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डीग एसडीएम देवी सिंह और उसका रीडर मुकेश गत दिनों 80 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप हुए हैं। एसीबी ने इनके रिश्वत का सत्यापन 19 सितंबर को कराया था। एसडीएम ने कैंप में ही परिवादी से स्पष्ट कहा था कि रीडर मुकेश से मिल लें, आपकी जमीन का रिसीवर ऑर्डर करवा
परिवादी ने जब कहा कि साहब, मेहनत के रुपए हैं, कम कर दो, तब रीडर मुकेश ने परिवादी को पुराना परिचित बताते हुए 80 हजार में सौदा तय कर दिया। एसीबी ने एसडीएम देवी सिंह और रीडर मुकेश दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी ने कार्रवाई में 50 हजार असली व 30 हजार के डमी नोट काम में लिए। पढ़िए… एसडीएम और उसके रीडर ने परिवादी हरिओम से किस तरह से रिश्वत मांगी और एसीबी ने कैसे जाल बिछाकर ट्रैप किया।
एसडीएम देवीसिंह और परिवादी हरिओम की पहली मुलाकात
हरिओम: राम-राम साहब… मेरी वो जमीन वाली फाइल एक साल से पेंडिंग है, रिसीवर ऑर्डर करवाना है।एसडीएम: (थोड़ा मुस्कराकर) देखो, काम तो हो जाएगा, लेकिन मुकेश से बात कर लो। वह सब देख लेगा।हरिओम: साहब, आप ही कुछ कहो, मैं खुद आया हूँ, मेहनत की कमाई से लिया है वो प्लॉट…एसडीएम: बात वही है… मुकेश को समझाओ, जो जरूरी हो, वही करेगा।
एसडीएम ऑफिस के बाहर… रीडर मुकेश से पहली सीधी बात
हरिओम: भाईसाहब, साहब ने कहा आपसे मिल लूं… रिसीवर ऑर्डर के लिए बात करनी थी।मुकेश: हां, साहब से बात हो गई थी। देखो… मामला सीधा नहीं है। एससी जमीन है, तुम्हारा नाम भी नहीं है।हरिओम: मैं तो मालिक हूं, जमीन मेरे ही पैसे से खरीदी गई थी।मुकेश: तो फिर साहब और मेरा हिस्सा… डेढ़ लाख लगेंगे।हरिओम (चौंकते हुए): डेढ़ लाख!मुकेश: चलो, तुम पुराने लगते हो, 80 हजार में बात पक्की कर लो।
ट्रैप से पहले; हरिओम और एसीबी कांस्टेबल ब्रह्मदेव की बातचीत
ब्रह्मदेव: रिकॉर्डर ले लो… सब कुछ खुल के बोलना, जो बोले वही बताना, आवाज साफ होनी चाहिए।हरिओम: चिंता मत करो साहब, इस बार तो रंगे हाथ पकड़वाऊंगा… ईमान बेच खा रहे हैं ये लोग।
रिश्वत लेन-देन की बातचीतस्थान
एसडीएम ऑफिस, कमरा नंबर 3 हरिओम (रीडर से): ये रहे 80 हजार रुपए, काम कब तक होगा? मुकेश: लिफाफा मुझे दे दो। साहब से बात हो गई है। (हरिओम सफेद लिफाफा टेबल पर रख देता है — जिसमें 50,000 असली और 30,000 डमी नोट थे) हरिओम: तो साहब से भी बात हो गई?मुकेश: बिलकुल, उन्होंने ही कहा है कि सामान लेकर आओ तो काम हो जाएगा।
ट्रैप के बाद; एसीबी टीम का धावा, लिफाफा टेबल से बरामद
एसीबी अधिकारी: आप मुकेश हैं?मुकेश (घबराते हुए): हां, लेकिन मैंने कुछ नहीं लिया, वो जबरदस्ती टेबल पर रख गया।परिवादी हरिओम: साहब, अभी-अभी इन्हीं के हाथ में था, मेरी आंखों के सामने टेबल पर रखा गया है।गवाह (धीरज): हां, देखा हमने… सफेद लिफाफा, यही था।
खोहरी सेवा शिविर; एसीबी पहुंची एसडीएम देवी सिंह के पास
एसीबी: देवी सिंह जी, आप पर गंभीर आरोप हैं, रिश्वत की संलिप्तता की पुष्टि हुई है।एसडीएम: न तो मैंने पैसे मांगे, न ही किसी को रिश्वत लेने को कहा।हरिओम: साहब, आप ही ने कहा था, ‘मुकेश को सामान दे दो, काम हो जाएगा।’ यह आवाज रिकॉर्ड में है।(एसीबी अधिकारी वॉइस रिकॉर्डिंग सुनवाते हैं, एसडीएम की आवाज स्पष्ट सुनाई देती है)गवाह (सिकंदर): सुन लिया हमने… सब कुछ साफ है।
अंतिम सीन
रश्वत के नोट गिने जाते हैं, इनमें 50 हजार असली और 30 हजार डमी करेंसी के नंबर हूबहू मिले।
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