हनुमानगढ़ की श्रीनगर ग्राम पंचायत प्रशासक नवनीत संधू के अनुसार, पिछले साल 2023 में आई बाढ़ जैसी स्थिति आज भी बनी हुई है।
हनुमानगढ़ की श्रीनगर ग्राम पंचायत में घग्घर नदी के तटबंधों पर बसी आबादी को बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नदी के बहाव क्षेत्र में किसानों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
ग्राम पंचायत प्रशासक नवनीत संधू के अनुसार, पिछले साल 2023 में आई बाढ़ जैसी स्थिति आज भी बनी हुई है। आगे के किसानों ने दो-तीन संवेदनशील स्थानों पर नदी के बहाव क्षेत्र को रोक रखा है। अतिक्रमण के कारण इन जगहों पर केवल आधा बीघा जगह बची है।
श्रीनगर पंचायत के पास जिले के सबसे लंबे तटबंध हैं, जो लगभग 10-12 किलोमीटर तक फैले हैं। इन तटबंधों में कटाव को रोकने के लिए कट्टे लगाए गए हैं। प्रशासक का आरोप है कि मानसून से पहले बार-बार मांग करने के बावजूद न तो स्थिति का जायजा लिया गया और न ही अतिक्रमण हटाए गए।

श्रीनगर पंचायत के तटबंधों में कटाव को रोकने के लिए कट्टे लगाए गए।
सिंचाई विभाग की ओर से इस मामले में शुरू से ही गंभीरता नहीं दिखाई गई है। अगर इस समय नदी में पानी की आवक बढ़ती है, तो तटबंधों पर बढ़ते दबाव से उनके टूटने का खतरा है। इससे आसपास के गांवों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से भी कोई विशेष इन्तजाम बाढ़ की आशंका के दृष्टिगत ग्राम पंचायत के पास नहीं किए गए। लाइटिंग आदि भी नहीं करवाई गई। ग्राम पंचायत की ओर से अपने स्तर पर पहरेदारी की जा रही है। रास्ते कच्चे होने की वजह से बारिश के बाद घग्घर नदी के तटबंधों पर पहुंचने की कोई व्यवस्था नहीं बचती। दलदल बनने के कारण पैदल ही आना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में मदद नहीं पहुंच पाती। अगर घग्घर नदी में पानी की अधिक आवक से तटबंध टूटते हैं और इससे होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की होगी।
उन्होंने प्रशासन से समय रहते वर्तमान स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक बंदोबस्त करने व घग्घर बहाव क्षेत्र में हुए अतिक्रमण हटवाने की मांग की।
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