एमबीसी राजकीय कन्या महाविद्यालय बाड़मेर में भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, राष्ट्रीय सेवा योजना एवं महिला प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह समापन अवसर पर भारतीय संस्कृति में संस्कृत का योगदान विषय पर विचार गोष्ठी हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा की महत्ता और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की प्रासंगिकता को उजागर करना रहा।
मुख्य वक्ता सहायक आचार्य राजकीय महाविद्यालय डॉ. मुकेश जैन ने संस्कृत को ज्ञान की जननी और संस्कृति की आत्मा बताते हुए कहा कि यह केवल भाषा नहीं, बल्कि भारत की वैचारिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक परंपरा का मूल स्रोत है। गणित, खगोल, चिकित्सा, वास्तुकला व दर्शन में संस्कृत साहित्य का अनुपम योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में संस्कृत को पूजा की नहीं, बल्कि प्रोत्साहन की आवश्यकता है। संस्कृत के उत्थान से भारतीय मनीषियों व वैज्ञानिकों को उनका उचित श्रेय मिलेगा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. मुकेश पचौरी ने कहा कि भारतीय ज्ञान-विज्ञान की जड़ें गहरी व समृद्ध हैं और यह आज भी अनुसंधान के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने छात्राओं से भारतीय भाषाओं व ज्ञान परंपरा पर शोध करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार व दीप प्रज्वलन से हुआ। निबंध प्रतियोगिता में डिम्पल प्रथम रही। धन्यवाद ज्ञापन समन्वयक चेतन तिवारी ने किया। इस अवसर पर डॉ. विमला, जितेंद्र कुमार बोहरा व देवाराम उपस्थित रहे।
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