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झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद सोमवार को जैसलमेर के सरकारी स्कूल में मुख्यद्वार का जर्जर खंभा गिरने से एक छात्र की मौत हो गई। वहीं एक शिक्षक घायल हो गया है। दरअसल, जर्जर और क्षतिग्रस्त स्कूलों में बारिश के मौसम में ऐसे प्ररकण रोजाना सामने आ रहे हैं। बीक
गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कहीं झोपड़े में तो कहीं बिना कमरों के भवन में आठवीं तक के स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। अनेक सरकारी स्कूल सर्वे में ऐसे सामने आए हैं जहां विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त कक्षा – कक्ष ही नहीं है। बिल्डिंग जर्जर है। कमरों का प्लास्टर उतर चुका है। पट्टियों में दरारें हैं। झालावाड़ की घटना के बाद ‘भास्कर’ ने भी ऐसे क्षतिग्रस्त स्कूलों का सर्वे किया। सामने आया कि 6 महीने पहले राजकीय पाबू पाठशाला स्कूल भवन में छठी से 12वीं के राजकीय उच्च माध्यमिक बालिका स्कूल आर्य समाज को मर्ज किया गया। लेकिन पाबूपाठशाला स्कूल बिल्डिंग के 6 कमरों में से तीन कमरे क्षतिग्रस्त हैं।
इन उदाहरणों से समझें स्कूलों के हालात
केस एक – चार कमरों का स्कूल अपग्रेड, अब छत पर 7 कक्षाएं किराए की बिल्डिंग में चले रहे राउमावि भुट्टो का बास स्कूल को 2023 में 8वीं से 12वीं में क्रमोन्नत किया गया। स्कूल में केवल चार ही कमरे हैं। अपग्रेड होने के कारण पहली से सातवीं कक्षा की पढ़ाई छत पर करवाई जा रही है। जबकि 9वीं और 10वीं के छात्र कमरों में पढ़ रहे हैं। किराए की बिल्डिंग होने के कारण पिछले दो साल से मरम्मत भी नहीं हुई है।
केस दो- बिना कमरों का स्कूल, एक हॉल में 8 कक्षाएं रानी बाजार स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल बंगाली मंदिर परिसर में सिर्फ एक कमरा है। जिसमें संस्था प्रधान का दफ्तर है। पहली से 8वीं की कक्षाएं एक हॉल में एक साथ लग रही है। बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने से स्कूल का नामांकन भी घट गया है। वर्तमान में स्कूल में केवल 75 बच्चे ही अध्यनरत हैं।
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