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ब्रह्मोस के जनक एवं प्रख्यात एयरोस्पेस वैज्ञानिक और पद्म भूषण एवं पद्मश्री से अलंकृत डॉ. ए. शिवथनु पिल्लई मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) पहुंचे।

ब्रह्मोस के जनक एवं प्रख्यात एयरोस्पेस वैज्ञानिक और पद्म भूषण एवं पद्मश्री से अलंकृत डॉ. ए. शिवथनु पिल्लई मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर (एमयूजे) पहुंचे। एमयूजे के प्रेसिडेंट प्रो. नीति निपुण शर्मा, प्रो-प्रेसिडेंट प्रो. करुणाकर ए. कोटेगर, रजिस्ट्रार डॉ. अ

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अपने दौरे के दौरान डॉ. पिल्लई ने यूनिवर्सिटी के नेतृत्व एवं शोधकर्ताओं के साथ विभिन्न शोध क्षेत्रों एवं सहयोग की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।

अपने दौरे के दौरान डॉ. पिल्लई ने यूनिवर्सिटी के नेतृत्व एवं शोधकर्ताओं के साथ विभिन्न शोध क्षेत्रों एवं सहयोग की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।

अपने दौरे के दौरान डॉ. पिल्लई ने यूनिवर्सिटी के नेतृत्व एवं शोधकर्ताओं के साथ विभिन्न शोध क्षेत्रों एवं सहयोग की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने विजन बियंड लिमिट्स विषय पर अपने अनुभव साझा किए और नवोदित शोधकर्ताओं को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “विश्वविद्यालयों को शोध पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही समाज और राष्ट्र की समस्याओं के समाधान का मार्ग है। भारत की युवा शक्ति पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि देश के 800 मिलियन युवा भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। साथ ही उन्होंने रक्षा एवं अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक स्थिति को भी रेखांकित किया।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने विजन बियंड लिमिट्स विषय पर अपने अनुभव साझा किए और नवोदित शोधकर्ताओं को प्रेरित किया।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने विजन बियंड लिमिट्स विषय पर अपने अनुभव साझा किए और नवोदित शोधकर्ताओं को प्रेरित किया।

चर्चा के दौरान प्रो. नीति निपुण शर्मा ने एमयूजे के शोध इकोसिस्टम, उत्कृष्टता केंद्रों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रो. करुणाकर ए. कोटेगर ने अपने स्वागत भाषण में डॉ. पिल्लई के प्रेरणादायी जीवन-प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका विश्वविद्यालय आगमन मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर के लिए एक सौभाग्य है।

यह कार्यक्रम लर्न आइटी स्टूडेंटस क्लब, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की ओर से छात्र कल्याण निदेशालय के सहयोग से आयोजित किया गया। डॉ. श्वेता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और इस स्मरणीय सत्र का समापन किया।



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