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मनरेगा के तहत अब जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ाया जाएगा। भविष्य में इस पर मनरेगा के लिए आवंटित राशि का 30 से 65 प्रतिशत हिस्सा पानी बचाने के कामों पर खर्च किया जाएगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के उन इलाकों में जहां भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया ह
इससे भूजल में बढ़ोतरी संभव होगी, साथ ही ग्रामीणों के लिए पानी की तात्कालिक समस्या भी खत्म हो पाएगी। इसे लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय ने संयुक्त रूप से कार्ययोजना बनाई है। जिसमें अति जल संकट ग्रसित और गंभीर ग्रामीण ब्लॉक में मनरेगा राशि का 65% जल-संबंधी कार्यों पर खर्च किया जाना तय हुआ है।
अर्ध-गंभीर ग्रामीण ब्लॉक में मनरेगा राशि का 40% खर्च किया जाएगा। जबकि जिन ब्लॉकों में जल संकट ज्यादा नहीं है, वहां भी मनरेगा व्यय के अंतर्गत 30% राशि जल संबंधी कार्यों पर खर्च होगी। ताकि भविष्य की जरूरतों की पूर्ति हो सके। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत जल सुरक्षा को एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है। कई कार्यों को लेकर नरेगा अधिनियम में संशोधन किए गए थे। उसमें एक यह भी था कि ग्रामीण ब्लॉकों में जल संरक्षण एवं संचय कार्यों पर न्यूनतम व्यय को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया।
वहीं, इसके लिए जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों का प्रशिक्षण कराया गया है। उल्लेखनीय है कि मनरेगा में पहले से नाडी तालाब की खुदाई, पाल बांधने, टांके, छोटे मोटे बंधे एनीकेट का निर्माण कराया जाता रहा है, लेकिन अब इसके लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाकर काम कराएंगे। इसमें नाडी तालाबों के कैचमेंट एरिया का विकास, पौधारोपण, भूजल रिचार्ज के लिए नई तकनीक आदि शामिल होगा। मनरेगा में किए गए इस बदलाव का फायदा राजस्थान को सबसे ज्यादा मिलेगा।
प्रदेश के 214 ब्लॉक में पानी का दोहन ज्यादा
मनरेगा योजना का राजस्थान में बड़ा लाभ मिलेगा। प्रदेश में गत वर्ष भूजल विभाग ने 302 ब्लॉक इकाइयों का मूल्यांकन किया था। इनमें से 214 ब्लॉक-इकाइयां यानि 70.86% को अतिदोहित श्रेणी में रखा गया था। जबकि 27 इकाइयों यानि 8.94% को गंभीर, 21 इकाइयों यानि 6.95% को अर्ध गंभीर, जबकि 37 इकाइयों यानी 12.25% को सुरक्षित श्रेणी में रखा गया है।
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