आज बात खरी है में पढ़िए- नेताजी को फीते काटने का शौक है। बिजली का खंभा हो या ट्रांसफॉर्मर, वाटर कूलर हो या प्याऊ, हर जगह पहुंच जाते हैं। उधर, भगवा पार्टी के विधायक और मंत्रीजी के बीच खूब तलवारबाजी हुई। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए…
1. बिजली के ट्रांसफॉर्मर का भी फीता काट रहे विधायकजी
एक फोटो सोशल मीडिया में खूब घूम रही है। दो खंभों के बीच ट्रांसफॉर्मर धरा है। खंभों को लाल रिबन से जोड़ा गया है। कुछ लोग मौजूद हैं, जिनमें से एक हैं विधायक महोदय। फीता काटकर ट्रांसफॉर्मर का उद्घाटन कर रहे हैं। लोगों में चर्चा है कि खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा कोई काम नहीं चूकते। कैंची लेकर घूमते रहते हैं।
प्याऊ हो या वाटर कूलर। किसी अधिकारी-कर्मचारी का रिटायरमेंट हो या फिर गांव में रात्रि जागरण, हर जगह साहब पहुंच जाते हैं। कामों में वे छोटा-बड़ा नहीं छांटते, जो मिल जाए, जहां मिल जाए। फीता काट बैठते हैं।
कई काम तो ऐसे हैं कि मंडल अध्यक्ष भी न करें। नेताजी जानते हैं कि जनता में पैठ इसी तरह बनती है। यूं भी खेत में बिजली का कनेक्शन मिलना कोई छोटी बात है? क्यों नहीं जाएंगे? जरूर जाएंगे।

खींवसर विधायक बिजली ट्रांसफॉर्मर का फीता काटते हुए। बायें पगड़ी में।
2. मंंत्रीजी और विधायक महोदय के बीच खूब हुई तलवारबाजी
भगवा पार्टी के नेता विपक्ष को कुछ गांठते ही नहीं। मुकाबला करने के लिए उन्हें कड़ी टक्कर चाहिए। अब कोटा में देखिए। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और विधायक संदीप शर्मा तलवारें लेकर आमने-सामने हो गए। गणपति के विसर्जन जुलूस में खूब हाथ दिखाए। उनके जौहर पर कार्यकर्ता बलाइयां लेने लगे। भीड़ मुरीद हो गई।
माहौल ऐसा बना कि विधायक महोदय का जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। ऐसा दांव घुमाकर तलवार सीधे मंत्रीजी की कमर की तरफ घुमाई कि उन्हें केएल राहुल की तरह रक्षात्मक शॉट खेलना पड़ गया।
खीं-खीं-खीं से इस मुकाबले का समापन हुआ। उधर, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के ओएसडी राजीव दत्ता कहां पीछे रहने वाले थे। उन्हें तलवार मिली लेकिन जोड़ीदार नहीं मिला। लिहाजा अदृश्य शत्रु से अकेले ही जूझ पड़े। ऐसी तलवारबाजी की कि भीड़ ने झुक-झुककर जान बचाई।

कोटा में गणपति विसर्जन के दौरान तलवारबाजी करते विधायक संदीप शर्मा (गले में दुपट्टा) और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर।
3. प्रभारी मंत्रीजी पर कलेक्टर साब ने क्या जादू कर दिया?
हनुमानगढ़ पानी-पानी है। जहां देखो वहां बाढ़ का पानी समाया है। किसान-फसल सब चौपट हो गए। प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा यहां प्रभावित इलाकों का दौरा करने आए थे।
कलेक्टर साहब को देख तमतमा गए- क्या करते हो? क्या इंतजाम किए हैं? कुछ नहीं किया, हर जगह पानी भरा है, ऐसा होता है क्या? सीएम साहब को शिकायत कर दूं क्या? बेचारे कलेक्टर साहब घिघियाते रहे।
कुछ देर बाद मंत्री महोदय प्रेस वार्ता करने पहुंच गए। एक खबरची ने शहर में जल-जमाव का सवाल उठा लिया। बस फिर क्या था। मंत्रीजी ने यूटर्न मारा।
पलटकर पत्रकार से ही पूछ बैठे- भैया तुम बताओ, क्या ऐसी कोई जादू की छड़ी है कि ऊपर से पानी गिरे और धरती पर गिरते ही सूख जाए। बताओ-बताओ, ऐसा कोई चमत्कार होता हो तो हमें भी जानकारी दो। अब खबरनवीसों में चर्चा है कि कलेक्टर साहब ने चंद मिनटों में कौन सा जादू कर दिया?

हनुमानगढ़ कलेक्टर को फटकार लगाते हुए प्रभारी मंत्री सुमित गोदारा।
4. चलते-चलते
रील बनाने के लिए युवा क्या कुछ नहीं करते। रोड पर स्टंट करते हैं। ट्रैक पर जान को जोखिम में डालते हैं। चलती बाइक का हैंडल छोड़ देते हैं। भले आदमी, अगर करना ही है तो कोई नेक काम करो, ताकि रील भी बने तो लोग वाहवाही करें। चूरू के लड़कों ने खूब शाबाशी का काम किया। उनका वीडियो सामने आया तो हर कोई उनके काम का मुरीद हो गया।
चूरू में चलती ट्रेन में एक बुजुर्ग सज्जन का शुगर लेवल डाउन हो गया। चेन खींचकर ट्रेन को रोका गया। दोस्त को स्टेशन पर छोड़ने गए युवक को जब पता चला कि बुजुर्ग बेहोश हो गए तो बाइक पर उन्हें बैठाया।
पीछे से एक साथी ने बीमार बुजुर्ग को पकड़ा और हॉस्पिटल की तरफ भागे। बिना देर किए बाइक को सीधे हॉस्पिटल में ही घुसा दिया।
इमरजेंसी वार्ड के गेट तक बाइक पहुंची। बुजुर्ग की जान बच गई। थ्री इडियट फिल्म का सीन और डायलॉग याद आ गया- बेटा, काबिल बनो, कामयाबी झक मारकर पीछे आएगी।

चूरू में बाइक पर मरीज को लेकर सीधे हॉस्पिटल में घुस गए बाइक सवार युवक।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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