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जलदाय विभाग के जेजेएम में ठेका कंपनियों ने 2021 से ही फर्जी अनुभव व आय प्रमाण पत्रों से टेंडर हासिल करने का खेल चला रखा था। लेकिन ठेका कंपनियों की इस करतूत की किसी को भनक भी नहीं लगी। फर्जी ई-मेल व फर्जी इरकॉन के दफ्तर के जरिए प्रमाण पत्रों का वेरिफि
अब एसीबी के पत्र के बाद 2023 से पहले हुए जेजेएम के टेंडर भी जांच के दायरे में आ गए हैं। अब तक 2023 में हुए टेंडरों की ही जांच हो रही थी। अब एसीबी ने एक साल पहले दर्ज हुई प्राथमिकी जांच में विभाग से रिकॉर्ड तलब किया हैं। एसीबी ने अपने पत्र में लिखा है कि इस दौरान हुए टेंडरों को लेकर हुई शिकायतों और उन पर हुई कार्यवाही के नोटशीट से भी अवगत करवाया जाए। जब ठेकेदारों ने गलत व कूटरचित दस्तावेज से टेंडर लिए तो कौनसी शर्त का उल्लंघन किया।
एसीबी ने ठेकेदार फर्म के साथ ही जिम्मेदार अफसरों के नाम व वर्तमान पदस्थापन को लेकर भी जानकारी मांगी है। ऐसे में 2021 से 2023 तक जयपुर रीजन प्रथम व द्वितीय, अलवर एनसीआर व जयपुर जिला सर्किल में रहे अधिकारी जांच के दायरे में हैं।
दो फर्मों तक ही जांच, उदयपुर ग्रामीण व बांसवाड़ा डिविजनों में कार्रवाई नहीं
जेजेएम में अब तक केवल दो फर्मों के टेंडर व कार्यों की ही जांच हो रही है। जबकि उदयपुर ग्रामीण व बांसवाड़ा डिविजन में जेजेएम में पाइपलाइन डालने व टंकियां में कम लोहे-घटिया कंक्रीट का फर्जीवाड़ा और फोटोकॉपी बिलों पर ही करोड़ों रुपए का पेमेंट होने के गंभीर मामलों की शिकायत के बाद कार्रवाई नहीं हो पाई है। जेजेएम एमडी व सीई ने डेढ़ साल पहले यहां अनियमितताएं मानी थीं। कई डिविजनों में टीपीआई की आपत्तियों के बावजूद ठेकेदारों को पेमेंट कर दिया गया।
एसीबी ने ये फाइल मांगी एसीबी ने 2021 से 2023 तक के टेंडर की वित्तीय विभाग से स्वीकृति, नोटशीट, टेंडर शर्तों की कॉपी, प्री बिड मीटिंग की कार्यवाही, इरकॉन इंटरनेशनल के प्रमाण पत्र, टेंडर की टेक्निकल बिड से जुड़ी फाइलें मांगी है। इसके अलावा फर्मों के दिए वर्कऑर्डर, एग्रीमेंट की कॉपी भेजने को कहा है। साथ ही इन टेंडर वाली फर्मों के सभी बिल और किए गए भुगतान की जानकारी भी मांगी है।
एसीबी ने मांगी यहां के टेंडरों की पूरी सूचना एसीबी ने महवा, अजीतगढ़ (नीमकाथाना), झुंझूनूं, सीकरी (दौसा), जयपुर रीजन के झोटवाडा ग्रामीण, शाहपुरा, कोटपूतली, विराटनगर, जमवारामगढ़, आमेर, चौमूं, बस्सी, भानपुर, अलवर एनसीआर रीजन के अलवर ग्रामीण, नारायणपुरा, बहरोड, नीमराना सहित दो दर्जन डिविजन में हुए टेंडरों की पूरी जानकारी मांगी है।
अब तक 5 गिरफ्तारियां
जेजेएम के टेंडर लेने के लिए फर्म मैसर्स गणपति ट्यूबवेल कंपनी व मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल ने इरकॉन इंटरनेशनल कंपनी के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र बनवा लिए थे। मामले में ईडी ने 3 दर्जन ठिकानों पर छापे मारे थे, जिसमें जलदाय विभाग के इंजीनियर भी शामिल थे। ईडी ने पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी, ठेकेदार पदम चंद जैन, महेश मित्तल, पीयूष जैन और संजय बड़ाया को गिरफ्तार किया था। जोशी के अलावा अधिकांश की जमानत हो चुकी है।
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