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शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रधुम्न जैन।
बच्चों को खांसी में दिया जाने वाले डेक्स्ट्रोमेथोर्फन सिरप (Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg/5ml (440) पर सरकार ने रोक लगा दी है। भरतपुर में दो मामले और सीकर में बच्चे की मौत के बाद ये बाद ये फैसला आया।
यहां बांसवाड़ा के भी सरकारी अस्पतालों में दवा के उपयोग और वितरण रोक दिया गया है। बांसवाड़ा में इस दवा की 50 हजार सिरप की खेप मिली थी। इनमें से 13 हजार सिरप सरकारी अस्पतालों में सप्लाई की जा चुकी थी। स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को सभी अस्पताल प्रभारियों को इस सिरप का इस्तेमाल नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
इस बारे में सीएमएचओ खुशपाल सिंह ने बताया- जिले में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। सावधानी के तौर पर सभी जगह पर उक्त दवाई की सप्लाई को रोक लगाने के निर्देश दे दिए हैं।
यह है डेक्स्ट्रोमेथोर्फन सिरप
डेक्स्ट्रोमेथोर्फन सिरप खांसी मिटाने के लिए दी जाती है। यह दवा सूखी खांसी या हल्की खांसी के इलाज में मदद करती है, खासकर जब खांसी सर्दी, फ्लू या अन्य श्वसन समस्याओं के कारण होती है। सिरप का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है। खासकर यदि मरीज को अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
अधिकांश बच्चे छुट्टी होकर गए घर, एमजी हॉस्पिटल का कोई मामला नहीं- डॉ. प्रधुम्न जैन
इस बारे में महात्मा गांधी चिकित्सालय के डॉ. प्रद्युम्न जैन शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया कि अधिकांश बच्चे पीएचसी व सीएचसी से आए थे। इनमें सांस लेने की तकलीफ ओर सुस्त रहने के लक्षण थे। उन्हें तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया था। अधिकांश बच्चे छुट्टी होकर घर चले गए हैं। जिला चिकित्सालय में दवाई देने से बच्चे के बीमार होने का कोई मामला नही है।
शिकायत वाले बैच की दवा नहीं हैं: गुप्ता
डॉ. प्रवीण गुप्ता, जिला परियोजना समन्वयक, आरएमएससीएल, बांसवाड़ा ने बताया- भरतपुर की घटना के बाद आरएमएससीएल मुख्यालय से कैसन फॉर्मा द्वारा संबंधित दवा के वितरण और उपयोग पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। इसकी पालना में जिले के समस्त संस्थान प्रभारियों को उपयोग और वितरण न करने के निर्देश दिए गए है। हालांकि जिस बैच के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई, उस बैच की दवा की सप्लाई बांसवाड़ा में नहीं हुई है।
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