उस दिन अस्पताल का स्टाफ भी रोया, ससुराल वाले ICU की गैलरी में जाकर रोए। वह बिस्तर पर लेटी, मशीनों में जकड़ी थी। फिर भी हंस रही थी। डॉक्टर ने भी कहा कि बहुत सारे कैंसर पेशेंट हैं, लेकिन प्रियंका कुछ अलग है। 25 अगस्त को सब लोग प्रियंका से मिलने पहुंचे थ
यह कहते हुए जालोर निवासी ज्वेलर नरपत सिंह रो पड़े। उनकी 27 साल की बेटी प्रियंका उर्फ पीहू की हड्डियों के कैंसर की बीमारी से 2 सितंबर को मौत हो गई। प्रियंका ने मरने से 7 दिन पहले ICU में केक मंगवाया था। बिल्डर पति लक्ष्यराज के साथ केक को काटा और सबको खिलाया, बोली- मैं हंसते हुए मरना चाहती हूं। पिता ने कहा कि बेटी की बातें सुनने के बाद अकेले में रोना चाहता था, लेकिन लाड़ली को कमजोर नहीं कर सकता था।
सबसे पहले देखिए ICU की तस्वीर…

तस्वीर 25 अगस्त की है। उस दिन प्रियंका ने केक मंगवाया था। पति लक्ष्यराज ने उन्हें केक खिलाया था।
जनवरी 2023 में हुई थी शादी जालोर के आहोर के पचानवा गांव निवासी नरपत सिंह पश्चिम बंगाल के हुबली में ज्वेलर हैं। उनकी बेटी प्रियंका ने हुबली से BBA में ग्रेजुएट किया, फिर CA इंटरमीडिएट का एग्जाम पास किया। हालांकि फाइनल परीक्षा नहीं दे पाई। उन्होंने जनवरी 2023 में रानीवाड़ा के भाटवास गांव निवासी बिल्डर लक्ष्यराज सिंह भाटवास से प्रियंका की शादी दी।

तस्वीर, प्रियंका और उसके भाई जयपाल की बचपन है।
अब सिलसिलेवार पढ़िए प्रियंका की कहानी…
2 साल पहले हुई थी शादी पिता नरपत सिंह कहते हैं- पीहू (प्रियंका) घर की सबसे लाड़ली थी। जब भी उसे याद करता हूं, उसके नन्हे से हाथ याद आते हैं। याद आता है कि कैसे वह अपना प्यारा सा चेहरा बनाकर हर जिद पूरी करवा लेती थी। जब वो गई तो मैं कुछ नहीं कर पाया। उसने कोई जिद नहीं की। कुछ नहीं मांगा। ऐसा लगता है वो आस-पास ही है।
पिता नरपत सिंह बताते हैं- चार भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर की थी। उसके भाई से भी ज्यादा हम उसे प्यार करते थे। पढ़ने में बहुत इंटेलिजेंट थी।

ये वो केक जिसे प्रियंका का भाई 25 अगस्त को ICU में लेकर आया था।
पैरों का दर्द निकला कैंसर पिता नरपत सिंह कहते हैं- शादी के बाद प्रियंका के पैरों में दर्द था। दामाद ने अस्पताल में दिखवाया। तो हम सभी ने नार्मल समझा और दोनों इसके बाद मुंबई चले गए। यह दर्द धीरे-धीरे हड्डियों तक पहुंच गया। एक महीने बाद फरवरी 2023 में मुंबई में ही प्रियंका के MRI टेस्ट करवाए तो पता चला कि उसे इविंग सार्कोमा नाम का दुर्लभ कैंसर है।
सुनते ही हमारे पैरों तले से जमीन खिसक गई, सब हो गए। जैसे पता चला मेरा बेटा जयपाल मुंबई पहुंच गया। सबसे पहली सर्जरी मार्च 2023 में हुई। इसके बाद जून 2024 में दूसरी सर्जरी हुई। फिर हम प्रियंका को राजस्थान ले आए। यहां 2 अगस्त को उदयपुर के पेसिफिक अस्पताल में तीसरी बार सर्जरी हुई।

अपनी मां और भाई के साथ प्रियंका की फाइल फोटो।
9 अगस्त को दर्द के चलते फिर भर्ती करना पड़ा पिता नरपत सिंह कहते हैं- इसके बाद डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। उसे कुछ दिनों का मेहमान बताया। कहा- जितनी सेवा कर सकते हो कर लीजिए। अब ज्यादा समय नहीं है। इसके बाद हम 8 अगस्त को प्रियंका को घर ले आए। स्पाइन के तीन-तीन ऑपरेशन। ब्रेन का रेडिएशन देने के बाद भी बीमारी बढ़ती ही जा रही थी। मेरे सामने ही बेटी कमजोर होती जा रही थी। 9 अगस्त को हड्डियों में फिर दर्द शुरू हुआ। हम उसे उदयपुर लेकर पहुंचे, जहां इलाज के बाद कुछ रिलीफ तो मिला, लेकिन जिंदगी नहीं बढ़ी।
‘पापा केक मंगवाओ, आखिर पल सेलिब्रेट करेंगे’ पिता नरपत सिंह कहते हैं- प्रियंका को ये बात पता थी कि वो अब कुछ ही दिन की मेहमान है। 25 अगस्त को सब लोग प्रियंका से मिलने पहुंचे थे। उसके ससुराल वाले भी अस्पताल आए थे। सबको साथ देखकर वो बहुत खुश थी। अचानक बोली- एक केक लाओ में इसे काटकर अपने आखिरी पलों को सेलिब्रेट करना चाहती हूं।
पिता कहते हैं- उस दिन ICU में सेलिब्रेशन का माहौल था। वह सबको बुला-बुलाकर अपने हाथों से केक खिला रही थी। उसने कहा- बस अब मैं जल्दी ठीक होकर घर आ जाऊंगी। उस दिन अस्पताल का स्टाफ भी रोया, परिवार के सदस्य, ससुराल वाले ICU की गैलरी में जा कर रोए। उसके सामने रोना किसी को गंवारा नहीं था। इतनी हिम्मती बच्ची को कोई कमजोर नहीं करना चाहता था। वह बिस्तर पर लेटी, मशीनों में जकड़ी थी। फिर भी हंस रही थी।
डॉक्टर भी बोल पड़े कि बहुत सारे कैंसर पेशेंट हैं, लेकिन प्रियंका कुछ अलग थी। उसमें जीने का जज्बा था। उसके सपने थे जिन्हें वो देखती थी और अब भी आस थी कि वो ठीक हो जाएगी तो घूमेगी, CA बनेगी। पति के साथ, पापा के साथ रहेगी।

ICU में भी प्रियंका हमेशा खुश रहती थी। तस्वीर में प्रियंका के पिता उसे दुलार करते नजर आ रहे हैं।
भाई को बाय किया, 20 मिनट बाद जिंदगी से अलविदा पिता कहते हैं- 2 सितंबर की दोपहर उसकी हालत ठीक नहीं थी। हम सब उसके पास खड़े थे। वो अचानक से जयपाल (भाई) से बोली- तूने सुबह से खाना नहीं खाया है। जा खाना खाकर आ, मैं कहीं नहीं जा रही।
प्रियंका ने भाई जयपाल को बाय किया। इसके करीब 20 मिनट बाद हमेशा के लिए शांत हो गई। दोपहर 1 बजे उसने आखिरी सांस ली। तब भी वह मुस्कुरा रही थी। उसने हमें सिखाया है कि जिंदगी में चाहे कितने भी दर्द हो उसे मुस्कुरा कर कैसे जिया जाता है।
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