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सुजानदेसर और वल्लभ गार्डन के लंबे-चौड़े भू-भाग में सालों से जमा गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए एसटीपी और पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा। इस पर लगभग 67 करोड़ का खर्च आएगा। नगर निगम ने स्थानीय निकाय विभाग को सवालों के जवाब भेज दिए हैं। वहां से फाइल मं
सुजानदेसर के करीब 80 बीघा और वल्लभ गार्डन में लगभग 400 बीघा क्षेत्र में शहर का गंदा पानी इकट्ठा होता है। इस समस्या का समाधान करने के लिए वल्लभ गार्डन में 20 एमएलडी का पंपिंग स्टेशन बनेगा, जिस पर 14.22 करोड़ की लागत आएगी। पंपिंग स्टेशन से पानी पंप करके सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में डाला जाएगा। इसी प्रकार सुजानदेसर चांदमल बाग क्षेत्र में 30 करोड़ की लागत से काली मंदिर के पास 12 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। खुदखुदा कॉलोनी तक पाइप लाइन डाली जाएगी, जिससे वहां जमा होने वाला गंदा पानी प्लांट तक लाया जा सकेगा। इस पर 10 करोड़ की लागत आएगी।
पांच करोड़ रुपए शहर के नालों की सफाई पर खर्च होंगे। यह पूरा प्रोजेक्ट 67 करोड़ का है, जिसमें करीब 7 करोड़ रुपए 10 साल में मरम्मत पर खर्च किए जाएंगे। नगर निगम ने जयपुर की एक फर्म को इस काम का टेंडर दे दिया है, लेकिन वर्क ऑर्डर अब तक नहीं हो पाए हैं।
मामला डीएलबी में अटका हुआ है। डीएलबी ने प्रोजेक्ट को लेकर समय अवधि, टेंडर में दो ही बिडर के आने सहित कुछ सवालों के जवाब मांगे थे, जो सोमवार को ही भेजे गए हैं। डीएलबी से फाइल नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा के पास जाएगी। बजट की अंतिम स्वीकृति वित्त विभाग से मिलेगी। इसके बाद ही वर्क ऑर्डर जारी होंगे।
क्या है मामला
सुजानदेसर के चांदमल बाग और वल्लभ गार्डन में शहर का गंदा पानी इकट्ठा होता है। 20 साल पुरानी यह समस्या मानसून में विकराल रूप ले चुकी है। पानी का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिसने दोनों ही जगह पर बड़ी झील का रूप ले लिया है। इन दोनों ही स्थानों पर इस पानी के कारण 1500 से 2000 परिवार सीधे-सीधे प्रभावित हो रहे हैं। बारिश होने पर उन्हें पूरी-पूरी रात जागना पड़ता है, क्योंकि पानी घरों के अंदर तक आ जाता है। कई मकान पानी से घिर जाते हैं। इस वजह से कुछ दिनों के लिए घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ती है।
वल्लभ गार्डन में समस्या और गहराने वाली है। बजरंग विहार के पास लो लेवल एरिया के 25 बीघा में कॉलोनी काटने के लिए लोगों ने हाउसिंग बोर्ड की जमीन को खोद डाला। करीब चार फीट तक भरती की है ताकि बारिश के दिनों में गंदा पानी न पहुंचे, लेकिन इससे बजरंग विहार, मदन विहार, केशव विहार और वल्लभ गार्डन की कॉलोनी पर खतरा मंडराने लगा है। ज्यादा बारिश होने पर पानी पीर खाने की तरफ जाने के बजाय इन कॉलोनियों में आने लगा है। पास ही स्कूल भी हैं। गंदगी के कारण मच्छरों से बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है।
भास्कर इनसाइट – सीवरेज समस्या पर 10 साल में 175 करोड़ खर्च कर दिए
शहर में सीवरेज की समस्या का समाधान करने के लिए पिछले 10 साल में मोटे तौर पर 175 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। इसमें से 139 करोड़ रुपए से वल्लभ गार्डन में नया सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया था। बाइपास के पास जमा गंदे पानी को लिफ्ट करने के लिए पंपिंग स्टेशन बनाने के लिए बजट घोषणा हुई थी, लेकिन उसका निर्माण प्रस्तावित है। इसी प्रकार सुजानदेसर में 20 करोड़ की लागत से 10 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया।
वहीं पर 30 एमएलडी का पंपिंग स्टेशन भी बनाया गया, लेकिन इससे चांदमल बाग में जमा पानी की समस्या का समाधान नहीं हो पाया। इसके लिए वहां करीब 15 करोड़ खर्च करके अलग से पंपिंग स्टेशन बना दिया गया। यह पंपिंग स्टेशन काम कर रहा है। मगर बीच में करीब 100 मीटर नाला छूटा हुआ है, जिससे पानी सुजानदेसर के एसटीपी तक नहीं पहुंच पा रहा। पास ही रंगरेजों की बस्ती का पानी भी बद्री भैरव नाले से होते हुए चांदमल बाग क्षेत्र में ही जमा होता है।
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