राजस्थान क्राइम फाइल के पार्ट-1 में आपने पढ़ा गंगानगर के सादुलशहर में 22 दिसंबर 2015 की दोपहर टॉफी लेने गई घर से निकली छह साल की मासूम लापता हो गई।
पुलिस के साथ मां-पिता-दादा सहित पूरा मोहल्ला ढूंढने में लगा था, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस को मोहल्ले में घूमने वाले एक बाबा की तलाश थी कि कहीं वह तो बच्ची को उठाकर नहीं ले गया?
जांच के दौरान बाबा का कोई सुराग नहीं मिला और न ही बच्ची का। न परिवार की किसी से दुश्मनी थी, न ही मामले में किडनैपिंग का एंगल दिख रहा था।
बच्ची को गायब हुए 24 घंटे से ज्यादा हो चुके थे। पुलिस ने तय किया अब मोहल्ले में ही बारीकी से जांच और तलाश करनी होगी।
अब पढ़िए आगे की कहानी…

पुलिस ने तय किया कि गली के एक-एक घर की तलाशी ली जाएगी। पुलिस ने गंगा के घर से ही इसकी शुरुआत की। दोपहर बाद तलाशी होने के कारण देर शाम को घर-घर तलाशी अभियान रोका। अगले दिन 24 दिसंबर 2015 को फिर तलाशी लेनी शुरू की।
सभी घरों की तलाशी लेते हुए पुलिस गंगा के माता-पिता के दूर के रिश्तेदार दुकान मालिक युवक के घर पर पहुंची। गली के लगभग कोने पर स्थित दुकान मालिक के घर की तलाशी शुरू की गई। दुकान सहित पूरे कमरे छान मारे, लेकिन कुछ नहीं मिला।
फिर पुलिस घर के पीछे के हिस्से में तलाशी के लिए पहुंची। यहां फर्श कच्चा था। गौर से देखा तो एक जगह मिट्टी कुछ उठी हुई सी लगी। पुलिस ने पूछा कि क्या यहां कोई गड्ढा था, जिसे भरा है?
इस पर दुकान मालिक की मां ने जवाब दिया- वहां एक बड़ा पौधा लगाना था। पौधा नहीं लगा पाए तो गड्ढे को भर दिया। पुलिस ने मिट्टी को खोदा, लेकिन कुछ नहीं मिला।

इसके बाद पुलिस तलाशी लेते हुए दुकान मालिक के घर की छत पर पहुंची। यहां पुलिस को छोटी बच्ची के जूते मिले। पुलिस ने पूछा- क्या घर में कोई छोटी बच्ची भी है?
दुकान मालिक के परिजनों ने जवाब दिया-नहीं! हमारे यहां तो कोई छोटी बच्ची नहीं है। पुलिस को शक हुआ और पूछा- फिर ये छोटी बच्ची के जूते आपकी छत पर कैसे पहुंचे?
इस बीच पुलिस ने गंगा के माता-पिता को बुलवाया और जूते दिखाए। गंगा की मां फूट-फूट कर रोने लगी। बोली- ये गंगा के जूते हैं, गंगा कहां है?
पुलिस ने कहा कि अभी कुछ नहीं कह सकते। तलाशी और जांच जारी है। पुलिस ने अपने टीम के साथियों से गंगा के मां-पिता को दुकान मालिक के घर से बाहर ले जाने को कहा।
पुलिस ने दुकान मालिक के सभी परिजनों से पूछताछ शुरू की। 19 साल का दुकान मालिक और उसके पिता-माता पुलिस के सामने आए।
दुकान मालिक के पिता ने कहा कि मैं काम पर बाहर जाता हूं। पत्नी घर रहती है। दुकान मेरा बेटा संभालता है। गंगा के माता-पिता हमारे दूर के रिश्तेदार लगते हैं।

एक सवाल से युवक पर शक गहराया
पुलिस ने दुकान संभालने वाले 19 साल लड़के की तरफ देखा। वही, गंगा के माता-पिता के साथ मामला दर्ज कराने थाने गया था। गंगा के घरवालों के साथ उसे ढूंढ भी रहा था।
पुलिस ने पूछा- गंगा तुम्हारी दुकान पर रोज टॉफी लेने आती थी। 22 दिसंबर को भी आई होगी? इस पर युवक बोला- हां! रोज आती थी, लेकिन 22 दिसंबर को गंगा नहीं आई। पुलिस ने पूछा- यदि गंगा नहीं आई तो फिर उसके जूते छत तक कैसे पहुंचे? इस सवाल का युवक के पास कोई जवाब नहीं था।
लड़के की मां बार-बार पुलिसवालों को आवाज देने लगी
इस बीच जो पुलिसकर्मी छत पर थे, उन्हें युवक की मां नीचे आने के लिए बोलने लगी। इससे पुलिस को शक और गहरा गया। छत पर पड़े कबाड़ आदि की जांच और बारीकी से शुरू कर दी। वहीं, एक कूलर पड़ा हुआ था। कूलर से हल्की बदबू आ रही थी।
पुलिस ने कूलर खोला तो हर कोई दंग रह गया। कूलर में गंगा का शव था। पुलिस ने शव कूलर से निकाला। उसके शरीर पर कई जगह गंभीर चोटों के निशान थे।
पुलिस ने गंगा के शव को परिजनों को सौंपा। युवक को थाने ले गए। वहां उससे सख्ती से पूछताछ की। पूछताछ में युवक ने सारी कहानी ने बता दी।

बच्ची की गला दबाकर हत्या
युवक ने बताया- गंगा टॉफी लेने आई थी। उसे देखकर मेरी नीयत बिगड़ गई। मैंने उसे कहा- एक बहुत अच्छी चॉकलेट लाया हूं। भीतर आएगी तो दूंगा। बच्ची भीतर आ गई।
मैंने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। इस कारण उसे चोट लग गई और वो रोने लगी। मैं डर गया और उसका गला दबा दिया। इससे उसकी मौत हो गई। इस बीच मां को पता चल गया।
पहले गड्ढा खोदा, फिर कूलर में छुपाया
मैंने बच्ची के शव को दफनाने के लिए घर के पीछे गड्ढा खोदा। मैं उसके शव को कमरे में लेने गया, तब मोहल्ले से गंगा को पुकारने की आवाजें आने लगीं। मैंने सोचा कि अभी गड्ढे में डालकर मिट्टी डालूंगा तो कोई देख लेगा।
मैं डर गया और गंगा के शव को उठाकर जल्दी-जल्दी छत पर ले गया और कूलर में छिपा दिया। इस बीच उसके जूते खुल गए होंगे, जिस पर मेरा ध्यान नहीं गया।
मोहल्ले में इतना हल्ला हो गया कि मैंने सोचा कि जब मामला शांत हो जाएगा, तब गड्ढे में दबा दूंगा। रात को भी मोहल्लेवाले गंगा को ढूंढते रहे, ऐसे में शव दफनाने का मौका नहीं मिला। जब पुलिस ने घर-घर तलाशी शुरू की तो मैंने गड्ढे को वापस मिट्टी से भर दिया, ताकि किसी को शक न हो।
पुलिस ने पूछा- तेरे घर इतना सब हुआ, फिर तेरे माता-पिता को कुछ नहीं पता चला? युवक ने कहा– पिता को कुछ नहीं पता, लेकिन मां को सब कुछ पता है। पुलिस ने इस बयान के आधार पर युवक की मां को भी गिरफ्तार कर लिया।

बेटे के साथ मां को भी आरोपी बनाया
अब ये मामला गुमशुदगी के बजाय 6 साल की मासूम के रेप और मर्डर का बन गया था। पुलिस ने 24 दिसम्बर, 2015 को पॉक्सो एक्ट के तहत 19 वर्षीय दुकान मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया।
गंगा के शव को छिपाने की साजिश में शामिल होने के कारण दुकान मालिक की मां को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 24 दिसम्बर को गंगा के शव का पोस्टमार्टम करवाया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची से रेप व गला घोंटकर हत्या करने की पुष्टि हुई। घटना को लेकर लोगों में इतना गुस्सा था कि श्रीगंगानगर जिले के वकीलों ने तय किया कि आरोपी का केस नहीं लड़ेंगे। इस कारण इस मामले को नजदीक के जिले हनुमानगढ़ की विशेष अदालत में शिफ्ट कर दिया गया।
आरोपी ने पहले खुद को नाबालिग बताया
मामला कोर्ट में जाते ही आरोपी ने एक चाल और खेली। खुद के नाबालिग होने का दावा किया गया। मामला किशोर न्याय बोर्ड में चला गया।
बोर्ड में स्कूल में दाखिले के समय के कागजातों में दर्ज तारीख और जन्म के बाद नामकरण की बही में लिखी जिन्मतिथि आदि दस्तावेज पेश हुए। इसमें दर्ज आयु के हिसाब से दुकान मालिक की आयु 19 साल पाई गई।
वहीं, आरोपी की आयु के मामले में और पुख्ता होने के लिए किशोर न्याय बोर्ड मेडिकल बोर्ड से भी जांच करवाई। मेडिकल बोर्ड ने दुकान मालिक की आयु 19 से 21 साल के बीच होने की रिपोर्ट पेश की।
सभी दस्तावेज और मेडिकल बोर्ड की जांचों में दुकान मालिक के बालिग पाए जाने पर किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग होने की याचिका खारिज कर दी। मामले की सुनवाई फिर हनुमानगढ़ के विशेष न्यायालय में शुरू हुई।
नवंबर 2019 में बच्ची से दुष्कर्म व हत्या के मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो हनुमानगढ़ ने दोषी दुकान मालिक को उम्रकैद और उसकी मां को 5 साल के कठोर कारावास की सजा दी गई। राज्य सरकार की ओर से मामले की पैरवी विशिष्ट लोक अभियोजक विनोद डूडी ने की।
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