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न्यूटन के पहले भी गुरुत्वाकर्षण के नियम की खोज हो चुकी थी। एक विद्वान कॉपरनिकस थे, उन्होंने गुरुत्वाकर्षण की खोज की थी। लेकिन वह बाहर नहीं आया। क्योंकि, वह बाहर के लोगों को मान्य नहीं था। वह विद्वान भास्कराचार्य थे। भास्कराचार्य ने एक किताब लिखी थी न

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बेटी अपने पिता से पूछती थी कि पापा आप कहते हो, सूर्य के पृथ्वी चक्कर लगाती है। पृथ्वी के बाजू चंद्रमा घूमता है। फिर यह नीचे गिरते क्यों नहीं। ऐसे में भास्कराचार्य ने जवाब दिया कि यह एक दूसरे को आकर्षित करते हैं। इसलिए नीचे नहीं गिरते। यह उन्होंने 1150 में लिखा।

1629 में न्यूटन का नियम लागू हुआ। इतने साल पहले से ही अपने पास वह डिटेल थी। लेकिन हमें मालूम ही नहीं क्योंकि किसी ने पढ़ाया ही नहीं। वह किताब बंद करके रखी जाती थी। इसलिए भारत की बौद्धिक क्षमता धीरे-धीरे कम होती गई। क्योंकि हमें अंग्रेजों का लिखा पढ़ाया जाता था। अंग्रेजों की तारीफ करना सिखाया जाता था।

संबोधित करते हुए राज्यपाल हरि भाऊ बागडे।

संबोधित करते हुए राज्यपाल हरि भाऊ बागडे।

राज्यपाल ने कहा- कई जगह कॉपी करके पास होना पड़ता है, लेकिन शिक्षा का अर्थ यह है कि स्कूल और कॉलेज में, विश्वविद्यालय में अच्छी पढ़ाई करो। इतना सक्षम पढ़े की कॉपी करने की जरूरत न पड़े।

राज्यपाल ने यह बात सीकर में पं. दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी यूनिवर्सिटी में गुरुवार को आयोजित दीक्षारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कही। इस अवसर पर राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी की मॉडर्न मीडिया लैब और रेडियो शेखावाटी 91.2 कम्युनिटी रेडियो का लोकार्पण भी किया।

शेखावाटी रेडियो 91.2 का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल।

शेखावाटी रेडियो 91.2 का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल।

कार्यक्रम की थीम थी नई शिक्षा, नए विचार और विकसित भारत का संकल्प। राज्यपाल बागडे ने नव आगंतुक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा- अहंकार छोड़कर अर्जुन की तरह एकाग्रता और समर्पण के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें। उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) को प्राचीन गुरुकुल परंपरा से प्रेरित बताते हुए इसके सर्वांगीण विकास को सराहा। नई शिक्षा नीति में वेद, वैद्य, आयुर्वेद पढ़ाए जाएंगे। बागडे ने विद्यार्थियों से इच्छा शक्ति और संयम के साथ अपने सपनों को साकार करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने राजस्थान को वीर प्रसूताओं की भूमि कहा और स्वतंत्रता संग्राम में शिक्षक अर्जुन लाल सेठी के योगदान को याद किया। साथ ही नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों के गौरव के बारे में बताया। साथ ही, उन्होंने 1835 में लार्ड मैकाले की शिक्षा नीति को भारत को मानसिक रूप से गुलाम बनाने की साजिश बताया।

अत्याधुनिक मीडिया लैब का लोकार्पण करते हुए राज्यपाल।

अत्याधुनिक मीडिया लैब का लोकार्पण करते हुए राज्यपाल।



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