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जयपुर शहर की टूटी-फुटी सड़कों और मानसून में जलभराव की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट ने स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया हैं। जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बैंच ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए कहा कि शहर की खराब सड़के
अदालत ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पर विचार किया जाए कि क्या जयपुर अपनी सुंदरता और विरासत के लिए जाना जाने वाला गौरवशाली गुलाबी शहर बना रहेगा, या फिर अपनी ही बुनियादी संरचना की समस्याओं के चलते ढहते हुए एक डूबते शहर में बदल जाएगा।
अदालत ने इसे लेकर मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव यूडीएच, जेडीसी, हेरिटेज और ग्रेटर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा हैं।
मानसून में सड़कों के हालात बद्तर अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मानसून में शहर की सडक़ों के हालात बद्तर हो रहे हैं। जिससे उसकी विश्वव्यापी इमेज पर भी नकारात्मक प्रभाव पड रहा है। हर मानसून में यहां जलभराव, बाढ़ और जल निकासी की समस्या होती है।
जल निकासी की समस्या से रोजमर्रा के जीवन, पर्यावरण के साथ-साथ स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहा है। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी समस्या का समाधान करने में असफल हो गए हैं।
शायद ही किसी ठेकादार को ब्लैकलिस्ट किया हो अदालत ने कहा कि सड़क निर्माण और उसके मैंटिनेंस के लिए पर्याप्त धन के आंवटन के बावजूद घटिया और कम गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जाता हैं। जिससे करदाताओं के पैसे के इस्तेमाल से बनने वाली सड़क अगले दिन ही क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
लेकिन इसके बावजूद भी आज तक शायद ही किसी रोड ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया हो, बल्कि उन्हें ही वापस ठेके दिए जाते हैं। यह स्थिति शासन के कुप्रबंधन, लापरवाही और संभावित कदाचार को दर्शाती हैं।
बिना निरीक्षण बिल पास करने वालों के नाम बताओ अदालत ने संबंधित अधिकारियों को कहा है कि वे चार सप्ताह में शहर की सडक़ों की मरम्मत का समयबद्ध प्लान पेश करे। शहर में जलभराव की स्थिति खत्म करने और सीवरेज समस्या को हल करने की क्या योजना हैं।
इसके साथ ही अदालत ने सड़क निर्माण में घटिया सामग्री और तकनीक अपनाने वाले, तकनीकी खामियों को नजरअंदाज करने वाले और सड़क निर्माण के बाद बिना प्रभावी निरीक्षण के ही बिल पास करने वाले अधिकारियों के नाम बताने के निर्देश दिए हैं।
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