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चित्तौड़गढ़ में आयोजित दैनिक भास्कर “पुलिस प्राइड अवॉर्ड” समारोह में जिले के 47 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि इस बार एसपी मनीष त्रिपाठी ने उन पुलिसकर्मियों को सम्मान के लिए चुना जो आमतौर पर लोगों की नजरों में नहीं

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जिले की 47 पुलिसकर्मियों का हुआ सम्मान।

जिले की 47 पुलिसकर्मियों का हुआ सम्मान।

इस कार्यक्रम में जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने कहा कि उन्हें इस जिले में डेढ़ साल हो गए हैं लेकिन आज उन्हें ऐसे पुलिसकर्मियों के बारे में जानने का मौका मिला जिन्हें उन्होंने कभी देखा भी नहीं था। उन्होंने कहा कि एसपी मनीष त्रिपाठी ने उन अनदेखे और अनसुने कर्मचारियों को ढूंढा, उन्हें मंच पर लाया और उनका सम्मान किया। उन्होंने कहा कि यह वे लोग हैं जो ऑफिस की रीढ़ की हड्डी होते हैं। कलेक्टर ने कहा कि आज सम्मान पाने वाले पुलिसकर्मियों के ऊपर अब और बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। अब लोग उनसे और भी अच्छे कामों की उम्मीद करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एक दिन सम्मान पाना काफी नहीं है, अब साल के बाकी 364 दिन भी मेहनत और ईमानदारी से काम करते रहना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी सम्मानित पुलिसकर्मी इस उम्मीद पर खरे उतरेंगे।

एसपी मनीष त्रिपाठी ने इस अवसर पर बताया कि जब वह पढ़ाई करते थे तब राजस्थान में दैनिक भास्कर शुरू हुआ था और तब से वह इसके नियमित पाठक रहे हैं। लेकिन जब दैनिक भास्कर ने पुलिसकर्मियों का सम्मान करना शुरू किया, तभी से उनके मन में अखबार के प्रति सम्मान और भी बढ़ गया। उन्होंने कहा कि पहले वह सिर्फ पाठक थे, लेकिन अब वह दैनिक भास्कर के आभारी भी हैं। उन्होंने बताया कि यह सम्मान केवल एक पुरस्कार नहीं है, बल्कि अब यह जिम्मेदारी की शुरुआत है। एसपी त्रिपाठी ने साफ शब्दों में कहा कि आज सम्मान मिलने के बाद अगर कोई गलती हुई तो सबसे पहले खबर भी भास्कर में ही छपेगी। इसलिए अब हर पुलिसकर्मी को खुद को हर स्तर पर साबित करना होगा।

इस बार पुलिसकर्मियों को उन्हीं के परिवार वालों के सामने सम्मानित किया गया।

इस बार पुलिसकर्मियों को उन्हीं के परिवार वालों के सामने सम्मानित किया गया।

एसपी ने पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे हर दिन एक अच्छा काम जरूर करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वह अच्छा काम पेड़-पौधों को पानी देना हो सकता है, पक्षियों के लिए परिंडे बांधना हो सकता है, अपने ऑफिस की सफाई करना हो सकता है, या अपनी डेस्क को व्यवस्थित करना भी हो सकता है। जब हम अपने आप को ठीक कर लेंगे, अपने घर और ऑफिस को सही रखेंगे, तो हम आगे बढ़कर सड़कों पर सफाई करेंगे और फिर समाज से मदद मांगने जाएंगे ताकि हम मिलकर एक बेहतर समाज बना सकें।

एसपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि वह हर महीने अपने जवानों को इंटरनल अवॉर्ड देते हैं, लेकिन यह अवॉर्ड खास है क्योंकि यह उनके परिवार के सामने मिला है। इस मंच पर पुलिसकर्मियों को केवल सम्मान नहीं मिला बल्कि उन्हें एक नई पहचान और हौसला भी मिला है। अब वे अपने घर-परिवार और समाज के सामने गर्व से कह सकते हैं कि उनका काम भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी अन्य पद का है।

इस कार्यक्रम में शहर के कई गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें डॉ. वसीम खान, महेश जिंक, विजय ओस्तवाल, बृजेश चौकड़ा, मनीष तोषनीवाल, दीपक भट्ट, महेंद्र सिंह राठौड़, गोपाल सिंह राठौड़, श्याम शर्मा, योगेश दशोरा और रवि वीरानी शामिल रहे। सभी ने पुलिस विभाग के इस अनूठे सम्मान कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि इससे पुलिसकर्मियों का मनोबल और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेगा।



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