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वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून के विरोध में चल रहे राष्ट्रव्यापी अभियान का दूसरा चरण जल्द ही शुरू होगा।
वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन कानून के विरोध में चल रहे राष्ट्रव्यापी अभियान का दूसरा चरण जल्द ही शुरू होगा। वक्फ बचाओ संविधान बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राष्ट्रीय
उन्होंने बताया कि पहले चरण में धरने-प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए थे। अब दूसरे चरण में जैन, बौद्ध, सिख और ईसाई धर्म के लोगों के साथ बैठकें की जाएंगी। इन बैठकों में सरकार की मंशा से अवगत कराया जाएगा।
आरोप लगाया सरकार की मंशा मुसलमानों की बेहबूदी नहीं
डॉ. इलियास ने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा मुसलमानों की बेहबूदी नहीं, बल्कि उनकी जमीनों पर कब्जा करना है। उन्होंने कहा कि पहला हमला मुस्लिम समुदाय पर हुआ है। इसके बाद सरकार अन्य धर्मों की संपत्तियों पर भी कब्जा करने का प्रयास करेगी।
उन्होंने बताया कि वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ मुसलमानों द्वारा 5 करोड़ से अधिक ईमेल भेजे गए थे, लेकिन सरकार ने इनकी अनदेखी की। उनका कहना है कि यह कानून संविधान और मुस्लिम समाज के अधिकारों का उल्लंघन है।
सरकार वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करने के बजाय खुद उन पर अतिक्रमण करना चाहती है- डॉ. इलियास
डॉ. इलियास ने न्यायालय से उम्मीद जताई कि इस मामले में अंतिम फैसला उनके पक्ष में आएगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर अच्छी बहस हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमण से मुक्त करने के बजाय खुद उन पर अतिक्रमण करना चाहती है।
वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल सरकारों के अधीन
डॉ कासिम रसूल इलियास ने कहा- वक्फ बोर्ड राज्य सरकार और वक्फ काउंसिल केंद्र सरकार के अधीन होती हैं, अगर वक्फ की संपत्तियों पर कब्जे हो रहे थे तो उन कब्जों को हटाना वक्फ बोर्ड और वक्फ काउंसिल का जिम्मेदारी थी।
उन्होंने कहा कि 2013 में तत्कालीन मनमोहन सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार करवाया था। जिसके तहत एक कॉरपोरेशन का गठन होना था और उसी के अधीन तमाम व संपत्ति आनी थी। लेकिन सत्ता बदलते ही मोदी सरकार ने सबसे पहले ड्राफ्ट को रिजेक्ट किया और अब वक्फ संशोधन कानून ले आए।
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