रावधान है। रिम्स की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। इसका अलग से फंड होगा। सरकार रिम्स को सालाना अनुदान भी देगी।
मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित: विधानसभा में आज मत्स्य क्षेत्र संशोधन विधेयक पारित हो गया। कांग्रेस विधायकों के हंगामा के बीच इस बिल पर बहस में केवल दो विधायकों ने भाग लिया। बसपा विधायक मनोज न्यांगली और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के अलावा कोई विधायक इस बिल पर बहस के दौरान नहीं बोला।
बिल में अवैध रूप से मछली का शिकार करने पर जुर्माना 500 से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने का प्रावधान किया गया है। पहली बार अवैध रूप से मछली का शिकार करने पर 25 हजार जुर्माना होगा। दूसरी बार अपराध करने पर जुर्माना 1000 से बढ़ाकर 50 हजार रुपए किया गया है। रविंद्र सिंह भाटी ने कहा- अवैध रूप से मछलियों के शिकार पर जुर्माना बहुत ज्यादा कर दिया है। इसे कम किया जाना चाहिए।
रिम्स से प्रदेश को विशेष पहचान चर्चा के बाद उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गत डेढ़ साल में चिकित्सा क्षेत्र में कई नवाचार हुए हैं जिससे राजस्थान अग्रणी राज्य बना है। एम्स की तर्ज पर जयपुर में रिम्स स्थापित कर रहे हैं। रिम्स के जरिए स्वास्थ्य परिदृश्य को नई ऊंचाईयां देने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। इसमें चरणबद्ध रूप से 750 करोड़ रुपए व्यय करने का प्रावधान रखा गया है।
सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं डॉ. बैरवा ने कहा कि रिम्स से प्रदेश में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे राज्य को विशेष पहचान मिलेगी। रिम्स एक स्वायत्त संस्थान और विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा। यहां राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 के तहत डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक मान्यता दी जा सकेगी। प्रारंभिक स्तर पर बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय प्रस्तावित है।
कहां कार्य करें कार्मिक तय करेंगे उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है आरयूएचएस में मौजूदा कार्मिक स्वयं तय करे सकेंगे कि वे राज्य सरकार की सेवा में रहेंगे या रिम्स में कार्य करेंगे। इसके लिए भी एक चयन समिति बनाई जाएगी। यहां विश्व स्तरीय अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय आदान-प्रदान के लिए विश्व स्तरीय चिकित्सा संस्थानों से अनुबंध किए जाएंगे। इसकी स्थापना से हमारा प्रदेश देश-विदेश में मेडिकल टूरिज्म का केन्द्र बनेगा।
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