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राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव नहीं कराने को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जस्टिस अनूप ढंढ की अदालत ने छात्र जय राव की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राजस्थान यूनिवर्सिटी से जवाब तलब किया है।
याचिका में कहा गया था कि सरकार पिछले तीन सत्रों से छात्रसंघ चुनाव नहीं करवा रही है। जबकि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत एकेडमिक सेशन शुरू होने के 6-8 सप्ताह के अंदर ही चुनाव कराए जाने का प्रावधान है। वहीं, छात्रसंघ चुनाव के जरिए छात्र प्रतिनिधि चुनना छात्रों का मौलिक अधिकार है। सरकार उसका भी उल्लंघन कर रही हैं।
दो साल से सरकार कारण नहीं बता रही
वकील शांतनु पारीक ने बहस करते हुए कहा- राज्य सरकार हाईकोर्ट की लॉर्जर बैंच के फैसले और लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को नहीं मान रही है। दोनों में छात्रसंघ चुनाव कराने की बात कही गई है।
इस पर कोर्ट ने याचिकाकर्ता से चुनाव नहीं कराने के पीछे का कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि सरकार पिछले दो सालों से बिना किसी कारण के चुनाव नहीं करवा रही है।
उन्होंने बताया कि सत्र 2023-24 में सरकार ने चुनाव नहीं कराने के पीछे कारण बताते हुए कहा था कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी अभी लागू हुई है। उसके प्रावधान लागू करने में समय लग रहा है। वहीं, हम लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें लागू नहीं हो पा रही है। ऐसे में चुनाव नहीं करा सकते हैं।
लेकिन सत्र 2024-25 और सत्र 2025-26 में सरकार ने चुनाव नहीं कराने का कोई कारण नहीं बताया। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार और यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा हैं।
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