श्रीगंगानगर के अनूपगढ़ के गांव 2PGM में बुधवार शाम को एक साथ तीन अर्थी उठी। तीनों की मौत जैतसर में सूरतगढ़-अनूपगढ़ स्टेट हाईवे-94 पर गांव 5 जीबी पुलिया के पास एक सड़क हादसे में हुई थी।
तीनों युवक अपने दो अन्य दोस्तों के साथ चानणा धाम बालाजी के दर्शन करने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी टैक्सी कार सड़क पर खड़े ट्रक में घुस गई।
शव गाड़ी में बुरी तरह फंस गए थे। टैक्सी काटकर तीनों शव को बाहर निकाला गया। गांव के श्मशान घाट में एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।

दो चचेरे भाई और दोस्त की मौत
जैतसर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शिव जी राणा ने बताया-उन्हें रात करीब 3:45 बजे सूचना मिली थी कि 5 जीबी पुलिया के पास एक कार और ट्रक की टक्कर हो गई है। हादसे में मुखराम उर्फ कालूराम (18) पुत्र मदनलाल उसके चचेरे भाई नरेश (20) पुत्र बुधराम के अलावा दोस्त सुरेंद्र (20) पुत्र पप्पूराम की मौत हो गई। नरेश और सुरेंद्र की मौत मौके पर ही हो गई थी। वहीं कालूराम ने सूरतगढ़ अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
कार चालक जगदीश (28) पुत्र मनीराम और सुखदेव (19) पुत्र श्रवण राम बावरी गंभीर रूप से घायल हो गए। जिनका श्रीगंगानगर जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

नरेश और कालूराम की अर्थी एक ही घर से उठी।
शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम
नरेश और सुरेंद्र का शव जैतसर, वहीं कालूराम का शव सूरतगढ़ से बुधवार दोपहर करीब 3 बजे दो गाड़ियों से एक साथ गांव पहुंचे। जैसे ही शव गाड़ियों से उतारे गए गांव में कोहराम मच गया। नरेश और कालूराम कि मां और बहने रोते हुए बार बार दोनों को उठने के लिए कह रही थी।
वहीं सुरेंद्र का शव उनके घर पहुंचा तो उसकी मौसी और 3 बहनों का रो-रो कर बुरा हाल था। सुरेन्द्र की 2 छोटी बहन मोनिका और ममता रोते हुए बार-बार अपने भाई को पुकार रही थी। मोनिका के मुंह से सिर्फ एक ही बात निकल रहा थी कि “भाई तू बिना बताए घर से क्यों गया” दोनों बहनों की तबीयत बिगड़ने पर मौके पर ही डॉक्टर को बुलाना पड़ा।

नरेश और कालूराम की बहनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
घरवालों को बिना बताए निकले घर से
सुरेंद्र के बड़े भाई सुनील ने बताया-करीब 15 साल पहले उनके माता-पिता की एक बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। वे 6 भाई-बहन है। सुरेंद्र चौथे नंबर का था। सुरेंद्र अनूपगढ़ के बाजार में एक दुकान पर लोहे की संदूक और अलमारी बनाने का काम करता था। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे सुरेंद्र घर पर ही था। उस दौरान उसका दोस्त सुखदेव बाइक लेकर घर आया। सुखदेव ने अपनी बाइक हमारे घर खड़ी की। कुछ देर बार सुरेंद्र और सुखदेव हमारी बाइक लेकर घर से चले गए।
गांव के ही एक दोस्त को भी ले जाना चाहते थे साथ
गांव के ही बाइक मैकेनिक रमेश कुमार ने बताया- सुरेंद्र, नरेश, कालूराम और सुखदेव उसके बचपन के दोस्त हैं। मंगलवार रात करीब 8:45 बजे चारों दोस्त उसके घर आए थे। उन्होंने घर पर ही सुरेंद्र की बाइक सही करवाई। बाइक सही करवाते समय सुखदेव और सुरेंद्र ने घूमने के लिए गांव 4ए चलने के लिए कहा। मेरे दादाजी ने ये बात सुन ली तो उन्होंने मुझे साथ जाने से मना कर दिया।
इसी दौरान नरेश भी उनकी बाइक से उतर गया और साथ जाने से मना कर दिया। वह अपने घर जा रहा था कि सुखदेव और सुरेंद्र ने नरेश को मनाकर वापस बाइक पर बैठा लिया।

तीनों दोस्तों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया।
रात पौने 12 बजे गांव से निकले थे सभी
गांव के सुखचरन सिंह ने बताया- गांव के अंदर आने के रास्ते के शुरुआत में ही उसका घर और चक्की है। मंगलवार रात करीब 11:30 बजे जगदीश अपनी कार लेकर आया था। कार की आवाज सुनकर वह घर से बाहर आया। उसने देखा कि जगदीश फोन पर बात करते हुए कार गांव के अंदर ले जा रहा था। रात करीब 11:45 बजे पांचों दोस्त कार से अनूपगढ़ की ओर चले गए। सुबह 5 बजे हादसे की सूचना मिलने पर वह श्रीगंगानगर हॉस्पिटल पहुंच गया था।
7 दिन पहले ही खरीदी थी कार
जगदीश ने आखिरी नवरात्रि यानी 1 अक्टूबर को नई कार ली थी। जगदीश करीब 16-17 सालों से टैक्सी चलाने का काम करता है। इससे पहले उसके पास क्रूजर गाड़ी थी। नरेश मजदूरी करता था और कालूरा नाई का काम करता था। कालूराम नरेश के चाचा का बेटा था। दोनों परिवार एक साथ ही रहते हैं। मरने वाले तीनों अविवाहित थे।
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ट्रक में कार घुसी, 3 श्रद्धालुओं की मौत:गाड़ी को काटकर निकालने पड़े शव; मरने वालों में 2 चचेरे भाई शामिल

आगे चल रहे ट्रक में पीछे से कार (टैक्सी) घुस गई। कार के परखच्चे उड़ गए। हादसे में कार सवार तीन श्रद्धालुओं ने मौके पर दम तोड़ दिया। दो गंभीर रूप से घायल हैं। (पूरी खबर पढ़ें…)
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