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राजस्थान में खनन से जुड़ी दो प्रमुख यूनियनों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है। स्टोन क्रेशर एसोसिएशन और चेजा पत्थर लीज होल्डर एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से संपूर्ण प्रदेश में समस्त खनन कार्यों को पूर्णतया बंद कर दिया है। उनका कहना है कि
राजस्थान माइनिंग इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगे नहीं मानी जातीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। इसके चलते जयपुर, अलवर, भरतपुर, अजमेर, कोटा, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, सिरोही सहित अन्य जिलों में स्टोन क्रेशर, चेजा पत्थर की सप्लाई और खनन परिवहन पूरी तरह से ठप हो गया है।
यूनियनों ने रखीं 21 प्रमुख मांगे
संघों ने राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपते हुए 21 मांगें रखी हैं। इसमें प्रमुख मांगें यह हैं कि RMMCR 2017 के नियमों को व्यवहारिक बनाया जाए, ड्रोन सर्वे की प्रक्रिया को व्यावहारिक किया जाए और पूरे प्रदेश में रॉयल्टी दरें समान रखी जाएं। लीजधारकों का आरोप है कि रॉयल्टी ठेकेदार मनमानी वसूली करते हैं और खान विभाग वैध पट्टों पर भी अवैध खनन के केस दर्ज कर रहा है।
इसके अलावा यूनियनों ने स्टोन क्रेशर और खनन को उद्योग का दर्जा देने, पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया सरल करने, नॉन वर्किंग खानों को खंडित न करने, खनिज परिवहन से जुड़े किसानों के ट्रैक्टरों पर लगाए गए जुर्मानों को माफ करने और एम सेंड को सरकारी निर्माण कार्यों में अनिवार्य रूप से शामिल करने जैसी मांगें रखी हैं।
एसोसिएशन ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों की ओर से राजस्थान के खनिजों पर लगाए गए एंट्री टैक्स का भी विरोध किया है। साथ ही RTO से लिंक हटाने, ट्रैक्टर ट्रॉली के रवन्ना और टीपी पूर्व की भांति फिर से चालू करने की भी मांग की है।
यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द बात नहीं की तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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