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बारिश के बाद अब प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थय विभाग के लिए डेंगू बड़ी चुनौती है। डेंगू के लार्वा पनपने के मुख्य 3 प्वाइंट हैं। मोहल्लों में पशुओं के लिए रखी गई खेळियां, पक्षियों के लिए पाळसिये और घरों के अंदर कूलर। पिछले साल दो आरएएस अफ्सरों की डेंगू
दरअसल नगर निगम ने एक आदेश जारी किया जिसमें निगम के सभी इंस्पेक्टर्स और जमादारों को जिम्मेवारी दी है कि उनके क्षेत्र में पशुओं को पानी पीने वाली खेळियों का पानी हर दो दिन में बदला जाए। मोहल्ले वासियों को कहा जाए कि खेळियों में वेवजह पानी भरकर ना रखें क्योंकि जहां खेळियां हैं उसके 100 मीटर दायरे में रहने वाले लोग रिस्क में होंगे क्योंकि डेंगू इतनी ही रेंज में डंक मारता है।
खेळियों में गंबूसिया मच्छली भी डालने के आदेश दिए। इसके अलावा घरों से लेकर दफ्तरों में जो भी पक्षियों के लिए पाळसिये रखे गए उनको पूरी तरह साफ किए जाएं क्योंकि पाळसिये में पानी रखने के बाद उसे कई दिन तक नहीं बदला जाता। इसलिए वहां डेंगू मच्छर पनप जाते हैं। तीसरा स्वास्थ्य विभाग को भी कहा कि उनकी टीम प्रत्येक घर तक जाए। खेळियों में गंबूसिया और दवा डालें ताकि मच्छर ना पनपें। घरों में कूलर का पानी बदलने के लिए प्रत्येक परिवार को पाबंद करें। उनको ये अहसास दिलाएं कि एक डेंगू रोगी की मौत तक हो सकती है।
छिड़काव कराएगा निगम, सवाल- क्या छिड़काव से मच्छर मरते हैं
नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग मिलकर शहर में छिड़काव कराने की योजना बना रहे हैं। खासकर वहां जहां ज्यादा डेंगू के केस सामने आए हैं। अब तक शहर में करीब 56 मामले सामने आ चुके हैं जबकि पिछले साल इन दिनों तक सवा दो सौ मामले पार हो गए थे। निगम इसके लिए छिड़काव वाहन तैयार करा रहा है मगर दूसरा सवाल ये भी उठने लगा कि क्या छिड़काव से मच्छर मरते हैं। अभी तक की स्टडी में सामने आया कि डेंगू मच्छर इस छिड़काव से नहीं मरते मगर लोगों की संतुष्टि के लिए छिड़काव किया जाता है। इतना जरूर है कि मच्छर एक जगह से उड़कर दूसरी जगह जरूर चला जाता है।
“पाळसिये तो सारे अधिकारियों को अपने-अपने कार्यालय में चैक कराने चाहिए और साफ कराने चाहिए। मैने भी निगम में रोज पानी बदलने के लिए कहा है। खेळियों में मच्छर ना पनपे इसके लिए इंस्पेक्टर्स और जमादारों को पाबंद किया है। लोग भी घरों में कूलर का पानी दो दिन बाद पूरी तरह साफ करें। डेंगू बहुत खतरनाक होता है। लोग खुद जागरूक रहें। बचाव ही बेहतर उपाय है।” -मयंक मनीष, कमिश्नर, नगर निगम
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