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पेयजल स्कीमों में एस्को मॉडल के ट्यूबवेलों के ऑपरेशन और मेंटेनेंस में 150 करोड़ रुपए के घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। जांच कमेटी ने इसके लिए 7 इंजीनियरों को दोषी करार दिया है। जल्द ही आरोपी इंजीनियरों को चार्जशीट दी जाएगी और दो फर्मों को ब्लैक लिस्ट कि
हालांकि, कुछ इंजीनियरों की दूसरी जगह पोस्टिंग हो चुकी है और कुछ सेवानिवृत्त हो चुके हैं। एडिशनल चीफ इंजीनियर ने 10 इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस दिया था। इनमें से तीन के जवाब संतोष जनक पाए गए थे।
घोटाले का टेंडर – फर्म को पहले 20 ट्यूबवेल का टेंडर दिया गया फिर उसी को 981 का ठेका दे दिया
ठेका फर्म मैसर्स एमएम कंस्ट्रक्शन कंपनी (जालोर) और मैसर्स राज एंटरप्राइजेज के काम और वर्कऑर्डर की जांच की जा रही है। ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई होगी। कमेटी की जांच में सामने आया है कि जलदाय विभाग के जालोर सर्किल ने ट्यूबवेलों के ऑपरेशन और मेंटेनेंस का काम एस्को (एनर्जी सर्विस कंपनी) मॉडल पर देना तय किया था। इसके बाद 12 अगस्त 2022 को जालोर की ठेका फर्म मैसर्स एमएम कंस्ट्रक्शन कंपनी (जालोर) और मैसर्स राज एंटरप्राइजेज को वर्कऑर्डर जारी किए गए।
आरोप है कि वित्त कमेटी की अनुमति के बिना ही टेंडर जारी किए गए। पहले 20 ट्यूबवेल का ठेका फर्म को दिया गया। इसके बाद वर्कऑर्डर में ट्यूबवेल की संख्या मनमर्जी से बढ़ती गई। पहले संख्या 112 हुई और फिर इसे 981 ट्यूबवेल का जिम्मा दे दिया गया। गौरतलब है सीएस सुधांश पंत ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद चीफ इंजीनियर संदीप शर्मा, एसीई नक्षत्र सिंह चारण व मुख्य लेखाधिकारी प्रेम सिंह की कमेटी बनाई थी।
इन्हें मिला था नोटिस, लेकिन चार्जशीट नहीं देंगे
- एक्सईएन रामनिवास यादव (भीनमाल), खेमचंद सिंघाडिया, महेंद्र कुमार (भीनमाल)।
ये इंजीनियर दोषी पाए गए हैं
- ताराचंद कुलदीप, तत्कालीन एसई जालोर (सेवानिवृत्त)
- रमेश चंद्र मीणा, तत्कालीन एसई, जालोर (वर्तमान एसई दौसा)
- श्याम बिहारी बैरवा, तत्कालीन एसई व एक्सईएन, जालोर
- उमेश कुमार मीणा, तत्कालीन एक्सईएन जालोर (वर्तमान एक्सईएन ड्रिलिंग, जयपुर) {आशीष द्विवेदी, तत्कालीन एक्सईएन जालोर (सेवानिवृत्त)
- जितेंद्र त्रिवेदी, तत्कालीन एक्सईएन भीनमाल (वर्तमान टीए, जालोर) {हेमन्त कुमार वैष्णव, एक्सईएन, भीनमाल
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