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राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के सरस्वती नगर में चल रहे अवैध निर्माण मामले में सख्त रुख अपनाते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है। जस्टिस कुलदीप माथुर ने पाली निवासी गणेश राम की याचिका संख्या पर सुनवाई करते हुए नगर निगम (दक्षिण) जोधपुर के आयुक्

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मामला सरस्वती नगर स्थित एक चार मंजिला इमारत के अवैध निर्माण को लेकर है। मूलतया पाली के बाली में भाटूंद हाल सरस्वती नगर निवासी याचिकाकर्ता गणेशराम ने कोर्ट को बताया कि जनता स्वीट होम के मालिक राजेश अग्रवाल द्वारा सरस्वती नगर में बिना किसी अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियों के लिए चार मंजिला इमारत का निर्माण कराया जा रहा है।

निगम आयुक्त को किया कोर्ट में तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार को निर्देश दिया कि वे नगर निगम (दक्षिण) जोधपुर के आयुक्त को अदालत में उपस्थित कराएं। कोर्ट के सुबह 10:30 बजे के आदेश का पालन करते हुए निगम आयुक्त सिद्धार्थ पालानीचामी कोर्ट में उपस्थित हुए। जस्टिस माथुर ने उनसे पूछा कि क्या जिस क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण हो रहा है, वह नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है या नहीं? और क्या प्रतिवादी-4 ने बहुमंजिला इमारत के निर्माण के लिए नगर निगम से कोई अनुमति ली थी या नहीं?

आयुक्त पालानीचामी ने कोर्ट को बताया कि जिस क्षेत्र में कथित अवैध निर्माण हो रहा है, वह नगर निगम (दक्षिण) जोधपुर के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने आगे कहा कि आज तक प्रतिवादी राजेश अग्रवाल को चार मंजिला इमारत के निर्माण की कोई अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने बताया कि आज ही प्रतिवादी की ओर से विवादित भूमि पर निर्माण की अनुमति मांगते हुए उनके कार्यालय में आवेदन प्राप्त हुआ है।

निर्माणकर्ता ने मांगी जवाब के लिए मोहलत

प्रतिवादी अग्रवाल के वकील ओ.पी. मेहता ने कोर्ट में बताया कि उन्होंने आज ही अपने मुवक्किल की ओर से कैवियट दाखिल किया है और इसलिए उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया जाए। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 23 सितंबर के लिए तय की है।

आगे निर्माण पर तत्काल रोक

अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया कि अगली सुनवाई तक सरस्वती नगर के उस भूखंड पर आगे का निर्माण कार्य बंद रहेगा। कोर्ट ने नगर निगम (दक्षिण) जोधपुर के आयुक्त को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे सुनिश्चित करें कि नगर निगम (दक्षिण) जोधपुर के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सरस्वती नगर के उस भूखंड पर कोई अवैध गतिविधि या निर्माण न हो।

याचिकाकर्ता की तरफ से मुक्तेश माहेश्वरी और महावीर सिंह, जबकि प्रतिवादियों की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार और मोनल चुघ, निगम आयुक्त सिद्धार्थ पालानीचामी और ओ.पी. मेहता ने पक्ष रखा।



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