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सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 पेपरलीक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया हैं। एकलपीठ में याचिकाकर्ता रहे कैलाशचंद्र शर्मा ने हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की हैं।

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एसएलपी में डिवीजन बैंच के 8 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी गई है। जिसमें डिवीजन बैंच ने एकलपीठ के भर्ती रद्द करने के 28 अगस्त के आदेश पर रोक लगा दी थी।

वहीं चयनित अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में कैविएट लगाई है। जिससे सुप्रीम कोर्ट उन्हें सुने बिना कोई फैसला नहीं दे। सुप्रीम कोर्ट में संभवत अगले सप्ताह मामले की सुनवाई हो सकती हैं।

सोर्स बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता ऋषभ संचेती ने बताया कि हमने डिवीजन बेंच के फैसले को चार आधार पर चुनौती दी हैं। जिसमें हमने कहा है कि खंडपीठ यह नहीं कह सकती है कि एकलपीठ ने अप्रमाणिक रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया हैं।

दूसरा हमने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट राफेल मामले में स्पष्ट कर चुका है कि याचिकाकर्ता को सोर्स बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता हैं। कोर्ट दस्तावेज की प्रमाणिता पर नहीं जा सकता हैं। रिपोर्ट को तभी दरकिनार किया जा सकता है, जब यह सुनिश्चित हो जाए कि यह रिपोर्ट फर्जी और कूटरचित दस्तावेज हैं।

फील्ड ट्रेनिंग की छूट देना गलत उन्होने बताया कि हमने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि जब एकलपीठ ने करीब 10 महीने पहले ट्रेनी एसआई की फील्ड ट्रैनिंग पर रोक लगा दी थी। उस फैसले को उस समय खंडपीठ ने भी कंफर्म किया था। लेकिन अब डिवीजन बैंच ने फील्ड ट्रेनिंग की भी छूट दे दी हैं।

जबकि फील्ड ट्रेनिंग में भी स्वतत्र कार्य प्रभार दिया जाता हैं। अगर दागी पुलिस अधिकारी ट्रेनिंग पर जाते है तो आमजन का विश्वास खत्म हो जाएगा।

इसके साथ ही एकलपीठ ने आरपीएससी की कार्यशैली को लेकर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। जिसे मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करके सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया था। लेकिन खंडपीठ के पूरे आदेश पर रोक लगाने से इस मामले में भी सुनवाई नही हो सकी। ऐसे में एक खंडपीठ दूसरे खंडपीठ के आदेश पर रोक नहीं लगा सकती हैं।

एकलपीठ से होते हुए मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट दरअसल, हाईकोर्ट की एकलपीठ में एसआई भर्ती में पेपरलीक का आरोप लगाते हुए याचिकाएं दायर हुई थी। करीब एक साल की सुनवाई के बाद जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 28 अगस्त को पूरी भर्ती को रद्द करने का आदेश दे दिया।

इस आदेश के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट की डिवीजन बैंच में अपील की। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस एसपी शर्मा की खंडपीठ ने 8 सितम्बर को एकलपीठ के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। अब एकलपीठ के याचिकाकर्ताओं ने डिवीजन बैंच के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हैं।



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