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जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ, तपागच्छ में रविवार को अहिंसा परमोः धर्मःका संदेश देने वाले भगवान महावीर के जन्म वांचन का उत्सव कल्पसूत्र के प्रसंगानुसार मनाया गया। उत्सव में चतुर्विद संघ (साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविकाओं) चिंतन, मनन, व्याख्यान व चर्चा में सक्रिय भागीदारी निभाई। गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर कहा कि समस्त जैन धर्मावलम्बियों ही नहीं समस्त जगत के लिए भगवान महावीर स्वामी के आदर्श, सिद्धान्त व संदेश आदर्श है। भगवान महावीर के चरित्र को सुनकर, उस पर चिंतन-मनन करने से हमें जीवन के मर्म का पता चलता है तथा जीवन जीने का सलीका आ जाता है।

गणिवर्य मेहुल प्रभ सागर, मंथन प्रभ सागर व मीत प्रभ सागर के सान्निध्य में सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट की बीकानेर इकाई की ओर से वांचना रांगड़ी चौक की तपागच्छीय पौषधशाला में की गई। अखिल भारतीय खरतरगच्छ युवा परिषद की बीकानेर इकाई के अध्यक्ष अनिल सुराणा ने बताया कि बाड़मेर के भूरचंद-मंजू देवी भंसाली, कपिल कुमार-पूजा, जियाना भंसाली, रमेश व उषा संखलेता ने पालना को मुरलीधर व्यास नगर में अग्निशमन के पास से गाजे बाजे से लाकर ढढ्ढा कोटड़ी में लाकर जन्मोत्सव के लिए प्रतिष्ठित किया। वरिष्ठ श्रावक भूरचंद भंसाली परिवार के साथ अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने पालने में विराजमान परमात्मा की वंदना की।

संगठन के प्रचार मंत्री धवल नाहटा ने बताया कि परमात्मा के पालनाजी को सोमवार को वापस प्रवचन स्थल ढढ्ढा कोटड़ी में लाया जाएगा। स्वप्न की बोलियों में मुनीमजी की भूमिका वरिष्ठ चार्टेड एकाउंटेंट राजेंद्र लूणिया व उनके सहयोगी के रूप में कृष्ण लूणिया ने भूमिका निभाई। चौविहार के 59 दिन की उपवास करने वाले कन्हैयालाल भुगड़ी तथा अक्षय निधि व अन्य तपस्याएं करने वाले तप के तपस्वियों की अनुमोदना की गई।



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